आपको अपने दादा, परदादा या पिता से विरासत में जो संपत्ति मिलती है क्या उसपर टैक्स लगना चाहिए? इसका जवाब आप बेशक ना में ही देंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्या है ये पुश्तैनी टैक्स (Inheritance Tax) क्या है। आखिर क्यों इस टैक्स को लेकर राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ गई है। लेकिन उससे पहले जानिए कि आखिर क्या है ये विरासत टैक्स।
क्या होता है विरासत टैक्स या Inheritance Tax
विरासत टैक्स, जैसा कि नाम से ही जाहिर है यह टैक्स विरासत में मिलने वाली संपत्ति पर लगता है। अगर आपको दादा-परदादा या पिता से कोई संपत्ति मिली है तो उस पर यह टैक्स लगता है। घबराइए मत, अभी तक टैक्स भारत में नहीं लगता है। लेकिन पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सैम पित्रादा ने कहा कि अमेरिका में जब कोई पिता अपने बेटे को संपत्ति देता है तो उसकी 55 फीसदी हिस्सा सरकार ले लेती है।
अमेरिकी की बात करें तो वहां इनहेरिटेंस टैक्स पर कोई संघीय कानून नहीं है। हालांकि कई राज्य दो तरह के टैक्स लगाते हैं: इनहेरिटेंस टैक्स और एस्टेट टैक्स। एस्टेट टैक्स मरने वाले व्यक्ति की एस्टेट की कुल वैल्यू पर लगाया जाता है। इनहेरिटेंस टैक्स ऐसे लोगों पर लगाया जाता है जिन्हें अपने पूर्वज से एसेट्स या सपंत्ति उत्तराधिकार में मिलती है।
Inheritance Tax: कैसे होता है कैलकुलेशन?
इनहेरिटेंस टैक्स सिर्फ विरासत में मिली संपत्ति के एक हिस्से पर लाग होता है। वह भी तब जब इस संपत्ति की वैल्यू एक सीमा से अधिक होती है। 10 लाख डॉलर की वैल्यू तक की संपत्ति को इस टैक्स से छूट हासिल है। इसके ऊपर की संपत्ति पर टैक्स के रेट्स 1 फीसदी से लेकर 18 फीसदी तक है। इनवेस्टोपीडिया की एक आर्टिकल के मुताबिक अमेरिका के छह राज्यों में अगर मरने वाले व्यक्ति की पत्नी जीवित है तो उसे इनहेरिटेंस टैक्स से छूट मिलती है।
Inheritance Tax: क्या भारत में कभी लगता था यह टैक्स
इडिया में इनहेरिटेंस टैक्स को 1985 में खत्म कर दिया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने इसे खत्म किया था। जब यह कानून लागू था तब किसी व्यक्ति की मौत पर उसके बच्चों या नाती-पोतों को ट्रांसफर होने वाली संपत्ति या प्रॉपर्टी पर यह टैक्स लगता था। एस्टेट ड्यूटी एक्ट, 1953 के तहत विरासत में मिली संपत्ति की वैल्यू की 85 फीसदी तक एस्टेट ड्यूटी लगती थी।