Silver Price Crash: सिल्वर में 46 साल की सबसे बड़ी गिरावट से इनवेस्टर्स क्या सबक ले सकते हैं?

मिरै एसेट शेयरखान के डेटा के मुताबिक, सोने और चांदी में आई दो सत्रों की गिरावट से निवेशकों को 5 लाख करोड़ डॉलर की चपत लगी है। गोल्ड के निवशकों को 3.5 लाख करोड़ डॉलर का झटका लगा है। सिल्वर के निवेशकों को 1.5 लाख करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है

अपडेटेड Feb 01, 2026 पर 8:05 PM
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29 जनवरी सोना चढ़कर 1,83,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था। चांदी 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई थी।

सिल्वर में 30 जनवरी और 1 फरवरी को जो हुआ, उसकी उम्मीद शायद ही किसी इनवेस्टर ने की होगी। 30 जनवरी को दुनियाभर में चांदी में 1980 के बाद सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। लेकिन, भारत में गिरावट का सिलसिला 1 फरवरी को भी जारी रहा। 1 तारीख को यूनियन बजट पेश होने की वजह से कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स खुला था। एमसीएक्स पर सिल्वर में 9 फीसदी की गिरावट आई।

सिल्वर के निवेशकों को कुल कितना नुकसान हुआ?

मिरै एसेट शेयरखान के डेटा के मुताबिक, सोने और चांदी में आई दो सत्रों की गिरावट से निवेशकों को 5 लाख करोड़ डॉलर की चपत लगी है। गोल्ड के निवशकों को 3.5 लाख करोड़ डॉलर का झटका लगा है। सिल्वर के निवेशकों को 1.5 लाख करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है। इससे निवेशकों में घबराहट है। अब तक शेयर बाजार में नुकसान की भरपाई सोने और चांदी में तेजी से हो रही थी। लेकिन, अब तो सोने और चांदी ने भी निवेशकों को बड़ा जख्म दे दिया है।


सिल्वर में गिरावट से किसे सबसे ज्यादा नुकसान?

निवेशकों को परेशानी इस बात से है कि 29 जनवरी को सोने और चांदी ने ऊंचाई के नए रिकॉर्ड बनाए थे। ज्यादातर इनवेस्टर्स मुनाफा बुक करने के बारे में सोच रहे थे, तभी अचानक दोनों मेटल की कीमतें जमीन पर आ गईं। खासकर चांदी में काफी ज्यादा गिरावट आई। जो इनवेस्टर्स चांदी की कीमतों के इतिहास के बारे में नहीं जानते, उन्हें इस गिरावट से हैरानी हुई है। 29 जनवरी सोना चढ़कर 1,83,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था। चांदी 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई थी।

निवेशकों को क्या सीखने की जरूरत है?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिस तरह की तेजी खासकर चांदी में दिखी थी, उसके बाद गिरावट आनी तय थी। लेकिन, निवेशकों को इतनी जल्द गिरावट आने का अंदेशा नहीं था। जिन निवेशकों ने अपने इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में बुलियन की हिस्सेदारी 5-10 फीसदी तक रखी है, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। जिन निवेशकों ने एसेट ऐलोकेशन का ध्यान नहीं रखा और सोने और चांदी में तेजी को देख ज्यादा निवेश किया, उन्हें काफी ज्यादा नुकसान हुआ है।

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क्या अभी चांदी को बेचकर लॉस से बचना चाहिए?

निवेशकों को हमेशा एसेट ऐलोकेशन का ध्यान रखने की जरूरत है। अगर किसी एसेट्स में लगातार तेजी आ रही है तो यह समझने की जरूरत है कि उसकी कीमत फंडामेंटल्स से आगे जा रही है। यह सावधान होने का वक्त होता है। जिन निवेशकों ने 1980 में चांदी में आई 90 फीसदी की गिरावट के बारे में नहीं जानते, उन्हें हालिया गिरावट ज्यादा लग सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिन निवेशकों ने जरूरत से ज्यादा सोने और चांदी में निवेश किया है, उन्हें थोड़ा धैर्य रखना पड़ेगा। आगे दोनों की कीमतों में रिकवरी दिख सकती है।

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