ELSS: टैक्स बचाने और बेहतर रिटर्न का स्मार्ट तरीका, ELSS म्यूचुअल फंड्स में करें निवेश

ELSS: ELSS म्यूचुअल फंड्स उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं जो टैक्स बचाने के साथ-साथ अपने पैसे को बढ़ाना चाहते हैं। कम लॉक-इन पीरियड, SIP का विकल्प और इक्विटी से जुड़ा बेहतर रिटर्न इसे आज के दौर में सबसे आकर्षक टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स में से एक बनाता है।

अपडेटेड Jan 09, 2026 पर 3:34 PM
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हर साल टैक्स बचाने की चिंता लाखों लोगों को परेशान करती है। लोग सोचते हैं कि आखिर कौन सा विकल्प चुना जाए जिससे टैक्स में राहत भी मिले और निवेश पर अच्छा रिटर्न भी। इसी दुविधा का समाधान है ELSS यानी इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम। यह म्यूचुअल फंड्स का ऐसा विकल्प है जो न सिर्फ टैक्स छूट देता है बल्कि लंबे समय में बेहतर रिटर्न भी दिला सकता है।

ELSS क्यों है खास?

ELSS म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने पर आपको आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है। इसका मतलब है कि आप सालाना ₹1.5 लाख तक की राशि पर टैक्स बचा सकते हैं। यह वही सीमा है जो पीपीएफ, जीवन बीमा प्रीमियम और अन्य टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स पर लागू होती है। लेकिन ELSS की खासियत यह है कि यह इक्विटी आधारित होता है, यानी शेयर बाजार से जुड़ा होता है, जिससे लंबे समय में रिटर्न की संभावना ज्यादा रहती है।

लॉक-इन पीरियड और लचीलापन


ELSS का लॉक-इन पीरियड सिर्फ 3 साल है, जबकि पीपीएफ में 15 साल और एनएससी में 5 साल तक पैसा फंसा रहता है। यानी अगर आपको जल्दी पैसे की जरूरत पड़े तो ELSS ज्यादा लचीला विकल्प साबित होता है। साथ ही, आप इसमें सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए हर महीने छोटी-छोटी रकम भी निवेश कर सकते हैं।

रिटर्न और जोखिम

चूंकि ELSS इक्विटी आधारित है, इसमें उतार-चढ़ाव रहता है। लेकिन लंबे समय में यह पारंपरिक टैक्स सेविंग विकल्पों से बेहतर रिटर्न देता है। उदाहरण के तौर पर, पिछले कई वर्षों में ELSS फंड्स ने औसतन 12-15% तक का रिटर्न दिया है, जबकि पीपीएफ का ब्याज दर 7-8% के आसपास ही रहा है।

निवेशकों के लिए सीख

कई युवा निवेशक अब ELSS को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि यह उन्हें टैक्स बचाने के साथ-साथ वेल्थ क्रिएशन का मौका देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप लंबे समय तक निवेशित रहते हैं तो बाजार की अस्थिरता का असर कम हो जाता है और रिटर्न स्थिर हो जाता है।

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