Income Tax Return फाइल करने की तारीख नजदीक आ रही है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 का रिटर्न आपको 31 जुलाई तक फाइल करना जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स को एसएमएस, ईमेल और सोशल मीडिया के जरिए इस बारे में रिमाइंडर भेज रहा है।
Income Tax Return फाइल करने की तारीख नजदीक आ रही है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 का रिटर्न आपको 31 जुलाई तक फाइल करना जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स को एसएमएस, ईमेल और सोशल मीडिया के जरिए इस बारे में रिमाइंडर भेज रहा है।
एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि अंतिम वक्त में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से बचना चाहिए। जल्दबाजी में रिटर्न फाइल करने से उसमें गलती होने की आशंका ज्यादा रहती है। दूसरा, इनकम टैक्स पोर्टल पर अचानक लोड बढ़ने से सर्वर डाउन हो जाता है। तीसरा, अगर आप डेडलाइन से काफी पहले रिटर्न फाइल करने का प्रोसेस शुरू करते हैं तो आपके पास ऐसे किसी डॉक्युमेंट को जुटाने के लिए टाइम होता है, जो आपके पास नहीं है।
The earlier you file your ITR, the more you can relax! ITR filing for AY 2022-23 is available on e-filing portal. Be an early filer & avoid the last minute rush. #FileNow Pl visit https://t.co/GYvO3n9wMf #ITR pic.twitter.com/Lh6ZCk3bsL
— Income Tax India (@IncomeTaxIndia) July 8, 2022
आइए जानते हैं कि आईटीआर फाइल करने के लिए कौन-कौन डॉक्युमेंट जरूरी हैं:
फॉर्म 16
अगर आप नौकरी करते हैं तो आईटीआर फाइल करने के लिए आपके पास फॉर्म 16 होना जरूरी है। कंपनियां अपने एंप्लॉयीज को हर साल यह डॉक्युमेंट इश्यू करती हैं। कंपनियों के लिए 15 जून तक एंप्लॉयी को फॉर्म 16 इश्यू कर देना जरूरी है। इसमें पिछले वित्त वर्ष में आपकी सैलरी से काटे गए TDS की जानकारी होती है। इसके अलावा आपकी ग्रॉस सैलरी और नेट सैलरी का ब्योरा भी इसमें होता है।
Form 16 के दो पार्ट हैं। पहला पार्ट ए है और दूसरा पार्ट बी। पहले पार्ट में कंपनी की तरफ से आपकी सैलरी से काटे गए टैक्स की जानकारी होती है। इसमें एंप्लॉयी के पैन नंबर के साथ डिपॉजिट किए गए टैक्स का ब्योरा होता है। इसमें कंपनी के टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर (TAN) की जानकारी भी होती है। पार्ट बी में आपकी सैलरी का ब्रेक-अप होता है।
फॉर्म 26एएस
यह आईटी डिपार्टमेंट की तरफ से तैयार कंसॉलिडेटेड टैक्स स्टेटमेंट है। इसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ई-पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है। इसके लिए टैक्सपेयर्स को अपने पैन का डिटेल देना होगा। इसमें नौकरी करने वाले टैक्सपेयर्स के टीडीएस और फाइनेंशियल ईयर में चुकाए गए टैक्स की जानकारी होती है।
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दौरान टैक्सपेयर्स को फॉर्म 26एएस में दी गई जानकारियों को फॉर्म 16 में दी गई जानकारी से मैच कर लेना चाहिए।
टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट के प्रूफ
अगर आपने अपनी कंपनी के फाइनेंस डिपार्टमेंट को इनवेस्टमेंट का प्रूफ सब्मिट नहीं किया है तो आप सीधे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को इसे सब्मिच कर सकते हैं। टैक्स डिडक्शन क्लेम करने के लिए यह जरूरी है। आम तौर पर कंपनियां जनवरी के पहले दूसरे हफ्ते तक एंप्लॉयीज से इनवेस्टमेंट प्रूफ मांग लेती हैं।
इनमें सेक्शन 80सी के तहत आने वाले इनवेस्टमेंट आते हैं। जैसे आपको लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम का पेमेंट रिसीट, पीपीएफ में निवेश का प्रूफ, म्यूचुअल फंड में निवेश का प्रूफ आदि देना पड़ता है। आप दो बच्चों की एजुकेशन फीस रिसीट देकर भी टैक्स डिडक्शन का फायदा उठा सकते हैं।
सेक्शन 80सी के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट में एक फाइनेंशियल ईयर में मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये इनवेस्ट कर टैक्स डिडक्शन का फायदा उठाया जा सकता है। इसके अलावा सेक्शन 80डी के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर हर साल 25,000 रुपये डिडक्शन का फायदा उठाया जा सकता है। हेल्थ पॉलिसी में एंप्लॉयी, उसकी पत्नी/पति और बच्चे शामिल हैं।
माता-पिता के लिए अलग से हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 25,000 रुपये का डिडक्शन मान्य है। अगर माता-पिता की उम्र 60 से ज्यादा है तो 50,000 रुपये तक के प्रीमियम पर टैक्ड डिडक्शन हासिल किया जा सकता है।
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