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फिक्स्ड डिपॉजिट, रेकरिंग डिपॉजिट और PPF के ब्याज पर टैक्स के नियम क्या हैं?

बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला इंटरेस्ट टैक्स के दायरे में आता है। अगर किसी टैक्सपेयर को एक वित्त वर्ष के दौरान एफडी से 40,000 रुपये से ज्यादा इंटरेस्ट इनकम होती है तो बैंक उस पर TDS काट लेगा। सीनियर सिटीजन के लिए यह सीमा 50,000 रुपये है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 27, 2022 पर 2:28 PM
फिक्स्ड डिपॉजिट, रेकरिंग डिपॉजिट और PPF के ब्याज पर टैक्स के नियम क्या हैं?
अगर बैंक एफडी से इंटरेस्ट इनकम जोड़ने के बाद भी आपकी कुल इनकम टैक्स छूट की सीमा (सालाना 2.5 लाख रुपये) के अंदर रहती है तो TDS से आपको छूट मिलेगी। इसके लिए आपको फॉर्म 15जी भरना होगा।

बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (Bank Fixed Deposit), रेकरिंग डिपॉजिट (Recurring Deposit) और PPF को निवेश का सबसे सुरक्षित माध्यम माना जाता है। इसकी वजह यह है कि इनमें निवेश से पहले आपको पता होता है कि आपको सालाना कितना इंटरेस्ट मिलेगा। कैपिटल मार्केट्स या फाइनेंशियल मार्केट्स की स्थितियों का सीधा असर इन निवेश माध्यमों पर नहीं पड़ता है। लेकिन, क्या आप इनसे होने वाली इंटरेस्ट इनकम पर टैक्स के नियमों के बारे में जानते हैं?

इनवेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट पर मिलने वाले इंटरेस्ट को इनकम का अतिरिक्त सोर्स माना जाता है। इस पर इनकम टैक्स के नियमों के हिसाब से टैक्स लगता है। लेकिन, टैक्सपेयर की कुल इनकम छूट की सीमा (सालाना 2.5 लाख रुपये) से ज्यादा होने पर ही टैक्स लगता है। हालांकि, सेक्शन 80सी, 80डी की मदद से आप अपनी टैक्स लायबिलिटी को घटा सकते हैं।

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बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला इंटरेस्ट टैक्स के दायरे में आता है। अगर किसी टैक्सपेयर को एक वित्त वर्ष के दौरान एफडी से 40,000 रुपये से ज्यादा इंटरेस्ट इनकम होती है तो बैंक उस पर TDS काट लेगा। सीनियर सिटीजन के लिए यह सीमा 50,000 रुपये है। इस तरह अगर आप सीनियर सिटीजन नहीं हैं तो एक वित्त वर्ष में 40,000 रुपये से ज्यादा की इंटरेस्ट इनकम पर बैंक 10 फीसदी TDS काट लेगा। NRI के लिए TDS की दर 30 फीसदी है। इस पर सरचार्ज और सेस भी लगेगा।

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