SIP से कितने समय में बनेगा ₹1 करोड़ का फंड, कितना करना होगा निवेश; समझिए पूरा कैलकुलेशन
SIP Calculator: क्या छोटी मासिक SIP से 1 करोड़ रुपये का फंड बन सकता है? जानिए 10, 15, 20 और 30 साल में 1 करोड़ बनाने के लिए हर महीने कितनी रकम निवेश करनी होगी और कंपाउंडिंग कैसे आपकी दौलत बढ़ाती है।
SIP में एक और तरीका है, जिसे स्टेप अप SIP कहा जाता है।
SIP Calculator: हर सामान्य निवेशक का करोड़पति बनना सपना होता है। लेकिन अक्सर यह सपना इतना दूर का लगता है कि लोग कोशिश करने से पहले ही मान लेते हैं कि यह उनके बस की बात नहीं है। कई लोगों को लगता है कि इसके लिए बहुत बड़ी आय या शेयर बाजार का गहरा ज्ञान चाहिए।
लेकिन, सच यह है कि अगर सही तरीके से और लगातार निवेश किया जाए, तो सामान्य कमाई वाला व्यक्ति भी लंबे समय में 1 करोड़ रुपये का फंड बना सकता है। म्यूचुअल फंड में SIP यानी Systematic Investment Plan इस काम का सबसे आसान और व्यावहारिक तरीका माना जाता है। इसमें धीरे धीरे निवेश होता है और समय के साथ कंपाउंडिंग अपना असर दिखाती है।
SIP असल में काम कैसे करती है
SIP का मतलब है कि आप हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में निवेश करते रहें। बाजार ऊपर हो या नीचे, निवेश चलता रहता है। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। इससे बाजार का सही समय पकड़ने का दबाव खत्म हो जाता है।
इस तरीके में एक और बड़ा फायदा होता है, जिसे rupee cost averaging कहा जाता है। जब बाजार गिरता है तो उसी रकम में ज्यादा यूनिट मिलती हैं और जब बाजार बढ़ता है तो कम यूनिट मिलती हैं। लंबे समय में इससे औसत खरीद कीमत संतुलित हो जाती है।
इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए आपने हर महीने 10000 रुपये निवेश किए। पहले महीने अगर NAV 50 रुपये है तो आपको 200 यूनिट मिलेंगे। अगले महीने बाजार गिरता है और NAV 40 रुपये हो जाता है तो आपको 250 यूनिट मिलेंगे।
तीसरे महीने अगर बाजार बढ़कर NAV 60 रुपये हो जाए तो आपको लगभग 167 यूनिट मिलेंगे। तीन महीने में आपने 30000 रुपये लगाए और कुल 617 यूनिट जमा हो गए। इस तरह आपकी औसत खरीद कीमत लगभग 48.6 रुपये बनती है, जो तीसरे महीने की कीमत से कम है।
1 करोड़ बनाने का असली गणित
1 करोड़ का फंड बनाने के पीछे कोई जादू नहीं है। यह सिर्फ समय और कंपाउंडिंग का खेल है। अगर सालाना औसत रिटर्न करीब 12 प्रतिशत मान लिया जाए, जो लंबी अवधि के इक्विटी म्यूचुअल फंड में संभव माना जाता है, तो जरूरी मासिक निवेश समय के अनुसार बदलता है।
अगर आपके पास 10 साल का समय है तो लगभग 45000 रुपये हर महीने निवेश करने होंगे।
अगर निवेश अवधि 15 साल हो जाए तो यह रकम लगभग 21000 रुपये रह जाती है।
20 साल की अवधि में करीब 11000 रुपये हर महीने पर्याप्त हो सकते हैं।
और अगर निवेश का समय 30 साल हो तो लगभग 3250 रुपये प्रति माह से भी 1 करोड़ रुपये का फंड बन सकता है।
यहीं कंपाउंडिंग की असली ताकत दिखाई देती है। जितना ज्यादा समय मिलता है, उतना कम मासिक निवेश करना पड़ता है।
निवेश में समय ज्यादा अहम है
हर निवेशक के सामने दो रास्ते होते हैं। पहला यह कि वह हर महीने ज्यादा पैसा लगाए। दूसरा यह कि वह ज्यादा समय तक निवेश जारी रखे। ज्यादातर लोगों के लिए दूसरा रास्ता ज्यादा व्यावहारिक होता है।
अगर कोई व्यक्ति जल्दी निवेश शुरू कर देता है तो छोटी रकम से भी बड़ा फंड बन सकता है। लेकिन अगर निवेश देर से शुरू किया जाए तो लक्ष्य तक पहुंचने के लिए ज्यादा पैसा लगाना पड़ता है। इसलिए निवेश की दुनिया में जल्दी शुरुआत करना सबसे बड़ा फायदा देता है।
स्टेप अप SIP क्या होती है
SIP में एक और तरीका है, जिसे स्टेप अप SIP कहा जाता है। इसमें हर साल अपनी SIP की रकम थोड़ी बढ़ा दी जाती है। आम तौर पर लोग इसे अपनी आय बढ़ने के साथ जोड़ते हैं।
मान लीजिए आपने 30000 रुपये की SIP शुरू की और हर साल इसे 10 प्रतिशत बढ़ाते रहे। तो वही लक्ष्य जो पहले 45000 रुपये की स्थिर SIP से पूरा होता, वह कम शुरुआती रकम से भी हासिल किया जा सकता है।
यह तरीका इसलिए प्रभावी होता है क्योंकि जैसे जैसे आपकी आय बढ़ती है, वैसे वैसे निवेश भी बढ़ता जाता है। बाद के वर्षों में जो बड़ी रकम निवेश होती है वह भी कंपाउंडिंग का फायदा लेने लगती है।
सही म्यूचुअल फंड चुनना क्यों जरूरी है
हर म्यूचुअल फंड एक जैसा नहीं होता। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड को आम तौर पर बेहतर माना जाता है क्योंकि इनमें महंगाई से ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता होती है।
लार्ज कैप फंड अपेक्षाकृत स्थिर होते हैं और जोखिम कम होता है। मिड कैप और स्मॉल कैप फंड तेजी से बढ़ सकते हैं लेकिन उनमें उतार चढ़ाव ज्यादा होता है। इसलिए कई निवेशक इनका संतुलित मिश्रण रखते हैं ताकि जोखिम और रिटर्न दोनों संतुलित रहें।
एसेट एलोकेशन भी जरूरी है
निवेश में केवल रिटर्न ही महत्वपूर्ण नहीं होता, स्थिरता भी उतनी ही जरूरी होती है। इसलिए पोर्टफोलियो में इक्विटी के साथ साथ डेट निवेश भी रखा जाता है।
एक सामान्य नियम है, '100 माइनस उम्र के साल'। इसका मतलब है कि 100 में से आपकी उम्र घटाने पर जो बचे, उतना प्रतिशत रकम इक्विटी में रखिए, बाकी डेट में। उदाहरण के लिए अगर आपकी उम्र 30 साल है तो लगभग 70 प्रतिशत निवेश इक्विटी में और 30 प्रतिशत डेट में रखा जा सकता है। जैसे जैसे आप अपने लक्ष्य के करीब पहुंचते हैं, वैसे वैसे डेट का हिस्सा बढ़ाना सुरक्षित माना जाता है।
बाजार की गिरावट में SIP बंद नहीं करनी चाहिए
बाजार हमेशा एक ही दिशा में नहीं चलता। कभी तेजी आती है, कभी गिरावट और कभी लंबे समय तक ठहराव भी रहता है। ऐसे समय में कई निवेशक घबरा कर SIP बंद कर देते हैं।
असल में गिरावट का समय ही SIP के लिए सबसे उपयोगी होता है क्योंकि उस समय कम कीमत पर ज्यादा यूनिट मिलती हैं। अगर निवेशक धैर्य रखते हैं तो बाजार की अगली तेजी का फायदा भी मिल सकता है।
Disclaimer:यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।