पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया पर्सनल लोन? जानिए कितना सही या गलत होता है ये फैसला

पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया पर्सनल लोन लेना कई बार राहत दे सकता है, लेकिन यह हर स्थिति में सही फैसला नहीं होता। जानिए कब यह फायदेमंद साबित हो सकता है और किन परिस्थितियों में यह आपकी आर्थिक परेशानी को और बढ़ा सकता है।

अपडेटेड May 10, 2026 पर 3:40 PM
Story continues below Advertisement
नया पर्सनल लोन लेने का मतलब यह नहीं कि आपका कर्ज खत्म हो गया।

कई बार कर्ज की किस्तें संभालना मुश्किल होने लगता है। ऐसे में कई लोग पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया पर्सनल लोन लेने के बारे में सोचते हैं। इससे कुछ समय के लिए राहत जरूर मिल सकती है।

कई बार लोग डिफॉल्ट से बच जाते हैं या अलग-अलग कर्ज को एक ही लोन में बदल लेते हैं। लेकिन अगर यह फैसला बिना सही प्लानिंग के लिया जाए, तो आगे चलकर परेशानी और बढ़ सकती है।

नया पर्सनल लोन क्यों लेते हैं


कई लोग क्रेडिट कार्ड का बकाया, EMI या महंगे शॉर्ट टर्म लोन चुकाने के लिए पर्सनल लोन लेते हैं। पर्सनल लोन आसानी से मिल जाता है और इसकी रकम का इस्तेमाल किसी भी काम में किया जा सकता है। इसी वजह से लोगों को लगता है कि यह कर्ज की परेशानी से निकलने का आसान तरीका है।

खत्म नहीं होता कर्ज

नया पर्सनल लोन लेने का मतलब यह नहीं कि आपका कर्ज खत्म हो गया। असल में पुराना कर्ज चुकाने के लिए एक नया कर्ज लिया जाता है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि अब पुरानी जगह की बजाय नई EMI भरनी पड़ती है।

कई बार नई EMI छोटी हो जाती है, जिससे हर महीने थोड़ी राहत महसूस होती है। लेकिन कुल मिलाकर कर्ज की जिम्मेदारी बनी रहती है। कई मामलों में उसकी अवधि भी बढ़ जाती है।

ब्याज और फीस का झटका

पर्सनल लोन लेते समय सिर्फ ब्याज ही नहीं देना पड़ता, बल्कि प्रोसेसिंग फीस और दूसरे चार्ज भी लगते हैं। अगर पुराने लोन को समय से पहले बंद किया जाता है, तो उस पर भी अलग चार्ज देना पड़ सकता है।

इसके अलावा अगर नया लोन लंबे समय तक चलता है, तो कुल ब्याज काफी बढ़ सकता है। ऐसे में कई बार व्यक्ति उतने से ज्यादा पैसे चुका देता है, जितना वह दूसरे तरीके अपनाकर बचा सकता था।

खर्च करने की आदत नहीं बदलती

सिर्फ नया लोन लेने से असली समस्या खत्म नहीं होती। अगर किसी व्यक्ति की आर्थिक परेशानी की वजह जरूरत से ज्यादा खर्च करना या बिना प्लानिंग के पैसे इस्तेमाल करना है, तो नया लोन लेने के बाद भी वह दोबारा कर्ज में फंस सकता है।

यानी अगर खर्च करने की आदत नहीं बदली, तो नया लोन सिर्फ कुछ समय की राहत देगा, स्थायी समाधान नहीं बनेगा।

बैंक से बात करना बेहतर विकल्प

बहुत से लोग सीधे नया लोन लेने पहुंच जाते हैं, जबकि पहले बैंक से रीस्ट्रक्चरिंग या EMI राहत की बात की जा सकती है। कई बार बैंक राहत भी दे देते हैं। जैसे कि..

  • EMI अवधि बढ़ा देते हैं
  • कुछ समय की राहत देते हैं
  • ब्याज दर कम कर देते हैं
  • सेटलमेंट या रीस्ट्रक्चरिंग का विकल्प देते हैं

यह तरीका कई बार नए कर्ज से ज्यादा सुरक्षित साबित होता है।

कब नया पर्सनल लोन लेना सही

कुछ मामलों में नया पर्सनल लोन लेना समझदारी भरा कदम भी हो सकता है। जैसे अगर पुराना कर्ज बहुत महंगा है और नया लोन कम ब्याज दर पर मिल रहा है, तो इससे कुल खर्च कम हो सकता है।

लेकिन इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति के पास साफ प्लान हो कि वह आगे अपने खर्च और ईएमआई कैसे संभालेगा। सिर्फ नया लोन लेकर पुरानी आदतें जारी रखना भविष्य में बड़ी समस्या बना सकता है।

असली राहत सही प्लानिंग में है

कुछ स्थितियों में एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा पर्सनल लोन लेना सही साबित हो सकता है। लेकिन यह तभी फायदेमंद होता है, जब व्यक्ति भविष्य में दोबारा कर्ज के जाल में न फंसने की तैयारी भी करे।

अगर खर्च पर कंट्रोल, सही बजट और समय पर भुगतान की आदत नहीं बनी, तो नया लोन भी पुरानी समस्या को सिर्फ आगे खिसकाने का काम करेगा।

New Labour Codes: आज से लागू हो गए सभी नए लेबर कोड्स, आप पर पड़ेगा क्या-क्या असर?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।