फाइनेंशियल ईयर 2021-22 का इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) फाइल करने की डेडलाइन नजदीक आ रही है। इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को 31 जुलाई तक ITR फाइल करना जरूरी है। इसलिए अभी से इसकी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। इससे अंतिम वक्त में आपको परेशान नहीं होना पड़ेगा। अगर आपने पिछले वित्त वर्ष के दौरान नौकरी बदली है तो आपके लिए यह जान लेना जरूरी है कि आपको कैसे ITR फाइल करना है।
कंपनियां अपने एंपलॉयीज को फॉर्म 16 जारी करती हैं। हर साल 15 जून तक कंपनियों के लिए फॉर्म 16 जारी कर देना जरूरी है। फॉर्म 16 में कंपनी से मिली सैलरी का ब्योरा होता है। इसमें यह भी शामिल होता है कि कंपनी ने वित्त वर्ष के दौरान कितना TDS काटा है। इसमें आपके HRA, स्टैंडर्ड डिडक्शन और 80सी के तहत मिले डिडक्शन की भी डिटेल होती है।
सबसे पहले तो आपको नई और पुरानी दोनों कंपनियों से फॉर्म 16 मांगना होगा। नई कंपनी तो खुद आपको फॉर्म 16 भेज देगी। पुरानी कंपनी से आपको इसके लिए रिक्वेस्ट करना होगा। अच्छा होगा कि आप आज ही एक मेल इस बारे में पुरानी कंपनी के HR को भेज दें। नई और पुरानी कंपनी का फॉर्म 16 मिल जाने पर आपको उसकी डिटेल को भी एक बार चेक कर लेना चाहिए।
फॉर्म 16 के पार्ट बी में ग्रॉस सैलरी का ब्रेक-अप होता है। आपकी तरफ से डिडक्शन का किया गया दावा और टैक्स के दायरे में नहीं आने वाले अलाउन्सेज भी इसमें शामिल होंगे। आपको दोनों कंपनियों से मिली कुल ग्रॉस सैलरी को जोड़ लेना होगा। आपको दोनों फॉर्म 16 से HRA, LTA के अमाउंट को जोड़ना होगा। इससे वह अमाउंट मिल जाएगा जिस पर टैक्स छूट के लिए आप दावा करना है।
नौकरी करने वाले लोगों को एक फाइनेंशियल ईयर में 50,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन की इजाजत है। यह हो सकता है कि आपके दोनों फॉर्म 16 में 50,000-50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया गया हो। याद रखें आपको सिर्फ एक बार 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन क्लेम करना होगा।
अब आपको 80सी, 80डी आदि के तहत मिलने वाले डिडक्शन को क्लेम करना होगा। कुल टैक्सेबल इनकम में सैलरी इनकम, बैंक अकाउंट पर मिला इंटरेस्ट, शेयरों से मिला डिविडेंड आदि शामिल होंगे। आपको यह ध्यान में रखना होगा ये डिडक्शन आप तभी क्लेम कर सकते हैं, जब आपने टैक्स के पुराने सिस्टम को सेलेक्ट किया होगा।
कुल टैक्सेबल इनकम कैलकुलेट करने के बाद आपको टैक्स लायबिलिटी कैलकुलेट करना होगा। उन सभी टैक्स को डिडक्ट कर दीजिए, जो पहले ही डिडक्ट करने के बाद आपके पैन के साथ डिपॉजिट कर दिए गए हैं। TDS का अमाउंट आपको फॉर्म 16 के पार्ट ए में मिल जाएगा।
अगर किसी टैक्सपेयर को कंपनी से फॉर्म 16 नहीं मिला है तो भी वह इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकता है। इसके लिए उसे अपनी सैलरी स्लिप की जरूरत पड़ेगी। इसके आधार पर ग्रॉस टैक्सेबल सैलरी कैलकुलेट करना होगा। इसके बाद दूसरे सोर्स से होने वाली आय को इसमें जोड़ना होगा। हालांकि, अगर मुमकिन हो तो आपको फॉर्म 16 लेने की कोशिश करनी चाहिए।