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EPF, NPS में कंपनी के कंट्रिब्यूशन पर आपको टैक्स देना पड़ सकता है, यहां जानिए क्या है नियम

अगर एक फाइनेंशियल ईयर में आपके EPF और NPS अकाउंट में कंपनी का कंट्रिब्यूशन तय सीमा से ज्यादा हो जाता है तो अतिरिक्त अमाउंट पर एंप्लॉयी को टैक्स देना होगा। 2020 में पेश बजट में इसके लिए संसोधन किया गया था

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 17, 2022 पर 12:48 PM
EPF, NPS में कंपनी के कंट्रिब्यूशन पर आपको टैक्स देना पड़ सकता है, यहां जानिए क्या है नियम
आप अपने अप्वाइंटमेंट लेटर या एप्रेजल लेटर से यह जान सकते हैं कि आपके ईपीएफ और एनपीएस अकाउंट में आपकी कंपनी (Employer) कितना कंट्रिब्यूट करती है।

प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने वाले लोग EPF के दायरे में आते हैं। हर महीने आपकी सैलरी का 12 फीसदी ईपीएफ में जमा होता है। आपकी कंपनी भी उतनी ही रकम आपके ईपीएफ अकाउंट में जमा करती है। कंपनी को एंप्लॉयी के एनपीएस अकाउंट में भी कंट्रिब्यूट करने की इजाजत है। यह स्वैच्छिक है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर एक फाइनेंशियल ईयर में आपके EPF और NPS अकाउंट में कंपनी का कंट्रिब्यूशन तय सीमा से ज्यादा हो जाता है तो अतिरिक्त अमाउंट पर एंप्लॉयी को टैक्स देना होगा।

2020 में पेश बजट में इसके लिए संसोधन किया गया था। इसके मुताबिक, अगर किसी एक फाइनेंशियल ईयर में एंप्लॉयी के EPF, NPS और रिटायरमेंट फंड में कंपनी (एंप्लॉयर) का कंट्रिब्यूशन 7.5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाता है तो अतिरिक्त कंट्रिब्यूशन पर एंप्लॉयी को टैक्स देना होगा। इतना ही नहीं अतिरिक्त कंट्रिब्यूशन पर मिला इंटरेस्ट, डिविडेंड आदि पर भी एंप्लॉयी को टैक्स चुकाना होगा। इनकम टैक्स का यह नियम 1 अप्रैल, 2020 से लागू हो गया है।

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आप अपने अप्वाइंटमेंट लेटर या एप्रेजल लेटर से यह जान सकते हैं कि आपके ईपीएफ और एनपीएस अकाउंट में आपकी कंपनी (Employer) कितना कंट्रिब्यूट करती है। पिछले कुछ महीनों में कंपनियों ने एप्रेजल प्रोसेस पूरा हुआ है। इसके बाद एंप्लॉयीज को एप्रेजल लेटर मिले हैं। ऐसे में आपको इस लेटर को ठीक तरह से समझ लेना जरूरी है। जिन लोगों ने नौकरी बदली है उन्हें भी नए अप्वाइंटमेंट लेटर को समझ लेना चाहिए।

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