आरबीआई ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (एसजीबी) की दो किस्तों के मैच्योरिटी से पहले रिडेम्प्शन के प्राइस का ऐलान कर दिया है। इन किस्तों के इनवेस्टर्स 11 अगस्त, 2025 या इसके बाद अपने गोल्ड बॉन्ड्स को भुना सकते हैं। केंद्रीय बैंक ने 2019-20 सीरीज IX और 2020-21 सीरीज V के रिडेम्प्शन के लिए प्रति ग्राम 10,070 रुपये का प्राइस तय किया है।
पांच साल में शानदार रिटर्न
SGB की 2019-20 सीरीज IX किस्त फरवरी 2020 में आई थी। इस किस्त का CAGR रिटर्न बीते पांच साल में 20 फीसदी रहा है। 2020-21 सीरीज V किस्त अगस्त 2020 में आई थी। इस किस्त का CAGR रिटर्न बीते पांच साल में 13.5 फीसदी रहा है। इस रिटर्न में इश्यू प्राइस पर अतिरिक्त 2.5 फीसदी का इंटरेस्ट शामिल नहीं है। एसजीबी पर अतिरिक्त 2.5 फीसदी रिटर्न मिलता है, जिसका पेमेंट हर छह महीने पर होता है। इससे एसजीबी पर मिलने वाला कुल रिटर्न बढ़ जाता है।
सोने में उछाल का मिला फायदा
इन दोनों किस्तों के अच्छे रिटर्न की बड़ी वजह पिछले कुछ सालों में सोने की कीमतों में आया उछाल है। फरवरी, 2020 में सोने की कीमत 4,070 रुपये प्रति ग्राम थी। इसके बाद कोविड शुरू होने पर स्टॉक मार्केट में बड़ी गिरावट आई। लोगों ने सुरक्षित निवेश के लिए सोना खरीदना शुरू किया। अगस्त 2020 में 2020-21 सीरीज V किस्त जब आई तब सोने की कीमत बढ़कर 5,334 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई थी। तब से सोने की कीमतों में तेजी जारी है।
फरवरी 2024 के बाद नहीं आई नई किस्त
हाई इनफ्लेशन, जियोपॉलिटिकल टेंशन और दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंकों के लगातार सोना खरीदने की वजह से बीते 5 सालों में सोने की कीमतें काफी चढ़ा हैं। इसका असर SGB पर भी पड़ा है। सरकार ने पिछले साल फरवरी के बाद से एसजीबी की नई किस्त जारी नहीं की है। सोने की कीमतों में उछाल से सरकार के लिए एसजीबी फायदेमंद नहीं रह गया है।
क्या आपको गोल्ड बॉन्ड भुनाना चाहिए?
सवाल है कि क्या 2019-20 सीरीज IX और 2020-21 सीरीज V के निवेशकों को अपने गोल्ड बॉन्ड भुनाने चाहिए? एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करना पड़ता है कि आपको अभी पैसे की जरूरत है या नहीं। अगर किसी इनवेस्टर को अभी पैसे की जरूरत नहीं है तो वह एसजीबी में अपना निवेश बनाए रख सकता है। इसकी वजह यह है कि सोने में तेजी का ट्रेंड है। आने वाले समय में सोने की कीमतों में तेजी जारी रहने के आसार हैं।
एसजीबी के कैपिटल गेंस पर टैक्स के नियम
टैक्स के नियम की वजह से एसजीबी काफी अट्रैक्टिव हो जाता है। अगर एसजीबी को मैच्योरिटी तक रखा जाता है तो कैपिटल गेंस पूरी तरह से टैक्स-फ्री हो जाता है। हालांकि, मैच्योरिटी से पहले रिडेम्प्शन पर भी कैपिटल गेंस पर टैक्स नहीं लगता है। लेकिन, साल में दो बार इंटरेस्ट के रूप में होने वाली इनकम टैक्स के दायरे में आती है। इस पर इनवेस्टर के स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। सेकेंडरी मार्केट में एसजीबी को बेचने पर कैपिटल गेंस टैक्स के दायरे में आता है। इस पर सरचार्ज और सेस भी लगता है।