Get App

सोने की खरीद- बिक्री पर समझें टैक्स की देनदारी

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं।

MoneyControl Newsअपडेटेड May 11, 2019 पर 3:24 PM
सोने की खरीद- बिक्री पर समझें टैक्स की देनदारी

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन।

सोने की खरीद- बिक्री पर टैक्स की देनदारी समझाते हुए टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि ज्वेलरी खरीदते वक्त पक्का बिल लेना चाहिए और सोने की खरीदारी चेक, डेबिट या क्रेडिट के जरिए करनी चाहिए। पुराने सोने को पिघलाने पर लेबर चार्ज लगता है इसलिए लेबर चार्ज का भी बिल लेना चाहिए। अगर किसी को वसीयत से सोना मिला है तो उसे उसके दस्तावेज को संभालकर रखना चाहिए। पुश्तैनी सोने के भी सबूत होने चाहिए।

सीबीडीटी के सुर्कलर के तहत सोना रखने की सीमा है। तय सीमा से ज्यादा सोना मिलने पर सोना जब्त हो सकता है। शादीशुदा महिलाएं 500 ग्राम सोना रख सकती है। शादी न होने पर महिलाएं 250 ग्राम सोना रख सकती है। पुरुषों के लिए सोना रखने की सीमा 100 कीलोग्राम है। तय सीमा से भी ज्यादा सोना होने पर शर्त के साथ कार्रवाई नहीं होती। एक्सपर्ट का कहना है कि 6 साल से ज्यादा पुरानी ज्वेलरी का बिल होने पर आईटी विभाग स्त्रोत नहीं पूछ सकता है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें