कई निवेशक शेयर बाजार में जारी गिरावट के मौके का फायदा उठाना चाहते हैं। वे सस्ते भाव पर मार्केट में निवेश करना चाहते हैं। सवाल है कि म्यूचुअल फंड की स्कीम में निवेश करने के लिए एकमुश्त और सिप में से कौन सा तरीका ज्यादा सही रहेगा?
कई निवेशक शेयर बाजार में जारी गिरावट के मौके का फायदा उठाना चाहते हैं। वे सस्ते भाव पर मार्केट में निवेश करना चाहते हैं। सवाल है कि म्यूचुअल फंड की स्कीम में निवेश करने के लिए एकमुश्त और सिप में से कौन सा तरीका ज्यादा सही रहेगा?
एकमुश्त और सिप से निवेश में फर्क
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार में गिरावट निवेश का अच्छा मौका है। लेकिन, कोई नहीं जानता कि यह गिरावट कब तक चलेगी। एकमुश्त निवेश और सिप से निवेश के बीच सबसे बड़ा फर्क यह है कि आप एकमुश्त निवेश में एक बार में पूरा पैसा निवश कर देते हैं। सिप से निवेश करने में आपका हर महीने एक निश्चित अमाउंट निवेश के लिए इस्तेमाल होता है। दोनों ही तरीकों में पैसा म्यूचुअल फंड्स की स्कीम के जरिए मार्केट में जाता है।
गिरावट वाले बाजार में सिप सही है
जब मार्केट में गिरावट जारी हो तो एकमुश्त निवेश में नुकसान हो सकता है। इसकी वजह यह है कि आपके निवेश करने के बाद अगर मार्केट गिरता रहता है तो आपके निवेश की वैल्यू कम होती जाएगी। फिर रिकवरी आने पर आपके लॉस की भरपाई होगी। इसमें समय लग सकता है। दूसरी तरफ अगर कोई निवेशक गिरावट वाले बाजार में सिप के जरिए निवेश करता है तो उसका रिस्क कम रहता है। इसकी वजह है कि उसकी पर्चेज प्राइस एवरेज रहती है।
ऐसे काम करता है सिप
इसे एक उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है। अगर आपने सिप के जरिए 5 मार्च को जब निवेश किया तब निफ्टी 24,600 पर था। अगले महीने की 5 तारीख को निफ्टी अगर गिरकर 24000 पर आ जाता है तो इसका मतलब है कि आपको मार्च के मुकाबले ज्यादा यूनिट्स एलॉट होंगे। लेकिन, अगर इसके उलट होता है यानी अगले महीने निफ्टी बढ़कर 25000 पहुंच जाता है तो आपको कम यूनिट्स एलॉट होंगे। इसका मतलब है कि गिरावट वाले बाजार में सिप से निवेश फायदेमंद है।
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दोनों के बीच के रास्ते का इस्तेमाल
कई इनवेस्टर्स एकमुश्त निवेश के लिए पैसे होने पर भी पूरा पैसा एक बार में निवेश नहीं करते हैं। वे कुछ पैसा एकमुश्त निवेश कर देते हैं बाकी पैसे को हर महीने थोड़ा-थोड़ा करके निवेस करते हैं। इससे उन्हें कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेश करता है तो वह दोनों में किसी एक तरीके का इस्तेमाल कर सकता है।
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