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Supreme Court: नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रीय पुत्र’ घोषित करने की याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को लगाई फटकार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी (INA) ने भारत को स्वतंत्रता दिलाई, साथ ही याचिका में नेताजी को "राष्ट्रीय पुत्र" घोषित करने की भी मांग की गई है।

Edited By: Ashwani Kumar Srivastavaअपडेटेड Apr 20, 2026 पर 1:38 PM
Supreme Court: नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रीय पुत्र’ घोषित करने की याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को लगाई फटकार
नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रीय पुत्र’ घोषित करने की याचिका खारिज

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी (INA) ने भारत को स्वतंत्रता दिलाई, साथ ही नेताजी को "राष्ट्रीय पुत्र" घोषित करने और 21 अक्टूबर 1943 (INA स्थापना दिवस) और 23 जनवरी 1897 (उनकी जयंती) को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का अनुरोध किया गया था। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की कि INA के लगभग 26,000 शहीद सैनिकों को सम्मान दिया जाए।

बता दें कि इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जे. बागची की बेंच कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि आप सिर्फ अदालत का समय बर्बाद कर रहे है। आप में सुधार नहीं आ रहा है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इसी याचिकाकर्ता द्वारा पहले भी दायर की गई इसी तरह की एक जनहित याचिका को न्यायालय ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि ऐसे मुद्दे न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं और इन्हें उचित प्राधिकारी के समक्ष उठाया जाना चाहिए।

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