Silver Prices: चांदी की कीमतें 2.42 लाख रुपये प्रति किलो के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। पिछले एक हफ्ते में फ्यूचर्स मार्केट में चांदी की कीमतें 15% से भी ज्यादा बढ़ी है। इसकी पीछे मुख्य वजह मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड, अगले साल अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और सप्लाई में रुकावटों को लेकर बढ़ती चिंताएं रहीं।
कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी के भाव में लगातार पांचवें कारोबारी दिन तेजी जारी रही। मार्च 2026 डिलीवरी वाली चांदी फ्यूचर्स ने एक समय ₹18,210 या 8.14% की छलांग लगाकर ₹2,42,000 प्रति किलो का नया शिखर छुआ। हालांकि कारोबार के अंत में यह थोड़ा फिसलकर ₹2,39,787 प्रति किलो पर बंद हुआ।
सालाना रिटर्न 175% के करीब
ग्लोबल बाजारों में भी तेजी का यही रुख दिखा। कॉमेक्स पर चांदी पहली बार 79 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई। मार्च 2026 कॉन्ट्रैक्ट के भाव 11.2% उछलकर 79.70 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए, बाद में यग 77.19 डॉलर पर स्थिर हुआ।
इंडस्ट्रियल मांग ने बदली चांदी की कहानी
कमोडिटी मार्केट के एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी अब सिर्फ सोने जैसी कीमती धातु के रूप में नहीं देखी जा रही। मेहता इक्विटीज में कमोडिटी के वाइस प्रेसिडेंट राहुल कलंत्री के मुताबिक, हाई-परफॉर्मेंस टेक्नोलॉजी में चांदी की अहम भूमिका, सीमित उपलब्धता और इंडस्ट्रियल मांग इसके फंडामेंटल्स को नई दिशा दे रही है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स जैसे सेक्टरों में बढ़ते इस्तेमाल ने मांग को और मजबूती दी है।
ETF इनफ्लो और डॉलर की कमजोरी से मिला सपोर्ट
एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी को एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में लगातार इनफ्लो, मजबूत फिजिकल डिमांड और इक्विटी से कमोडिटीज की ओर पूंजी के रुख ने भी सहारा दिया है। साथ ही, अगले साल फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें डॉलर पर दबाव बना रही हैं, जिससे सोने-चांजी में निवेश आकर्षक बना हुआ है।
रिलायंस सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी का कहना है कि इंडस्ट्रियल मांग सप्लाई से आगे निकल सकती है। कमजोर डॉलर और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के बीच 2026 में कॉमेक्स पर चांदी 100 डॉलर प्रति औंस की ओर बढ़ सकती है।
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