रिटायरमेंट प्लानिंग में PPF और ELSS दो लोकप्रिय टैक्स-सेविंग विकल्प हैं, जहां PPF सरकारी गारंटी वाला सुरक्षित निवेश है जबकि ELSS इक्विटी म्यूचुअल फंड जो ऊंचे रिटर्न की संभावना देता है। निवेशकों के लिए सही चुनाव जोखिम सहनशीलता, लॉक-इन और लक्ष्यों पर निर्भर करता है।
लॉक-इन और तरलता में बड़ा अंतर
PPF में 15 साल की लंबी लॉक-इन अवधि होती है, जिसे मैच्योरिटी के बाद 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है, लेकिन जल्दी निकासी सीमित है। ELSS का लॉक-इन मात्र 3 साल का है, जो इसे अधिक लचीला बनाता है निकासी के बाद निवेश जारी रख सकते हैं। कम जोखिम पसंद करने वाले रिटायरमेंट के करीब निवेशक PPF चुनते हैं, वहीं युवा ELSS से फायदा उठाते हैं।
PPF पर वर्तमान 7.1% ब्याज दर सरकारी तय होती है, जो निश्चित और टैक्स-फ्री है। ELSS बाजार से जुड़ा होने से 12-18% औसत रिटर्न दे सकता है, लेकिन उतार-चढ़ाव का खतरा रहता है। उदाहरण से समझिए सालाना 1.5 लाख निवेश पर 15 साल में PPF से करीब 40.68 लाख का कॉर्पस बनता है, जबकि ELSS (15% रिटर्न मानकर) 84.6 लाख तक पहुंच सकता है।
यह तालिका दर्शाती है कि लंबी अवधि में ELSS वेल्थ बढ़ा सकता है, लेकिन बाजार सुधार पर निर्भर।
जोखिम से डरने वाले PPF से सुरक्षा लें, ऊंचे रिटर्न चाहने वाले ELSS चुनें। दोनों का मिश्रण आदर्श है आधी राशि सुरक्षित, आधी विकास वाली। निवेश से पहले अपनी उम्र, आय और लक्ष्य जांचें।