पहली EMI चल रही है, फिर भी चाहिए नया लोन? जानिये नए लोन के लिए क्या करना होगा उपाय

Loan EMI: आजकल हर दूसरे व्यक्ति पर कोई न कोई EMI चल रही है। होम लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाये पर ईएमआई चल रही है। ऐसे में जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो सबसे पहला सवाल यही आता है..

अपडेटेड May 05, 2026 पर 5:21 PM
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EMI: आजकल हर दूसरे व्यक्ति पर कोई न कोई EMI चल रही है।

Loan EMI: आजकल हर दूसरे व्यक्ति पर कोई न कोई EMI चल रही है। होम लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाये पर ईएमआई चल रही है। ऐसे में जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो सबसे पहला सवाल यही आता है.. क्या पहले से EMI होने के बावजूद नया लोन मिल सकता है? जवाब सीधा है, मिल सकता है, लेकिन उतना आसान नहीं जितना लगता है। बैंक आपकी सैलरी से ज्यादा इस बात पर ध्यान देते हैं कि EMI चुकाने के बाद आपके पास कितना पैसा बचता है। यही बची हुई रकम तय करती है कि आपको नया लोन मिलेगा या नहीं।

कैसे तय होता है नया लोन मिलेगा या नहीं?

जब आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक आपकी कुल मंथली इनकम से सभी मौजूदा EMI घटाते हैं। इसके बाद जो रकम बचती है, उसी के आधार पर यह तय होता है कि आप नया लोन ले सकते हैं या नहीं। यही कैलकुलेशन एक खास रेशो से समझा जाता है, जिसे Fixed Obligation to Income Ratio (FOIR) कहा जाता है।


EMI चल रही है तो क्या नया लोन मिल सकता है?

आज के समय में ज्यादातर लोग होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI भर रहे होते हैं। ऐसे में एक बड़ा सवाल अक्सर सामने आता है क्या चल रही EMI के बीच नया लोन मिल सकता है? जवाब है, हां, लेकिन कुछ शर्तों के साथ।

दरअसल, बैंक सिर्फ आपकी सैलरी देखकर लोन नहीं देते। वे यह भी देखते हैं कि आपकी कमाई में से हर महीने कितना पैसा पहले से EMI में जा रहा है और कितना बच रहा है।

कैसे तय होता है नया लोन मिलेगा या नहीं?

जब आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक आपकी कुल मंथली इनकम (Income) से सभी मौजूदा EMI घटाते हैं। इसके बाद जो रकम बचती है, उसी के आधार पर यह तय होता है कि आप नया लोन ले सकते हैं या नहीं। यही कैलकुलेशन एक खास रेशो से समझा जाता है, जिसे Fixed Obligation to Income Ratio (FOIR) कहा जाता है।

क्या होता है FOIR?

FOIR बताता है कि आपकी इनकम का कितना हिस्सा EMI में जा रहा है।

अगर आपकी सैलरी 1 लाख रुपये है और आप 40,000 रुपये EMI दे रहे हैं। तो आपका FOIR 40% होगा, जो अच्छा माना जाता है। लेकिन अगर नई EMI जोड़ने के बाद कुल EMI 65,000 रुपये हो जाए, तो FOIR 65% हो जाएगा। इस स्थिति में बैंक लोन देने से हिचक सकते हैं या अप्लाई रिजेक्ट कर सकते हैं।

कितना FOIR सही माना जाता है?

50% से कम: सेफ और अच्छा और अच्छा।

50–60%: जोखिम बढ़ता है।

60% से ज्यादा: लोन मिलने की संभावना कम।

कुछ NBFCs 60–65% तक फ्लेक्सिबिलिटी दिखाते हैं, लेकिन वहां ब्याज दर ज्यादा हो सकती है।

EMI ज्यादा होने पर क्यों मुश्किल हो जाता है लोन?

जितनी ज्यादा आपकी मौजूदा EMI होगी, उतनी ही कम आपकी नई लोन लेने की क्षमता होगी। बैंक चाहते हैं कि आप नया लोन आराम से चुका सकें और डिफॉल्ट का जोखिम कम रहे। अगर आपकी EMI पहले से 60,000 रुपये या उससे ज्यादा है, तो नया लोन मिलना काफी मुश्किल हो सकता है।

EMI के टाइप का पड़ता है असर

सिर्फ EMI की अमाउंट ही नहीं, बल्कि उसका टाइप भी मायने रखता है।

होम लोन: कम जोखिम (क्योंकि यह सिक्योर्ड लोन है)

पर्सनल लोन: ज्यादा जोखिम

क्रेडिट कार्ड बकाया: सबसे ज्यादा जोखिम

बैंक ऐसे ग्राहकों को ज्यादा पसंद करते हैं जिनका लोन बैलेंस और कंट्रोल में हो।

क्या EMI कम करने से लोन मिल सकता है?

हां, अगर आप अपनी EMI कम कर देते हैं, तो लोन मिलने की संभावना बढ़ सकती है। मान लीजिए, अगर आपकी सैलरी 1 लाख रुपये है। आपकी EMI 50,000 रुपये है। यानी FOIR = 50% होगा। अगर आप 5,000 रुपये की EMI वाला लोन बंद कर देते हैं, तो FOIR घटकर 45% हो जाएगा। इससे आपकी लोन लेने की क्षमता 4 से 7 लाख रुपये तक बढ़ सकती है। हालांकि, लोन बंद करने के बाद यह बदलाव आपके क्रेडिट रिकॉर्ड में दिखने में 30–45 दिन लग सकते हैं।

क्रेडिट स्कोर vs EMI—कौन ज्यादा जरूरी?

अच्छा Credit Score - 750 या उससे ज्यादा लोन मिलने में मदद करता है, लेकिन यह अकेला फैसला नहीं करता।

क्रेडिट स्कोर: बैंक का भरोसा बढ़ाता है।

EMI बोझ (FOIR): तय करता है कि कितना लोन मिलेगा।

यानी अच्छा स्कोर होने के बावजूद अगर आपकी EMI बहुत ज्यादा है, तो लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।

ये बातें जरूर रखें ध्यान

सभी EMI की सही जानकारी दें, कुछ भी छिपाएं नहीं।

अपनी कुल EMI 40% के आसपास रखने की कोशिश करें।

छोटे-छोटे लोन बंद करके EMI घटाएं।

खर्च और कर्ज के बीच बैलेंस बनाए रखें।

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