आपने इनकम रिटर्न फाइल नहीं किया है तो जल्द फाइल कर दें। 31 जुलाई, 2022 इसकी आखिरी तारीख है। इस तारीख के बाद इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने पर आपको पेनाल्टी और टैक्स पर इंटरेस्ट चुकाना होगा। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने रिटर्न फाइलिंग को बहुत आसान बना दिया है। आप ऑनलाइन आईटीआर फाइल कर सकते हैं। रिटर्न फाइल करने के लिए सही आईटीआई फॉर्म का चुनाव करना बहुत अहम है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से रिटर्न फाइलिंग के लिए कुल 7 तरह के फॉर्म इश्यू किए गए हैं। इनमें एक नंबर से लेकर चार नंबर के फॉर्म ही इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए हैं। इनके बारे में हम बाद में बात करेंगे। हम आपको बताएंगे कि कौन सा फॉर्म किस टैक्सपेयर्स के लिए है। लेकिन, पहले यह जान लेते हैं कि अगर आपने अनजाने में गलत आईटीआर फॉर्म में रिटर्न फाइल कर दी तो क्या होगा।
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने से टैक्सपेयर्स को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। टैक्स ऑफिसर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139(9) के तहत ऐसे रिटर्न को डिफेक्टिव (Defective) घोषित कर सकता है।
टैक्स अधिकारी टैक्सपेयर को इस डिफेक्ट के बारे में बता सकता है। इसके लिए वह टैक्सपेयर को नोटिस भेजेगा। नोटिस मिलने के 15 दिन के अंदर उसे डिफेक्ट को ठीक करना होगा। इसका मतलब है कि उसे सही आईटीआर फॉर्म में रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करना होगा।
अगर नोटिस के बावजूद टैक्सपेयर 15 दिन के अंदर रिवाइज्ड रिटर्न सही आईटीआईर फॉर्म में नहीं करता है तो उसके आईटीआर रिटर्न को 'इनवैलिड' मान लिया जाएगा। इसके बाद टैक्सपेयर को आईटीआर फाइल नहीं करने के लिए पेनाल्टी चुकाना पड़ सकता है।
टैक्समैनेजर डॉट इन के चीफ एग्जिक्यूटिव दीपक जैन ने कहा, "अगर आप गलत फॉर्म का चुनाव करते हैं तो कुछ खास तरह के इनकम के स्रोत की जानकारी आप नहीं दे सकेंगे।" ऐसा होने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके फॉर्म को डिफेक्टिव मान लेगा। फिर टैक्सपेयर को 15 दिन के अंदर रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने के लिए नोटिस भेजा जाएगा। जैन ने कहा कि इसके बाद भी अगर आप रिवाइज्ड रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो आपके रिटर्न को इनवैलिड मान लिया जाएगा।
आइए अब जानते हैं कि आईटीआर फॉर्म 1 से लेकर आईटीआईर फॉर्म 4 किस तरह के टैक्सपेयर्स के लिए हैं:
आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं:
अगर आप नौकरी करते हैं और फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में आपकी कुल इनकम 50 लाख रुपये तक थी तो आपको इस फॉर्म का इस्तेमाल करना होगा। पेंशन पाने वाले लोगों को भी इसी फॉर्म का इस्तेमाल करना होगा। अगर आपको बैंक में डिपॉजिट से इंटरेस्ट मिलता है, घर से किराए के रूप में इनकम होती है तो भी आपको इसी फॉर्म का चुनाव करना होगा। अगर आपकी एग्रीकल्चर इनकम 5000 रुपये है तो आपको आईटीआर-1 का इस्तेमाल करना होगा।
अगर आपको सैलरी से इनकम के अलावा दूसरे स्रोतों से आय होती है तो आपको आईटीआई-2 का इस्तेमाल करना होगा। दूसरे स्रोतों में कैपिटल गेंस से इनकम, एक से ज्यादा हाउस प्रॉपर्टी से इनकम, फॉरेन इनकम, फॉरेन एसेट्स, कंपनी में डायरेक्टर बनने पर होने वाली इनकम और अनलिस्टेड शेयर से होने वाली इनकम आती है।
यह फॉर्म उन लोगों के लिए है, जो फॉर्म-2 के लिए तय स्रोतों से इनकम प्राप्त करने के साथ ही किसी बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम हासिल करते हैं। अगर आप किसी फर्म में पार्टनर हैं तो भी आपको आईटीआर-3 का इस्तेमाल करना होगा।
यह फॉर्म रेजिडेंट इंडिविजुअल्स, HUF और फर्मों (LLP को छोड़कर) के लिए जिनकी कुल इनकम 50 लाख रुपये तक है और बिजनेस और प्रोफेशन से भी इनकम होती है।