Property: 94 लाख में बेची प्रॉपर्टी, तब भी हुआ 21 लाख का नुकसान, होमबायर की एक गलती ने सेलर का अटका दिया पैसा

Property: Property: एक व्यक्ति ने 94 लाख रुपये में प्रॉपर्टी बेची, लेकिन खरीदार की एक गलती ने करीब 21 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा दिया। अगर आप प्रॉपर्टी बेच रहे हैं और सिर्फ इस भरोसे बैठे हैं कि खरीददार सब ठीक करेगा, तो सावधान हो जाइए

अपडेटेड Apr 13, 2026 पर 1:25 PM
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Property: एक व्यक्ति ने 94 लाख रुपये में प्रॉपर्टी बेची, लेकिन खरीदार की एक गलती ने करीब 21 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा दिया।

Property: एक व्यक्ति ने 94 लाख रुपये में प्रॉपर्टी बेची, लेकिन खरीदार की एक गलती ने करीब 21 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा दिया। अगर आप प्रॉपर्टी बेच रहे हैं और सिर्फ इस भरोसे बैठे हैं कि होम बायर सही तरीके से डॉक्यूमेंट और टैक्स से जुडे काम करेगा, तो सावधान हो जाइए। खरीदार की एक छोटी-सी गलती आपको लाखों रुपये के टैक्स क्रेडिट का नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां करीब 21 लाख रुपये का TDS फंस गया। सिर्फ इसलिए क्योंकि टैक्स गलत साल में जमा किया गया।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला एक NRI यानी नॉन-रेजिडेंट व्यक्ति से जुड़ा है, जिसने FY 2021-22 में अपनी प्रॉपर्टी बेची और उससे जुड़े लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) को सही तरीके से AY 2022-23 में अपनी ITR में दिखाया। प्रॉपर्टी सेल के दौरान खरीदार ने करीब 20.99 लाख रुपये TDS काटा भी।


लेकिन गलती यहां हुई खरीदार ने यह TDS सही साल में जमा नहीं किया। उसे FY 2021-22 में जमा करना था, लेकिन उसने FY 2022-23 में जमा किया। इससे यह TDS अगले साल यानी AY 2023-24 के Form 26AS में दिखने लगा।

जब बेचने वाले ने अपना ITR फाइल किया और 21.6 लाख रुपये का TDS क्रेडिट मांगा, तो इनकम टैक्स विभाग ने सिर्फ 60,872 रुपये का ही क्रेडिट दिया और बाकी रकम को यह कहकर खारिज कर दिया कि वह अगले साल में दिख रही है।

क्यों फंसा मामला?

टैक्स सिस्टम में आमतौर पर वही TDS क्रेडिट मिलता है, जो उसी साल के Form 26AS में दिखता है। यहां TDS अगले साल में दिख रहा था, जबकि इनकम पिछले साल की थी। इसी वजह से विभाग ने क्रेडिट देने से इनकार कर दिया। बेचने वाले ने पहले CIT(A) में अपील की, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला ITAT दिल्ली पहुंचा।

ITAT ने क्या कहा?

ITAT ने साफ कहा कि टैक्स का नियम इनकम के साल पर आधारित होता है, न कि TDS कब जमा हुआ। यानी अगर प्रॉपर्टी उस साल बिकी है, तो कैपिटल गेन उसी साल टैक्स होगा और TDS का क्रेडिट भी उसी साल मिलना चाहिए। ट्रिब्यूनल ने कहा कि खरीदार की गलती के कारण बेचने वाले को नुकसान नहीं होना चाहिए। कानून के मुताबिक (Section 199 और Rule 37BA), TDS का क्रेडिट उसी साल मिलेगा, जिस साल इनकम टैक्सेबल है।

Form 71 ने कैसे मदद की?

इस केस में सबसे अहम भूमिका Form 71 ने निभाई। यह एक खास फॉर्म है, जिसे तब भरा जाता है जब TDS किसी और साल में दिख रहा हो, लेकिन इनकम दूसरे साल की हो। बेचने वाले ने समय पर Form 71 फाइल किया था। ITAT ने कहा कि जब टैक्सपेयर ने सही साल में इनकम दिखा दी है और Form 71 भी जमा कर दिया है, तो अधिकारी को मैचिंग प्रिंसिपल के आधार पर सही साल में TDS क्रेडिट देना ही होगा। इसके बाद ITAT ने आदेश दिया कि पूरा 20.99 लाख रुपये का TDS क्रेडिट AY 2022-23 में दिया जाए।

क्यों अहम है यह फैसला?

यह फैसला उन लाखों लोगों के लिए राहत भरा है, जो प्रॉपर्टी बेचते समय TDS से जुड़ी दिक्कतों का सामना करते हैं। कई बार खरीदार की गलती से TDS गलत साल में जमा हो जाता है, जिससे बेचने वाले का पैसा फंस जाता है।

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