Silver Price: क्या शिखर पर पहुंच गई चांदी, निवेशकों को अब कर लेनी चाहिए मुनाफावसूली? जानिए एक्सपर्ट से

Silver Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 100 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई है। तेज रैली के बाद एक्सपर्ट्स मुनाफावसूली के संकेत दे रहे हैं। निवेश मांग, सप्लाई की तंगी और गोल्ड सपोर्ट के बीच आगे तेज उतार चढ़ाव का जोखिम बढ़ा है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Jan 25, 2026 पर 10:40 PM
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कुछ रणनीतिकारों का मानना है कि चांदी की मौजूदा कीमतें फंडामेंटल से काफी ऊपर चली गई हैं।

Silver Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमतें 100 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गईं। 2025 में शुरू हुई जबरदस्त तेजी 2026 में भी जारी है। मजबूत रिटेल खरीदारी, मोमेंटम आधारित निवेश और फिजिकल मार्केट में लंबे समय से बनी तंगी ने चांदी को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया है।

2026 की शुरुआत से अब तक चांदी करीब 40 प्रतिशत चढ़ चुकी है। इससे पहले 2025 में इसमें 147 प्रतिशत की ऐतिहासिक तेजी दर्ज हुई थी। LSEG के 1983 से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यह चांदी का अब तक का सबसे बड़ा सालाना उछाल रहा है।

सोने की रिकॉर्ड तेजी से भी मिला सपोर्ट


चांदी की रैली को सोने की मजबूती से भी बड़ा सहारा मिला है। शुक्रवार को सोना नया रिकॉर्ड बनाते हुए 4,988 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। बढ़ते भू राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग ने सोने को मजबूती दी, जिसका सीधा फायदा चांदी को भी मिला।

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निवेशकों की भीड़ और बढ़ते जोखिम

एनालिस्टों का कहना है कि चांदी फिलहाल सोने की तेजी के साथ चल रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि चांदी की यूनिट कीमत सोने के मुकाबले कम है, जिससे छोटे निवेशकों की भागीदारी ज्यादा देखने को मिल रही है।

हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स इस तेजी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। स्टोनएक्स की एनालिस्ट रोना ओ कॉनेल ने कहा कि चांदी इस समय खुद को आगे बढ़ाने वाली उन्मादी तेजी में है। उनका मानना है कि हर कोई इस रैली में शामिल होना चाहता है, लेकिन कीमतें चेतावनी के संकेत भी दे रही हैं। जैसे ही कमजोरी के संकेत दिखेंगे, गिरावट तेज हो सकती है।

गोल्ड टू सिल्वर रेशियो में ऐतिहासिक गिरावट

चांदी की तेज बढ़त का असर गोल्ड टू सिल्वर रेशियो पर भी साफ दिख रहा है। 14 साल में पहली बार यह रेशियो घटकर करीब 50 पर आ गया है। यानी अब एक औंस सोना खरीदने के लिए सिर्फ 50 औंस चांदी की जरूरत है। अप्रैल में यही आंकड़ा 105 औंस था।

ट्रेडर्स और एनालिस्ट इस रेशियो को वैल्यूएशन का अहम संकेत मानते हैं। इसमें आई तेज गिरावट यह बताती है कि सोने के मुकाबले चांदी की तेजी जरूरत से ज्यादा हो चुकी है।

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क्या फंडामेंटल से आगे निकल गई चांदी

कुछ रणनीतिकारों का मानना है कि चांदी की मौजूदा कीमतें फंडामेंटल से काफी ऊपर चली गई हैं। बैंक ऑफ अमेरिका के स्ट्रैटेजिस्ट माइकल विडमर के मुताबिक, फंडामेंटल आधार पर चांदी की सही कीमत करीब 60 डॉलर प्रति औंस होनी चाहिए।

उनका कहना है कि सोलर पैनल इंडस्ट्री से आने वाली मांग 2025 में अपने चरम पर पहुंच चुकी है। इसमें चांदी का बड़ा औद्योगिक इस्तेमाल है। वहीं रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के कारण कुल औद्योगिक मांग पर भी दबाव बन रहा है।

निवेश मांग और सप्लाई की तंगी ने बढ़ाया दबाव

चांदी की इस रैली के पीछे निवेश मांग की बड़ी भूमिका रही है। छोटे बार और सिक्कों के जरिए रिटेल निवेशकों की लगातार खरीदारी देखने को मिली है। इसके साथ ही अक्टूबर से फिजिकल बैक्ड सिल्वर ETF में भी मजबूत निवेश आया है।

लंदन सिल्वर मार्केट में सीमित लिक्विडिटी ने इस तेजी को और हवा दी। संभावित अमेरिकी टैरिफ को लेकर आशंकाओं के चलते बड़ी मात्रा में चांदी अमेरिका भेजी गई, जिससे वहां की सप्लाई और तंग हो गई।

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रीसाइक्लिंग बढ़ी, फिर भी इन्वेंटरी कमजोर

दुनिया की सालाना चांदी सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत यानी लगभग 1 अरब औंस रीसाइक्लिंग से आता है। कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद रीसाइक्लिंग जरूर बढ़ी है, लेकिन इन्वेंटरी अब भी जल्दी नहीं भर पाई है।

मेटल्स फोकस के मुताबिक, हाई ग्रेड रिफाइनिंग कैपेसिटी की कमी के चलते स्क्रैप सिल्वर को बाजार में वापस लाने की रफ्तार सीमित बनी हुई है।

लगातार 5 साल से डेफिसिट, 2026 में भी दबाव

चांदी के बाजार में पिछले 5 साल से लगातार स्ट्रक्चरल डेफिसिट बना हुआ है और 2026 में भी इसके जारी रहने की उम्मीद है। इससे आसानी से उपलब्ध चांदी की मात्रा और सीमित हो गई है।

मेटल्स फोकस के अनुमान के मुताबिक, सितंबर के अंत तक लंदन के कमर्शियल वॉल्ट में चांदी का स्टॉक घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 136 मिलियन औंस पर आ गया था। हालांकि 2025 के अंत तक यह बढ़कर करीब 200 मिलियन औंस हो गया, लेकिन यह अब भी 2021 की शुरुआत में रेडिट रैली के दौरान देखे गए 360 मिलियन औंस के स्तर से काफी कम है।

आगे कैसा रहेगा का चांदी का हाल

एनालिस्टों को उम्मीद है कि आने वाले समय में बाजार की तंगी कुछ हद तक कम हो सकती है। जनवरी के मध्य में अमेरिका द्वारा क्रिटिकल मेटल्स समीक्षा के बाद टैरिफ नहीं लगाने के फैसले से अमेरिकी बाजारों से आउटफ्लो बढ़ रहा है।

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COMEX इन्वेंटरी, जो 3 अक्टूबर को 532 मिलियन औंस के शिखर पर थी, अब घटकर करीब 418 मिलियन औंस रह गई है। यह मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है। करीब 11 अरब डॉलर की चांदी वेयरहाउस से बाहर निकली है।

अमेरिकी चुनाव से पहले के स्तर पर लौटने के लिए COMEX स्टॉक्स को अभी करीब 113 मिलियन औंस और घटाना होगा, जो वैश्विक सालाना चांदी सप्लाई का लगभग 11 प्रतिशत है।

मुनाफावसूली का खतरा बढ़ा

कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी तेज रैली के बाद करेक्शन करीब हो सकता है। जैसे जैसे फिजिकल मार्केट में राहत के संकेत मिलेंगे, निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं।

बीएनपी पारिबा के सीनियर कमोडिटीज स्ट्रैटेजिस्ट डेविड विल्सन के मुताबिक, नवंबर के अंत से चली आ रही निवेशक आधारित उन्मादी तेजी के बाद मुनाफावसूली जल्दी देखने को मिल सकती है।

भारत में चांदी की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर

अंतरराष्ट्रीय तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिख रहा है। भारत में चांदी इस समय रिकॉर्ड 3,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रही है।

कुल मिलाकर, चांदी का 100 डॉलर के पार जाना निवेश उत्साह, मजबूत मांग और सप्लाई की तंगी का नतीजा है। लेकिन जिस रफ्तार से यह तेजी आई है, उसने आगे तेज उतार चढ़ाव का जोखिम भी काफी बढ़ा दिया है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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