Silver Price: चांदी में तेजी के बाद बड़ा उतार-चढ़ाव, अब क्या हो निवेशकों की रणनीति; SAMCO के अपूर्व सेठ ने दिया जवाब

Silver Price: चांदी में तेज रैली के बाद भारी उतार चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। SAMCO के अपूर्व शेठ के मुताबिक यह सिर्फ शॉर्ट टर्म तेजी नहीं, बल्कि स्ट्रक्चरल बुल साइकिल हो सकती है। जानिए अब निवेशकों की सही स्ट्रैटेजी क्या हो।

अपडेटेड Feb 25, 2026 पर 3:05 PM
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SAMCO Securities के अपूर्व शेठ ने रिटेल निवेशकों को जल्दबाजी से बचने की सलाह दी है।

Silver Price: सैमको सिक्योरिटीज (SAMCO Securities) उन शुरुआती ब्रोकरेज में शामिल थी, जिसने चांदी में संभावित ब्रेकआउट की ओर इशारा किया था। कंपनी के हेड ऑफ मार्केट पर्सपेक्टिव्स एंड रिसर्च अपूर्व शेठ ने टेक्निकल कंप्रेशन, रिलेटिव अंडरवैल्यूएशन और मजबूत मैक्रो सपोर्ट को इसके पीछे की बड़ी वजह बताया।

CNBC-TV18 से बातचीत में शेठ ने कहा कि चांदी में उछाल तेज जरूर रही, लेकिन स्थिर नहीं। उनके मुताबिक, यह अब सिर्फ वैल्यूएशन पर आधारित ट्रेड नहीं रहा, बल्कि एक बड़े और लंबे स्ट्रक्चरल साइकिल की ओर बढ़ता दिख रहा है।

तीन अहम संकेत जिन्होंने बदली तस्वीर


शेठ के मुताबिक, जब उनकी टीम ने पहली बार चांदी में मौका देखा, तब तीन बातें साफ थीं। पहली थी टेक्निकल कंप्रेशन। चांदी कई महीनों तक 21 से 26 डॉलर प्रति औंस की रेंज में फंसी रही। लंबे समय के मूविंग एवरेज एक दूसरे के करीब आ रहे थे। इतिहास बताता है कि ऐसा सेटअप अक्सर बड़े मूव से पहले बनता है।

दूसरी वजह थी रिलेटिव अंडरवैल्यूएशन। चांदी अपने ऑल टाइम हाई से करीब 50 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रही थी। साथ ही सिल्वर टू गोल्ड रेशियो ऐतिहासिक निचले स्तर के पास था। यानी सोने के मुकाबले चांदी सस्ती थी।

तीसरा कारण था मैक्रो माहौल। अमेरिका में दर कटौती की उम्मीद, कमजोर डॉलर और सोलर व इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से बढ़ती इंडस्ट्रियल मांग ने चांदी के लिए अनुकूल स्थिति बनाई। शेठ ने इसे प्राइस कंप्रेशन और मैक्रो सपोर्ट का क्लासिक मेल बताया।

चांदी ने किया बुल मार्केट का सफर

शेठ के मुताबिक 2023 से अब तक चांदी की कहानी तीन चरणों में आगे बढ़ी। पहला चरण था अक्युमुलेशन यानी बड़े निवेशकों की चुपचाप खरीदारी। उस समय चांदी सस्ती थी, ज्यादा चर्चा में नहीं थी और टेक्निकली मजबूत स्थिति में थी।

दूसरा चरण तब शुरू हुआ जब घरेलू बाजार में कीमतें 78,000 रुपये प्रति किलो और बाद में 1 लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर निकलीं। इतिहास में ऐसे स्तरों के ऊपर ब्रेकआउट आगे मजबूत रिटर्न का संकेत देते रहे हैं।

अब तीसरा चरण चल रहा है, जिसे शेठ स्ट्रक्चरल बुल मार्केट मानते हैं। उनके मुताबिक यह सिर्फ एक ब्रेकआउट ट्रेड नहीं है। इंडस्ट्रियल मांग, सप्लाई की कमी और ETF में बढ़ते निवेश से यह मूव ज्यादा व्यापक हो गया है।

हालांकि तेजी सीधी नहीं रही। 30 जनवरी 2026 को चांदी एक ही दिन में 26 प्रतिशत से ज्यादा गिर गई थी। 1980 के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी गिरावट थी। शेठ का कहना है कि यह चांदी की स्वाभाविक अस्थिरता को दिखाता है।

वैल्यूएशन से लॉन्ग टर्म की कहानी

शुरुआत में यह कॉल वैल्यूएशन और साइक्लिकल थीम पर आधारित थी। अप्रैल 2024 में जब कॉमेक्स पर चांदी 21 से 26 डॉलर की रेंज में थी, तब शेठ की टीम ने 50 डॉलर प्रति औंस तक जाने की संभावना जताई थी।

अब शेठ इसे मल्टी ईयर बेस फॉर्मेशन वाला लंबी अवधि का स्ट्रक्चरल ट्रेंड मानते हैं, जिसे बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई साइड की तंगी का सहारा भी है। शेठ का साफतौर पर मानना है कि चांदी में यह सिर्फ शॉर्ट टर्म उछाल नहीं है।

रिटेल निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो

शेठ ने रिटेल निवेशकों को जल्दबाजी से बचने की सलाह दी है। उन्होंने तीन बातों पर जोर दिया - FOMO से दूर रहें, सट्टेबाजी के बजाय संतुलित एसेट एलोकेशन करें और डॉलर, रियल यील्ड व ETF फ्लो जैसे मैक्रो संकेतों पर नजर रखें।

उनका कहना है कि जब डॉलर कमजोर होता है और लिक्विडिटी बेहतर होती है, तब चांदी अच्छा प्रदर्शन करती है। पोर्टफोलियो में जोखिम क्षमता के अनुसार 5 से 15 प्रतिशत तक एक्सपोजर रखा जा सकता है।

शेठ के शब्दों में, यह मौका भागकर खरीदने का नहीं है, बल्कि अनुशासित तरीके से हिस्सा लेने का है। संभावना ऊपर की ओर हो सकती है, लेकिन बीच बीच में तेज उतार चढ़ाव के लिए तैयार रहना जरूरी है।

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