खेत बेचने पर कितना लगता है टैक्स? ITR में कहां और कैसे दिखाएं यह कमाई, जानिए टैक्स विभाग के जरूरी नियम

Tax On Agricultural Land Sale: कई बार टैक्स न लगने के बावजूद, ITR में इस कमाई की जानकारी न देना या गलत जगह दिखाना आपको मुश्किल में डाल सकता है और इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है। आइए आपको बताते हैं कि कृषि भूमि की बिक्री पर टैक्स का क्या नियम है और इसे रिटर्न में कैसे दर्ज करें

अपडेटेड Jun 29, 2026 पर 2:21 PM
'ग्रामीण कृषि भूमि' को कैपिटल एसेट यानी पूंजीगत संपत्ति नहीं माना जाता है

Tax on Agricultural Land Sale: भारत में कृषि भूमि यानी खेत बेचने को लेकर आम तौर पर यही माना जाता है कि इस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। लेकिन टैक्स नियमों के मुताबिक यह पूरी तरह सच नहीं है। कृषि भूमि बेचने पर टैक्स लगेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह जमीन 'ग्रामीण' इलाके में आती है या 'शहरी' इलाके में।

कई बार टैक्स न लगने के बावजूद, ITR में इस कमाई की जानकारी न देना या गलत जगह दिखाना आपको मुश्किल में डाल सकता है और इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है। आइए आपको बताते हैं कि कृषि भूमि की बिक्री पर टैक्स का क्या नियम है और इसे रिटर्न में कैसे दर्ज करें।

ग्रामीण कृषि भूमि: यहां नहीं लगता कोई कैपिटल गेन्स टैक्स


इनकम टैक्स एक्ट की धारा 2(14) के तहत, 'ग्रामीण कृषि भूमि' को कैपिटल एसेट यानी पूंजीगत संपत्ति नहीं माना जाता है।

टैक्स छूट: चूंकि यह कैपिटल एसेट नहीं है, इसलिए इसे बेचने पर होने वाले मुनाफे पर कोई 'कैपिटल गेन्स टैक्स' नहीं लगता है।

ITR में कहां दिखाएं: चूंकि यह कमाई पूरी तरह टैक्स-फ्री है, इसलिए इसे आईटीआर के Schedule EI यानी टैक्स-फ्री आमदनी वाले कॉलम में दिखाना चाहिए। कई लोग इसे गलती से Schedule CG में दिखा देते हैं, जिससे सिस्टम ऑटोमैटिक टैक्स कैलकुलेट कर लेता है और बेवजह परेशानी खड़ी होती है।

शहरी कृषि भूमि: देना होगा टैक्स, लेकिन यहां मिलेगी राहत

अगर आपकी कृषि भूमि 'शहरी' दायरे में आती है, तो इसकी बिक्री से होने वाला मुनाफा पूरी तरह टैक्स के दायरे में आएगा। हालांकि, टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54B बनाई गई है। इसके तहत अगर आप जमीन बेचने से मिले पैसों से कोई दूसरी कृषि भूमि खरीद लेते हैं, तो आप टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं।

कैसे तय होता है कि जमीन 'ग्रामीण' है या 'शहरी'?

कोई भी खेती की जमीन सिर्फ इसलिए ग्रामीण नहीं हो जाती क्योंकि वहां खेती हो रही है। टैक्स नियमों के अनुसार, नजदीकी नगर पालिका की आबादी और वहां से हवाई दूरी के आधार पर इसका फैसला होता है:

स्थानीय निकाय की आबादी नगर पालिका सीमा से जरूरी  न्यूनतम दूरी  जमीन का वर्गीकरण
10,000 से 1 लाख के बीच 2 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरी ग्रामीण (Tax-Free)
1 लाख से 10 लाख के बीच 6 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरी ग्रामीण (Tax-Free)
10 लाख से अधिक  8 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरी ग्रामीण (Tax-Free)

अगर जमीन इन तय सीमाओं के भीतर आती है, तो उसे 'शहरी कृषि भूमि' माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा।

इनकम टैक्स नोटिस से बचना है, तो पास रखें ये 4 दस्तावेज

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर भविष्य में इनकम टैक्स विभाग आपसे इस टैक्स छूट को लेकर स्पष्टीकरण मांगता है, तो आपके पास ये दस्तावेज होने चाहिए:

तहसीलदार का सर्टिफिकेट: स्थानीय राजस्व प्राधिकारी से मिला एक आधिकारिक प्रमाण पत्र, जो नजदीकी नगर पालिका से जमीन की सटीक हवाई दूरी और वहां की आबादी की पुष्टि करता हो।

राज्य के राजस्व रिकॉर्ड: जमीन के आधिकारिक दस्तावेज जैसे 7/12 एक्सट्रैक्ट, RTC, या जमाबंदी, जो यह साबित करें कि जमीन आधिकारिक तौर पर कृषि भूमि ही है।

खेती करने का सबूत: बीज, खाद के बिल, सिंचाई के रिकॉर्ड या मंडी की रसीदें, जिससे यह साबित हो सके कि जमीन पर वास्तव में खेती की जा रही थी।

बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड: रजिस्टर्ड सेल डीड और बैंक स्टेटमेंट, जो यह साबित करें कि पूरा लेनदेन वैध तरीके से हुआ है और कोई अवैध नकद लेनदेन नहीं हुआ है।

अक्सर होने वाली गलतियां जो लाती हैं टैक्स नोटिस

पूरी तरह छिपा लेना: कई लोग सोचते हैं कि टैक्स नहीं लगना है तो आईटीआर में क्यों बताएं? यह सबसे बड़ी गलती है। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जमीन की रजिस्ट्री की जानकारी टैक्स विभाग को देता है, जो आपके एआईएस (AIS) में दिखती है। अगर आप इसे ITR में नहीं दिखाएंगे, तो डेटा मिसमैच का नोटिस आ सकता है।

खेती न होने पर भी छूट का दावा: अगर कोई जमीन कृषि भूमि के रूप में दर्ज है लेकिन सालों से वहां कोई खेती नहीं हुई है, तो विभाग आपकी छूट को खारिज कर सकता है। इसलिए कृषि आय या ऑपरेशन्स का सबूत रखना बेहद जरूरी है।

1 जुलाई 2026 से बदल रहे हैं ये 5 बड़े नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर! फटाफट चेक करें पूरी लिस्ट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।