सुकन्या समृद्धि योजना में 5 तारीख के बाद पैसा जमा करना पड़ सकता है महंगा, मैच्योरिटी पर कम हो जाएगा रिटर्न

सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करने वालों के लिए एक छोटी सी गलती बड़ा नुकसान कर सकती है। अगर आप हर महीने 5 तारीख के बाद सुकन्या समृद्धि के खाते में पैसा जमा करते हैं, तो उस महीने का ब्याज नहीं मिलेगा

अपडेटेड Jun 09, 2026 पर 3:01 PM
सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करने वालों के लिए एक छोटी सी गलती बड़ा नुकसान कर सकती है।

सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करने वालों के लिए एक छोटी सी गलती बड़ा नुकसान कर सकती है। अगर आप हर महीने 5 तारीख के बाद सुकन्या समृद्धि के खाते में पैसा जमा करते हैं, तो उस महीने का ब्याज नहीं मिलेगा। पहली नजर में नुकसान मामूली लग सकता है, लेकिन लंबे समय में कंपाउंडिंग पर इसका असर पड़ता है और आपकी बेटी के लिए बनने वाला फंड अपेक्षा से कम हो सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है महीने की 5 तारीख?

सुकन्या समृद्धि योजना के नियमों के अनुसार, किसी भी महीने में ब्याज की कैलकुलेशन उस पीरियड के दौरान खाते में मौजूद न्यूनतम बैलेंस के आधार पर की जाती है, जो महीने की 5 तारीख के बाद से लेकर महीने के अंतिम दिन तक रहता है।


इसका मतलब है कि यदि निवेशक 5 तारीख या उससे पहले पैसा जमा कर देता है, तो उस अमाउंट पर उसी महीने से ब्याज मिलना शुरू हो जाता है। लेकिन यदि पैसा 6 तारीख या उसके बाद जमा किया जाता है, तो उस रकम पर ब्याज अगले महीने से मिलेगा।

हालांकि एक महीने का छूटा हुआ ब्याज बहुत छोटा लग सकता है, लेकिन लंबे समय में इसका असर काफी बड़ा हो सकता है क्योंकि एसएसवाई में कंपाउंडिंग का लाभ मिलता है।

कितना हो सकता है नुकसान?

मान लीजिए कोई अभिभावक हर महीने 12,500 रुपये एसएसवाई खाते में जमा करता है। योजना पर 8.2 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है। यदि हर महीने जमा अमाउंट 5 तारीख के बाद खाते में पहुंचती है, तो निवेशक को उस महीने लगभग 85 रुपये के ब्याज का नुकसान हो सकता है।

पहली नजर में यह रकम बहुत कम लग सकता है, लेकिन यही ब्याज आगे चलकर भी ब्याज कमाता। इसलिए केवल उस महीने का ही नहीं, बल्कि भविष्य में मिलने वाले अतिरिक्त रिटर्न का भी नुकसान होता है। 15 साल के निवेश पीरियड और 21 साल की कुल योजना पीरियड में यह अंतर काफी बढ़ सकता है और मैच्योरिटी पर मिलने वाले फंड पर असर डाल सकता है।

क्या है सुकन्या समृद्धि योजना?

सुकन्या समृद्धि योजना एक सरकार की चलाई जा रही छोटी सेविंग स्कीम योजना है। इसे बेटी के भविष्य के लिए सेविंग को बढ़ावा देने के मकसद से शुरू किया गया है।

सुकन्या समृद्धि योजना

10 साल से कम उम्र की बच्ची के नाम पर खाता खोला जा सकता है।

माता-पिता या कानूनी अभिभावक खाता खोल सकते हैं और उसको चला सकते हैं।

न्यूनतम सालाना निवेश 250 रुपये है।

अधिकतम सालाना निवेश 1.5 लाख रुपये तक किया जा सकता है।

वर्तमान ब्याज दर 8.2 प्रतिशत सालाना है।

खाता खुलने की तारीख से 15 साल तक निवेश किया जा सकता है।

खाता 21 साल बाद मैच्योर होता है।

टैक्स में भी मिलता है फायदा

सुकन्या समृद्धि योजना को टैक्स के लिहाज से भी सबसे बेहतर निवेश विकल्पों में गिना जाता है। यह योजना ईईई (Exempt-Exempt-Exempt) केटेगरी में आती है। यानी जमा की गए अमाउंट पर आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत टैक्स छूट मिलती है। साथ ही खाते में मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री होता है। मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी अमाउंट भी टैक्स मुक्त रहती है। यही कारण है कि लंबे समय की बचत के लिए इसे सबसे सुरक्षित और लाभदायक योजनाओं में शामिल किया जाता है।

एसएसवाई का सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग है। खाते में मिलने वाला ब्याज वापस निवेश हो जाता है और उस पर भी आगे ब्याज मिलता रहता है। इस वजह से यदि किसी निवेशक का एक महीने का ब्याज छूट जाता है, तो केवल उसी महीने का नुकसान नहीं होता बल्कि उस ब्याज पर भविष्य में मिलने वाला रिटर्न भी खत्म हो जाता है। लंबे समय में यही छोटी-छोटी गलती की तो यह अमाउंट बदल सकता है।

इन नियमों का भी रखें ध्यान

हर वित्तीय साल में कम से कम 250 रुपये जमा करना जरूरी है। न्यूनतम अमाउंट जमा नहीं करने पर खाता अनियमित हो जाता है। खाते को दोबारा सक्रिय करने के लिए 50 रुपये प्रति साल जुर्माना और न्यूनतम जमा अमाउंट देनी होती है। एक वित्तीय साल में 1.5 लाख रुपये से अधिक जमा करने पर अतिरिक्त अमाउंट पर ब्याज नहीं मिलता। बेटी के 18 साल की उम्र पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए खाते से 50 प्रतिशत तक अमाउंट निकाली जा सकती है। 18 साल के बाद विवाह जैसी विशेष परिस्थितियों में समय से पहले खाता बंद करने की अनुमति भी मिल सकती है।

कैसे बढ़ाएं रिटर्न?

वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि एसएसवाई से अधिकतम लाभ लेने के लिए हर महीने 5 तारीख से पहले पैसा जमा करना चाहिए। बैंक या डाकघर के माध्यम से ऑटो-ट्रांसफर सुविधा शुरू कर सकते हैं। वित्तीय साल की शुरुआत में ही निवेश कर सकते हैं। सालाना निवेश लिमिट और खाते की स्थिति पर नियमित नजर रख सकते हैं।

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