क्या शेयरों से अच्छी कमाई के आपके प्लान पर मार्केट में आई गिरावट ने पानी फेर दिया है? क्या आप सोने और चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट से आप निराश हैं? अगर हां तो आपके लिए अच्छी खबर है। आप ज्यादा यील्ड वाले बॉन्ड्स में निवेश कर सालाना 14 फीसदी तक रिटर्न कमा सकते हैं। इनवेस्टर्स बॉन्ड्स में निवेश का फैसला अपनी उम्र और रिस्क बर्दाश्त करने की क्षमता को ध्यान में रख ले सकता है।
बीबीबी रेटिंग वाले बॉन्ड्स का मतलब क्या है?
'BBB' रेटिंग वाले बॉन्ड्स में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमाया जा सकता है। हालांकि, ऐसे बॉन्ड्स में निवेश करने में रिस्क होता है। लेकिन, एफएंड मार्केट के मुकाबले यह रिस्क ज्यादा नहीं है, जहां हर 10 निवेशकों में से 9 को नुकसान होता है। बीबीबी रेटिंग वाले बॉन्ड्स के ज्यादा विकल्प मार्केट में उपलब्ध नहीं हैं। इंडिया में 98 फीसदी कॉर्पोरेट बॉन्ड्स की रेटिंग 'AA' या इससे बेहतर होती है। यह जानकारी नीति आयोग की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट पर आधारित है।
क्या कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में निवेश करने में रिस्क है?
ऑनलाइन बॉन्ड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जिराफ के 5 फरवरी तक के डेटा के मुताबिक, 'BBB' रेटिंग वाले बॉन्ड्स के कम से कम 38 ऑप्शंस हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मानकों के हिसाब से 'बीबीबी' रेटिंग वाले बॉन्ड्स सबसे कम रेटिंग वाले बॉन्ड्स होते हैं। बीबीबी से नीचे की रेटिंग को निवेश योग्य नहीं माना जाता है। FY15 से FY25 के डेटा की स्टडी के बाद क्रिसिल ने बताया है कि पहले साल में ऐसे बॉन्ड्स में से आधा फीसदी से कम बॉन्ड्स ने डिफॉल्ट किया। दूसरे साल में 1.27 बॉन्ड्स ने डिफॉल्ट किया और तीसरे साल में 2.21 फीसदी ने डिफॉल्ट किया।
कंपनियां बॉन्ड्स क्यों इश्यू करती हैं?
इस अवधि (FY15 से FY25) में 'बीबीबी' रेटिंग वाले हर 10 बॉन्ड्स में से 2 से कम को डाउनग्रेड किया गया। किसी बॉन्ड की क्रेडिट रेटिंग बहुत मायने रखती है, क्योंकि इसका असर बॉन्ड के प्राइस पर पड़ता है। बॉन्ड्स के जरिए कंपनियां अपने बिजनेस से जुड़ी जरूरतें पूरी करने के लिए पैसे जुटाती हैं। यह एक तरह का कर्ज होता है। इस पैसे पर कंपनी बॉन्डहोल्डर्स को पहले से तय रेट के हिसाब से सालाना इंटरेस्ट का पेमेंट करती हैं। बॉन्ड्स की अवधि पूरी होने पर निवेशक को पैसा लौटा दिया जाता है।
बॉन्ड्स से मिले इंटरेस्ट पर क्या टैक्स लगता है?
अगर इनवेस्टर बॉन्ड में मैच्योरिटी तक निवेश बनाए रखता है तो उससे मिले इंटरेस्ट पर रेगुलर इनकम के हिसाब से टैक्स लगता है। इंटरेस्ट इकनम को 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्स' माना जाता है। इसका मतलब है कि अगर कोई रिटेल इनवेस्टर 30 फीसदी इनकम टैक्स ब्रैकेट में आता है तो 14 फीसदी इंटरेस्ट रेट वाले बॉन्ड का असर रिटर्न घटकर 10 फीसदी से कम रह जाएगा।
बॉन्ड्स से मिले इंटरेस्ट पर टैक्स के रेट्स क्या हैं?
बॉन्ड्स से इंटरेस्ट इनकम सालाना 5,000 रुपये से ज्यादा होने पर बॉन्ड इश्यू करने वाली कंपनी 10 फीसदी के रेट से टीडीएस काट लेगी। इनवेस्टर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त इस क्रेडिट को क्लेम कर सकता है। अगर बॉन्ड को सेकेंडरी मार्केट से खरीदा या बेचा जाता है तो टैक्स के दूसरे नियम लागू होते हैं। अगर इनवेस्टर बॉन्ड्स एक साल के अंदर बेच देता है और 50,000 रुपये का प्रॉफिट होता है तो उसका टैक्स स्लैब 30 फीसदी मानने पर उसे 31.2 फीसदी रेट से टैक्स चुकाना होगा। 12 महीने के बाद बेचने पर मुनाफे पर टैक्स का रेट 12.5 फीसदी होगा।