क्या आपका विदेश में पढ़ाई का प्लान है? क्या आपको यह नहीं पता कि इसमें कुल कितना खर्च आएगा? अगर हां तो पहले इन दोनों सवालों के जवाब जानना बहुत जरूरी है। आप कह सकते हैं कि यह फॉरेन एजुकेशन की दिशा में पहला कदम है। दरअसल, विदेश में पढ़ाई पर कॉलेज या यूनिवर्सिटी की ट्यूशन फीस के अलावा कई दूसरे खर्च भी होते हैं। अगर कोई व्यक्ति अपने बच्चों के लिए विदेश में पढ़ाई की सिर्फ ट्यूशन फीस के बारे में सोच रहा है तो बाद में उसको तब बड़ा झटका लग सकता है जब उसे दूसरे खर्चों के बारे में बता चलेगा।
कुल खर्चों को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है
विदेश में पढ़ाई (Study Abroad) पर आने वाले खर्चों को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। पहले हिस्से में विदेश जाने से पहले के खर्च आते हैं। दूसरे हिस्से में विदेश जाने के बाद के खर्च आते हैं। इससे कुल खर्च का अंदाजा लगाना आसान हो जाता है। हालांकि, इसके लिए आपको थोड़ा कैलकुलेशन करना होगा। लेकिन, जब बात लाखों रुपये की हो तो थोड़ा कैलकुलेशन करने में क्या हर्ज है।
अप्लिकेशन फीस के साथ खर्च की शुरुआत हो जाती है
हम पहले पढ़ाई से जुड़े खर्च की बात करते हैं। इसमें पहला खर्च है कॉलेज की अप्लिकेशन फीस। यह प्रति यूनिवर्सिटी औसतन 150 डॉलर है। हालांकि, कोर्स के हिसाब से इसमें थोड़ा फर्क हो सकता है। अगर आपने 5 यूनिवर्सिटी में अप्लाई करने का प्लान बनाया है तो आपको करीब 750 डॉलर खर्च करने होंगे। रुपये में यह करीब 64,000 रुपये आएगा। स्टूडेंट का सेलेक्शन एडमिशन के लिए होने के बाद ट्यूशन फीस की बात आती है। ट्यूशन फीस अलग-अलग कॉलेज की अलग-अलग हो सकती है। यह 15,000 लाख रुपये से लेकर 45,000 लाख रुपये तक हो सकती है।
हेल्थ पॉलिसी खरीदने पर आता है बड़ा खर्चा
विदेश में पढ़ाई के लिए स्टूडेंट का हेल्थ इंश्योरेंस जरूरी है। इसे स्टूडेंट विदेश जाने से पहले या विदेश में अपनी यूनिवर्सिटी के जरिए खरीद सकता है। इंडिया में हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने पर 20,000 से 50,000 रुपये का सालाना खर्च आता है। यूनिवर्सिटी के जरिए हेल्थ पॉलिसी खरीदने पर सालाना 50,000 से 1 लाख रुपये के बीच खर्च करना पड़ता है।
अमेरिका में रहने का एक महीने का खर्च 2.14 लाख रुपये तक हो सकता है
अब पढ़ाई के दौरान रहने, खानेपीने और दूसरे खर्चों की बात करते हैं। इसमें रेंट, ग्रॉसरी, ट्रांसपोर्टेशन, फोन के बिल और सेमेस्टर खत्म होने के बाद घर आने और वापस पढ़ाई के लिए विदेश जाने का खर्च शामिल है। पढ़ाई के लिए विदेश में रहने का खर्च देश के हिसाब से अलग-अलग होता है। अमेरिका के छोटे शहर में एक महीने में रहने का खर्च करीब 700 डॉलर यानी 60,000 रुपये है, जबकि न्यूयॉर्क में यह 2,500 डॉलर यानी 2.14 लाख रुपये हर महीने है।
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रुपये में कमजोरी से बढ़ जाता कुल खर्च
आखिर में हम डॉलर और रुपये के एक्सचेंज रेट की बात करते हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर पड़ने पर विदेश में पढ़ाई का खर्च बढ़ जाता है। इसकी वजह है कि विदेश में होने वाला खर्च उस देश की करेंसी में होती है। इसे एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। मान लीजिए कोई स्टूडेंट अमेरिका में पढ़ाई करना चाहता है। वहां डॉलर में तो उसकी ट्यूशन फीस फिक्सड होगी। लेकिन, डॉलर के मुकाबले रुपया का कमजोर पढ़ने पर आपको फीस चुकाने के लिए उतने ही डॉलर के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे।