Sovereign Gold Bonds: सेकंडरी मार्केट में कैसे खरीदें सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड? एक्सपर्ट से जानिए फायदे और नुकसान
Sovereign Gold Bonds: सरकार ने अब सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की नई सीरीज जारी करना बंद कर दिया है। लेकिन, निवेशक अब भी सेकंडरी मार्केट से इसे खरीद सकते हैं। एक्सपर्ट से जानिए कि सेकंडरी मार्केट से SGB खरीदना फायदे का सौदा है या नहीं।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB सोने में निवेश करने का सरकार का सुरक्षित और आसान तरीका था।
Sovereign Gold Bonds: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) शुरुआत से ही निवेशकों के लिए बेहतरीन रिटर्न देने वाला विकल्प रहा है। इसमें लंबी अवधि का टैक्स-फ्री कैपिटल गेन और 2.5% का सालाना ब्याज मिलता था। लेकिन, सरकार ने बढ़ते राजकोषीय खर्च की वजह से इसे फरवरी 2024 में बंद कर दिया। स्कीम बंद होने के बाद अब निवेशकों का रुख सेकंडरी मार्केट की ओर बढ़ रहा है।
सेकंडरी मार्केट से SGB कैसे खरीदें?
निवेशक SGB को किसी भी Zerodha, Groww या Upstox जैसे ट्रेडिंग ऐप से उसी तरह खरीद सकते हैं, जिस तरह से कोई शेयर खरीदा जाता है। ऐप में सर्च बार में 'SGB' टाइप करें, फिर सही सीरीज और उसकी मैच्योरिटी देख लें। इसके बाद मार्केट प्राइस और ट्रेडिंग वॉल्यूम जरूर चेक करें, क्योंकि कई सीरीज में लिक्विडिटी बहुत कम होती है।
कीमतें बोली-भाव (bid–ask spread) की वजह से अचानक बदल सकती हैं, इसलिए लिमिट ऑर्डर लगाना ज्यादा सुरक्षित रहता है। यूनिट डिमैट अकाउंट में क्रेडिट होने के बाद 2.5% सालाना ब्याज सीधे आपके बैंक अकाउंट में आ जाता है।
और अगर आप बॉन्ड को मैच्योरिटी तक होल्ड रखते हैं, तो आपका कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। भले ही आपने SGB सेकंडरी मार्केट से खरीदा हो।
सेकंडरी मार्केट से SGB खरीदना फायदेमंद है?
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स के अमर रानू का कहना है कि सेकंडरी मार्केट से SGB तभी लेना समझदारी है जब वह कम प्रीमियम पर मिल रहा हो। अगर प्रीमियम बहुत ज्यादा है, तो गोल्ड ETF के मुकाबले आपकी संभावित बढ़त काफी घट जाती है।
SGB या Gold ETF कौन है बेहतर विकल्प?
रानू के मुताबिक, गोल्ड ETF ट्रेडिंग के लिहाज से आसान होते हैं और इनकी छिपी लागत (implicit costs) भी कम होती है। वह कहते हैं, 'अगर निवेशक लंबे समय के लिए रखना चाहता है और मैच्योरिटी तक होल्ड कर सकता है, तो SGB बेहतर हो सकता है। लेकिन तभी जब प्रीमियम बहुत ज्यादा न हो।'
मास्टर कैपिटल सर्विसेज के रवि सिंह का भी मानना है कि SGB लंबे समय वालों के लिए अच्छा विकल्प है क्योंकि गोल्ड की कीमत के साथ-साथ तय 2.5% ब्याज भी मिलता है। हालांकि SGB की लिक्विडिटी हमेशा आसान नहीं होती, इसलिए तुरंत बेच पाना मुश्किल हो सकता है। ETF में यह समस्या नहीं होती, वे ज्यादा लचीले होते हैं और आसानी से ट्रेड हो जाते हैं।
सेकंडरी मार्केट से खरीदे SGB पर टैक्स नियम
टैक्स में सबसे बड़ा फर्क यह है कि सिर्फ मैच्योरिटी पर RBI को रिडेम्पशन कराने पर ही कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। अगर आपने SGB एक्सचेंज पर बेच दिया, तो सामान्य कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। जैसे कि गोल्ड ETF पर लगता है।
रानू बताते हैं कि SGB या कोई भी गोल्ड निवेश 24 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर लांग-टर्म माना जाता है। 23 जुलाई 2024 के बाद लांग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स 12.5% (बिना इंडेक्सेशन) लगता है। 24 महीने या उससे कम अवधि में बेचने पर शॉर्ट-टर्म गेन आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है। सिर्फ मैच्योरिटी पर RBI को रिडेम्पशन कराने पर ही पूरा टैक्स छूट मिलती है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड क्या होता है
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB सोने में निवेश करने का सरकार का सुरक्षित और आसान तरीका था। इसमें सोने की कीमत बढ़ने का पूरा फायदा मिलता था और साथ में 2.5% सालाना ब्याज भी मिलता था। यह बॉन्ड डीमैट अकाउंट में होता है, इसलिए चोरी, मिलावट या स्टोरेज जैसी दिक्कतें नहीं रहतीं।
फरवरी 2024 में सरकार ने नई सीरीज जारी करना बंद कर दिया। लेकिन लोग अब भी इसे सेकंडरी मार्केट से खरीद रहे हैं। कई बार ये बॉन्ड डिस्काउंट पर भी मिल जाते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर आप इसे मैच्योरिटी तक होल्ड करते हैं, तो कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं लगता। यह इसे अन्य गोल्ड विकल्पों से ज्यादा फायदेमंद बनाता है।
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