Budget 2026 Expectations: अगले वित्त वर्ष 2027 के बजट का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। इस बार केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) रिकॉर्ड लगातार नवें बार बजट पेश करने वाली हैं। मिडिल क्लास फैमिली को बजट से काफी उम्मीदे हैं और इनकम टैक्स को लेकर राहत मिल सकती है। दुनिया भर में छाई सुस्ती के बीच स्वतंत्र भारत के 88वें बजट में खपत को ट्रैक पर लाने की कोशिशें की जा सकती हैं। इकनॉमिस्ट्स और इंडस्ट्रीज बॉडीज का मानना है कि राजकोषीय दिक्कतों के बावजूद सरकार घरेलू मांग को बनाए रखने के लिए पिछले साल की टैक्स रिलीफ और जीएसटी रिफॉर्म को आगे बढ़ाएगी।
Budget 2026 Expectations: टैक्स पर क्या राहत मिल सकती है?
पिछले बार के बजट में खपत को बढ़ावा देने की कोशिश की गई थी। ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-एग्जेम्प्ट कर दिया गया जिसके चलते ₹12.75 लाख तक की आय सैलरी टैक्सपेयर्स को राहत मिल गई। साथ ही टैक्स स्लैब में भी अहम बदलाव किए गए और टीडीएस-टीसीएस से जुड़े नियमों में ढील दी गई। अब इस बार भी बजट में ऐसी ही उम्मीद है। EY को इस बार के बजट से उम्मीद है कि टैक्स सिस्टम में स्थिरता, मुकदमों को कम करने और निजी निवेश के लिए स्पष्ट रास्ते तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। ईवाई ने उम्मीद जताई है कि बजट में दरों या नियमों में बार-बार बदलाव करने की बजाय इंसेंटिंव और कंप्लॉयंस रिफॉर्म को प्राथमिकता दी जाएगी।
Budget 2026 Expectations: जॉब पर रहेगा फोकस!
रेटिंग एजेंसी इक्रा का कहना है कि वित्त वर्ष 2025 की सुस्ती के बाद सितंबर महीने में जीएसटी रिफॉर्म और बेहतर मानसून के चलते गांवों में रिकवरी के दम पर दिसंबर 2025 तिमाही में गाड़ियों की बिक्री बढ़ी। अब इक्रा का मानना है कि इस बार के बजट में इंफ्रा पर खर्च, रूरल आउटपुट और रोजगार के नए मौके तैयार करने पर फोकस दिख सकता है और साथ ही वैकल्पिक ईंधन, स्वदेसी और एमएसएमई की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सकता है। इक्रा का यह भी मानना है कि इस बार रेलवे के लिए बजट में नई लाइन जोड़ने, ट्रैक डबल करने, और फ्रेट कोरिडोर्स जैसे बड़े ऐलान हो सकते हैं।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का मानना है कि इस बार के बजट में एमएसएमई पर फोकस रह सकता है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आग्रह किया है कि वैश्विक स्तर पर कॉम्पटीशन बढ़ाने के लिए एमएसएमई को फाइनेंस का एक्सेस बेहतर किया जाए, नियामकीय दिक्कतें कम की जाएंगे और कंप्लॉयंस कॉस्ट को हल्का किया जाए।