CNBC-आवाज के बर्थ डे सेलिब्रेशन और मार्केट आउटलुक पर खास चर्चा करते हुए कोटक महिंद्रा एएमसी (Kotak Mahindra AMC) के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह ने कहा कि पिछले पांच सालों में लोगों ने टी20 मैच देखा था। धड़ल्ले से रन हो रहे थे। एक्साइटमेंट थी। अब मार्केट टेस्ट मैच खेलने लगा है। बॉल पे बॉल डाले जा रहे हैं और बैट्समैन चौके मारने की जगह पे बॉल को छोड़ रहा है। अब हमें टी20 का जो माइंडसेट है उसे टेस्ट मैच का बनाना पड़ेगा। मार्केट फेयर वैल्यू पर है। आगे बहुत सारे रिस्क भी है। इसीलिए अब मार्केट का रिटर्न वैल्यूएशन रीरेटिंग से नहीं अर्निंग ग्रोथ से होगा और हमे रिटर्न की उम्मीद हाई सिंगल डिजिट या लो डबल डिजिट रखनी पड़ेगी। ऐसे टेस्ट मैच खेलना है उस माइंड से आप मार्केट में निवेश करिए।
बाजार में जियोपॉलिटिकल रिस्क ज्यादा
उन्होंने आगे कहा कि हमें अपनी रिटर्न्स की एक्सपेक्टेशन को अगले कुछ समय तक थोड़ा सा कम रखना जरूरी है। बाजार में जियोपॉलिटिकल रिस्क है। पहले तो इकोनॉमिक पॉलिसी का रिस्क था। अब युद्ध का भी रिस्क बना हुआ है। दूसरी बात ये है कि हमारी लोकल इकोनमी तो अच्छी तरह से ग्रो कर रही है। लेकिन, कॉर्पोरेट अर्निंग नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ कम होने की वजह से थोड़ी ढीली है। पहले उम्मीद थी कि दिसंबर क्वार्टर में अर्निंग्स ग्रोथ डबल डिजिट तक पहुंच जाएगी। लेकिन कल हमने एक बड़ी आईटी कंपनी के रिजल्ट में देखा कि लेबर कोड की वजह से एक वन टाइम कॉस्ट लेनी पड़ी। उस वजह से प्रॉफिटेबिलिटी कम हो गई। हालांकि मार्केट समझदार है वन टाइम कॉस्ट को रिपीटेटिव कॉस्ट नहीं मानेगा। लेकिन इस प्रकार की चीजें होनें की वजह से परफॉर्मेंस उम्मीद से थोड़ा कम नजर आ रहा है। इसकी वजह से मार्केट में अब वैल्यूएशन रीरेटिंग होना मुश्किल है।
बहुत ज्यादा रिटर्न की न करें उम्मीद
मार्च 2020 में 10 टाइम फॉरवर्ड पर ट्रेड हो रहे थे तो 20 टाइम होना जायज था। लेकिन अब अगर 21 टाइम फॉरवर्ड पर ट्रेड हो रहा है तो इसका 25 टाइम 40 टाइम होना बहुत मुश्किल लगता है। अब अर्निंग्स ग्रोथ जितनी होगी उतनी ही रिटर्न मिलेगा। अगर अर्निंग्स ग्रोथ सिंगल डिजिट होगी तो सिंगल डिजिट रिटर्न मिलेगा। अगर यह डबल डिजिट होगी तो डबल डिजिट रिटर्न मिले। ऐसे में लगता है कि पिछले पांच सालों में जो रिटर्न हमने पाया है वो शायद आने वाले 8 या 10 सालों में आएगा। पांच सालों में इतना रिटर्न आना बहुत मुश्किल है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील होने से टेक्सटाइल्स और एक्वाकल्चर कंपनियों को होगा फायदा
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बात करते हुए नीलेश शाह ने कहा कि ट्रेड डील्स में हमें ये देखना पड़ेगा डिटेल्स क्या है? जब इतनी लंबी नेगोशिएशन चली है तो जाहिर है कि कुछ मतमतांतर है, कुछ मतभेद है और हमें डिटेल्स देखनी पड़ेगी। ट्रेड डील नहीं होने की वजह से टेक्सटाइल, हैंडीक्राफ्ट, जेम्स ज्वेलरी, एक्वाकल्चर इन सारे सेक्टर के ऊपर नेगेटिव इंपैक्ट पड़ा है। अब अगर ट्रेड डील में बैलेंस आ जाता है तो इन सेक्टरों के शेयर्स को फायदा हो सकता है। हैंडीक्राफ्ट और जेम्स ज्वेलरी की बहुत सारी कंपनियां लिस्टेड नहीं है। तो टेक्सटाइल्स और एक्वाकल्चर यह दो सेक्टर है जिसमें अगर ट्रेड डील में कोई ढंग से बैलेंस हुआ है तो फायदा हो सकता है।
आईटी में एआई इनोवेशन वाली कंपनियों पर रहे फोकस
आईटी शेयरों पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि हर बैट्समैन के जीवन काल में एक ऐसा समय आता है जब वो एक लीन पैच से गुजरता है। चाहे सचिन तेंदुलकर साहब ही क्यों न हों। जब उन्हें टेनिस एल्बो हुआ या अभी हाल के समय में विराट कोहली है जब उनकी ऑफसाइड में कुछ कमी दिखने लगी थी। बट उन्होंने फिर से अपने आप को इन्वेंट रीइन्वेंट किया। तेंदुलकर जी ने अपनी स्टंस बदल दी। बैट बदल दिया। विराट कोहली ने नेट में प्रैक्टिस की और फिर वो रन बनाने लगे। आईटी में भी ऐसे प्लेयर्स होंगे जो अपने आप को नए तरीके से तैयार नहीं कर पाएंगे और बहुत सारे प्लेयर्स ऐसे भी होंगे जो एआई का लिवरेज लेकर अपने क्लाइंट्स के लिए चीपर फास्ट बेटर सॉल्यूशन प्रोवाइड करना चालू कर देंगे। ऐसे में हमें उस प्लेयर पर ध्यान रखना है जो नेट प्रैक्टिस में डाटा है और लगातार अपनी खामियों को दूर करने के लिए प्रैक्टिस कर रहा है। एंटरप्राइज एआई एक ऐसा ही एरिया है। आज बड़े-बड़े ऑर्गेनाइजेशन एआई का फायदा चाहते हैं। लेकिन उनका सारा इंटरनल डाटा सही जगह पर नहीं है। एआई तब यूज कर पाएंगे जब डेटा सही तरीके से प्रेजेंट किया जाए। ऐसे में डाटा अरेंज करना, डेटा को सुरक्षित रखना, उसके ऊपर एआई की लेयर लगाना, अपने एम्प्लाइज को उसके लिए ट्रेन करना यह सब एंटरप्राइज एआई का अभिन्न हिस्सा है। कुछ भारतीय कंपनी इस क्षेत्र में अच्छा काम कर रही है। ऐसे प्लेयर्स पर ध्यान रखिए जो अपने लीन पेंच में हतोत्साहित होने की जगह नेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। आज नहीं तो कल जब वो मैच खेलने आएगे तो वापस चौके मारेंगे।
ऑटो मोबाइल में बहुत ज्यादा रिटर्न की उम्मीद नहीं
ऑटो मोबाइल शेयरों पर बात करते हुए नीलेश शाह ने कहा कि काफी हद तक ये स्पेस फ्रंट लोड हो चुका है। एक ऑटोमोबाइल सेक्टर स्पेशली टू व्हीलर्स ने कुछ समय तक परफॉर्मेंस नहीं किया था। इसका लीन पैच था। लेकिन जीएसटी कट होने की वजह से इनमें भी काफी तेजी आ गई। लेकिन अब यह मोमेंटम आगे भी जारी रहना मुश्किल है। अब इस क्षेत्र में भी T20 से टेस्ट मैच की और बदलाव होने वाला है। ऐसे में अब आप ऑटोमोबाइल स्टॉक में बॉटम अप में कुछ टू व्हीलर स्टॉक देख सकते हैं। लेकिन पिछले 4 से 6 महीनों में जितना रिटर्न आया है वैसा रिटर्न आने की उम्मीद नहीं है।
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