चांदी में निवेश से पहले जान लें ये काला इतिहास, 50 साल में बस 3 बार आई बड़ी उछाल, शैतान की धातु है दूसरा नाम

Silver Price: चांदी के दाम रोज नया रिकॉर्ड बना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार 12 दिसंबर को चांदी की कीमतें 64.31 डॉलर प्रति औंस के नए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गईं। भारत में भी चांदी के दाम कई शहरों में 2 लाख रुपये किलो के स्तर को पार कर गए हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। साल 2025 की शुरुआत से अब तक चांदी का दाम 100 प्रतिशत तक उछल चुका है

अपडेटेड Dec 12, 2025 पर 9:37 PM
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Silver Price: मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है चांदी में इस बार की तेजी पहले के मामलों से अलग है

Silver Price: चांदी के दाम रोज नया रिकॉर्ड बना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार 12 दिसंबर को चांदी की कीमतें 64.31 डॉलर प्रति औंस के नए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गईं। भारत में भी चांदी के दाम कई शहरों में 2 लाख रुपये किलो के स्तर को पार कर गए हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। साल 2025 की शुरुआत से अब तक चांदी का दाम 100 प्रतिशत तक उछल चुका है। रिटर्न देने के मामले में इसने सोना और शेयर मार्केट दोनों का मात कर दिया है।

इसके चलते निवेशक इसकी ओर खीचें जा रहे हैं। लेकिन चांदी की इस चमकदार सतह के पीछे एक काला इतिहास भी छिपा है। बिना इस इतिहास को जाने चांदी में निवेश करना काफी जोखिम भरा साबित हो सकता है।

'शैतान की धातु' है दूसरा नाम

चांदी को निवेश की दुनिया में अक्सर “डेविल्स मेटल” यानी शैतान की धातु कहा जाता है। चांदी को यह नाम इसलिए मिला है क्योंकि जितनी तेज इसकी कीमतों में उछाल आती है, उतनी ही तेज यह उछाल गायब भी हो जाती है। यही वजह है कि चांदी कभी भी गोल्ड की तरह निवेशकों की पंसदीदा धातु नहीं बन पाई है।


आखिर चांदी की ऐसी बदनामी क्यों है? इसका जवाब छिपा है पिछले 50 साल के इतिहास में, जिसमें चांदी ने सिर्फ तीन बार ही बड़ी उछाल दिखाई है। जीं हां सिर्फ 3 बार। और हर बार निवेशकों को इस तेज उछाल के बाद लंबे समय के लिए घाटा सहना पड़ा है।

जनवरी 1980 में आई पहली उछाल

चांदी के इतिहास की सबसे कुख्यात कहानी 1980 में शुरू होती है, जब अमेरिका के दो अरबपति भाईयों- नेल्सन बंकर हंट और विलियम हंट ने पूरे बाजार पर कब्जा करने की कोशिश की। हंट ब्रदर्स ने देखते ही देखते हुए पूरी दुनिया की लगभग एक तिहाई चांदी हड़प ली। इसके चलते चांदी का दाम 6 डॉलर से बढ़कर 49 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

हंट भाइयों का मानना था कि बढ़ती महंगाई के चलते करेंसी की वैल्यू घटेगी और चांदी की बढ़ेगी। इसके चलते उन्होंने भारी मात्रा में चांदी खरीदनी शुरू की। उन्होंने बाजार से पैसे भी उधार लिए। यहां तक कि चांदी के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट को कोलैटरल के रूप में रखा और यहीं उनसे गलती हुई। हंट भाई इतनी बड़ी मात्रा में चांदी खरीद रहे थे और अमेरिकी नियमाकों को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने मार्जिन पर चांदी के नए फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट खरीदने पर रोक लगा दी।

इसके चलते हंट भाईयों का खेल खत्म हो गया। 27 मार्च 1980 को, हंट ब्रदर्स मार्जिन कॉल पूरा नहीं कर पाए, जिससे ब्रोकर ने चांदी बेचना शुरू कर दिया और कीमतें एक ही दिन में 50% से ज्यादा धराशायी हो गई। ये चांदी के इतिहास में किसी एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट है। चांदी का दाम घटने से हंट भाइयों को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ और उन्हें दिवालियापन का अर्जी भी डालनी पड़ी। हजारों की संख्या में निवेशक भी बर्बाद हुए। इसी घटना के बाद चांदी का नाम ‘शैतान की धातु’ पड़ा।

2011 में दूसरी बड़ी उछाल

हंट भाइयों के काले कारनामे के बाद चांदी में दूसरी बड़ी उछाल आने में 31 साल लग गए। साल 2011 में चांदी ने फिर अपनी खोई चकम पाई। इस बार वजह थी अमेरिका का कर्ज संकट। दुनिया अभी भी 2008 के वित्तीय संकट से उबर नहीं पाई थी। इसी बीच अमेरिका ने पहली बार माना कि वह भी कर्ज संकट से जूझ रहा है। इससे ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल छा गया। निवेशकों ने सुरक्षित ठिकानों की तलाश में सोना-चांदी की ओर रुख किया।

इससे चांदी में तेज उछाल आया और 2011 में एक बार चांदी के दाम 50 डॉलर प्रति औंस के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गए। लगभग 1980 के स्तर के बराबर। लेकिन यह तेजी लंबी नहीं चली। अमेरिका का कर्ज संकट जैसे ही खत्म हुआ, चांदी की कीमतें फिर से नीचे आ गईं। 6 महीनों में दाम 30% से ज्यादा गिर गए। और फिर अगले 14 सालों तक चांदी कभी उस स्तर के आस-पास भी नहीं पहुंची।

2025 में आई तीसरी बड़ी उछाल

चांदी के दाम में तीसरा बड़ा उछाल अब देखा जा रहा है। अक्टूबर से ही चांदी कीमतें हर कुछ समय पर अपना नया ऑलटाइम हाई बना रहा है। साल 2025 की शुरुआत से अब तक चांदी के दाम लगभग 100% बढ़ चुके हैं। इसके चलते इसमें निवेशकों की दिलचस्पी फिर से बढ़ रही है।

क्यों बढ़ रहे चांदी के दाम

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है चांदी में इस बार की तेजी पहले के मामलों से अलग है। 1980 में सट्टेबाजी और 2011 में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने के चलते चांदी के दाम ऊपर गए थे। लेकिन इस बार इंडस्ट्रियल मांग के चलते चांदी के दाम बढ़ रहे हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स तमाम इंडस्ट्री में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे इसकी कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।

इसके अलावा जियोपॉलिटिकल तनाव और डॉलर में कमजोरी से भी इसकी कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। इन कारणों ने चांदी को फिर से नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। लेकिन बड़ा सवाल यही है क्या यह तेजी टिकाऊ है? चांदी का इतिहास बताता है कि निवेशकों को इसमें सोच-समझकर निवेश करना चाहिए।

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