सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) के टैक्स के नियम बदल गए हैं। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को यूनियन बजट में इस बारे में ऐलान किया। एसजीबी के निवेशकों को टैक्स के नियमों के बारे में जानना जरूरी है। एसजीबी के टैक्स के नए नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे।
निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को क्या कहा?
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को Sovereign Gold Bonds (SGBs) पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स से छूट के लिए शर्तें तय कर दीं। उन्होंने कहा के एसजीबी के निवेशकों को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स से तभी छूट मिलेगी, जब उन्होंने आरबीआई के एसजीबी इश्यू में निवेश किया होगा। इसका मतलब है कि अगर एसजीबी में निवेश स्टॉक एक्सचेंज के जरिए किया गया है तो मैच्योरिटी पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स चुकाना होगा।
SGB पर अब तक टैक्स का नियम क्या था?
एसजीबी की शुरुआत नवंबर 2015 में हुई थी। सरकार ने निवेशकों को फिजिकल गोल्ड यानी गोल्ड ज्वेलरी, कॉइन और बार का विकल्प देने के लिए एसजीबी की शुरुआत की थी। इसमें निवेशकों को अच्छी दिलचस्पी दिखाई थी। एसजीबी में निवेश 8 साल में मैच्योर हो जाता है। साथ ही सरकार निवेश पर सालाना 2.5 फीसदी इंटरेस्ट देती है। मैच्योरिटी अमाउंट पर इनवेस्टर को किसी तरह का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस नहीं चुकाना पड़ता है। हालांकि, इंटरेस्ट इनकम टैक्स के दायरे में आता है।
SGB की अंतिम किस्त कब आई थी?
सरकार ने फरवरी 2024 के बाद से एसजीबी की नई किस्त जारी नहीं की है। इस वजह से निवेशकों के पास इसमें सिर्फ स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए निवेश करने का विकल्प है। लेकिन, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के 1 फरवरी के ऐलान से एसीजीबी के निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। जिन लोगों ने स्टॉक एक्सचेंज के जरिए एसजीबी में निवेश किया है, उन्हें मैच्योरिटी अमाउंट पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस चुकाना पड़ेगा। इससे उनका रिटर्न घट जाएगा।
एसजीबी के इनवेस्टर्स पर नए नियम का क्या असर पड़ेगा?
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर 12.5 फीसदी रेट से टैक्स लगता है। इसका मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति को स्टॉक एक्सचेंज से खरीदे गए एसजीबी पर 20 लाख रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस होता है तो उसे 12.5 फीसदी टैक्स रेट से 2.60 लाख रुपये टैक्स चुकाना पड़ेगा। पुराने नियम के हिसाब से उसे यह टैक्स नहीं चुकाना पड़ता। स्टॉक मार्केट्स से खरीदे गए एसजीबी को अगर 1 साल से पहले बेचा जाता है तो उस पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना पड़ता है। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्सपेयर के स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।