बढ़ते इनफ्लेशन और क्रिप्टो मार्केट के लिए रेगुलेशन जैसे मैक्रोइकोनॉमिस फैक्टर्स की वजह से मार्केट में गिरावट आई है
MoneyControl News
अपडेटेड Jul 28, 2022 पर 7:32 AM
बेयर मार्केट ऐसा फेज है, जब आपके इनवेस्टमेंट की कीमतें तेजी से गिरती हैं। यह गिरावट लंबे समय तक जारी रहती है। बेयर मार्केट फेज ट्रेडर्स और इनवेस्टर्स के लिए बड़ी बाधा है, जो क्रिप्टो मार्केट से अच्छा पैसा कमाना चाहते हैं। बतौर एक क्रिप्टो इनवेस्टर आप चार्ट पर आंकड़ों को देखते हैं और पाते हैं कि आपका इनवेस्टमेंट की वैल्यू तेजी से घट रही है। आपके दिमाग में सिर्फ एक सवाल होता है: ऐसी स्थिति से बेयर को कैसे फायदा होता है?
जब क्रिप्टोकरेंसीज की कीमतें 20% से ज्यादा गिर गई हों तो बेयर मार्केट (जब मार्केट के बेयर फेज में होना मान लिया जाता है) के असर से बचना आसान नहीं है। खासकर तब जै क्रिप्टो मार्केट में बेयरिश ट्रेंड देखा जा रहा है और टॉप क्रिप्टो के प्राइसेज 70-90 फीसदी गिर चुके हैं तो ट्रेडर्स के लिए अपना धैर्य बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, जैसी की यह कहावत है, "हर अंधेरे में उम्मीद की एक किरण होती है।" आप इन रणनीति का इस्तेमाल कर बेयर मार्केट का बहुत फायदा उठा सकते हैं:
1. डॉलर-कॉस्ट एवरेजिंग
आप प्राइस चार्ट पर डीप वैली देखते हैं। आप ट्रेंड बदलने का इंतजार करते हैं, लेकिन स्थिति और खराब हो जाती है। आप सोचते हैं कि आपके पास बैठकर अपने इनवेस्टमेंट को घटता हुए देखने के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं है तभी आपको याद आता है कि आपके पास एक बैक-अप प्लान है। आपके पास कुछ स्टेबलकॉइन या कुछ फिएट करेंसी हैं।
क्रिप्टो एसेट मार्केट में बहुत उतार-चढ़ाव रहता है। कई बार जब बेयर की पकड़ मजबूत होती है तब आपको पता नहीं होता कि कीमतें और गिरेंगी या छोटी तेजी आएगी। ऐसे वक्त में आप डीसीए या डॉलर-कॉस्ट एवरेजिंग स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल कर सकते हैं। डीसीए आपको थोड़े पैसे के निवेश से इनवेंस्टमेंट का विस्तार करने में मदद करता है।
आप अपने फंड्स को, मान लीजिए 50000 रुपये को छोटे सेट्स जैसे 1000 रुपये में बांट सकते हैं और जब आपके टारगेट के जितना कोई खास क्रिप्टो या कई क्रिप्टो के प्राइसेज गिर जाएं तो उन्हें खरीद सकते हैं। आप अपने पूरे फंड को खर्च करने बजाय गिरावट आने पर खास समय पर खरीदने का फैसला ले सकते हैं। अगर फ्यूचर में प्राइस और गिर जाते हैं तो आप एलॉटेड पैसे से क्रिप्टो खरीद सकते हैं ताकि जब कीमतें बढ़ें तो आप बड़ा मुनाफा कमा सकें।
2. पोर्टफोलियो का डायवर्जन
वॉरेन बफे बिटकॉइन को 'रैट प्वाइजन्ड स्केवेयर्ड' बता सकते हैं। हालांकि, उनकी कंपनी ने इसमें परोक्ष रूप से इनवेस्ट किया है। डायवर्सिफिकेशन की उनकी सलाह का कोई मतलब नहीं है। वह कहते हैं, "डायवर्सिफिकेशन अज्ञानता से सुरक्षा है। अगर आपको पता है कि आप क्या कर रहे हैं तो इसका कोई मतलब नहीं।"
डायवर्सिफिकेशन आपके इनवेस्टमेंट पूल के लिए रिस्क घटाने में मदद करता है। बिटकॉइन की जबर्दस्त ग्रोथ को देखते हुए मान लीजिए अगर आपने अपना पूरा पैसा दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो में इनवेस्ट किया होता। तो अब गिरावट की स्थिति में आपको लॉस हो सकता था।
इसके बजाय आप अपना फंड्स अलग-अलग क्रिप्टो में एलोकेट कर दें ताकि इनमें से किसी की कीमत चढ़ती है या उतरती है तो आपको पता होगा कि आपका पैसा जीरो नहीं होगा। अगर मार्केट में बेयरिश फोर्स काम नहीं कर रही है तो डायवर्सिफिकेशन आपका रिस्क घटा देता है ओर कुछ प्रॉफिट की गारंटी देता है।
कोई इनवेस्टर्स क्रिप्टोज की प्रवृत्ति और उनकी कीमतों के बारे में पक्का नहीं हो सकता है। बाजार में 17,000 से ज्यादा क्रिप्टोज में कारोबार हो रहा है। आपको अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाय करने और लास कम से कम होने देने के लिए क्रिप्टोज के बास्केट को चुनने से पहले स्टडी करनी होगी। आप अपने बास्केट को चुनने के दौरान कुछ चीजों पर ध्यान दे सकते हैं। जैसे क्रिप्टो की संभावित ग्रोथ, प्राइस मूवमेंट का इतिहास और वह उच्चतम कीमत जिस पर क्रिप्टो में कारोबार हो चुका है।
3. स्टेकिंग
कार्डेनो (एडीए), पोलकाडॉट (डीओटी), सोलाना (एसओएल) और दूसरे ब्लॉकचेंस अपने होल्डर्स को अपने नेटवर्क में स्टेक करने की इजाजत देते हैं। स्टेकिंग का मतलब किसी खास ब्लॉकचेन पर वैलिडेटर होने के लिए अपने क्रिप्टोज को लॉक करना और रिवॉर्ड कमाना है।
क्रिप्टोज जो प्रूफ ऑफ स्टेक (पीओएस) कनसेंसस का इस्तेमाल करते हैं वे अपने प्लेटफॉर्म पर स्टेकिंग की इजाजत देते हैं। पीओएस मैकानिज्म के इस्तेमाल से नेटवर्क पर ट्रांजेक्शन को वैलिडेट किया जाता है। यह ठीक वैसा ही जैसा माइनर्स प्रूफ ऑफ वर्क (पीओडब्ल्यू) कनसेंसस में करते हैं। जब कभी एक ब्लॉक ब्लॉकचेन पर वैलिडेट किया जाता है, आपको फ्रेश टोकन्स मिलते हैं।
आपके क्रिप्टो होल्डिंग्स के जरिए स्टेकिंग पैसिव अर्निंग का मौका देता है, जिसका इस्तेमाल आप बेयरिश मार्केट में अपने नुकसान की भरपाई के लिए कर सकते हैं। इसका नतीजा आपके क्रिप्टोज की लॉकिंग के रूप में सामने आता है, जिस वजह से आप पैनिक सेलिंग से बच जाते हैं। हालांकि, लॉकिंग आप की वजह से क्रिप्टो की लिक्विडिटी खत्म हो जाती है।
अगर आप स्टेक करने के दौरान अपने होल्डिंग को लिक्विड बनाए रखना चाहते हैं तो आप लिक्विडिटी स्टेकिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं। लिक्विड स्टेकिंग में आपको क्रिप्टो की स्टेकिंग में एक डेरिवेटिव टोकन मिल जाता है। आप इस डेरिवेटिव टोकन का इस्तेमाल उन्हें डीसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (डेफी) पर बेचने के रूप में कर सकते हैं या तब ओपन मार्केट में बेच सकते हैं, जब क्रिप्टो की कीमतें बढ़ जाती हैं।
4. यील्ड फार्मिंग और लिक्विडिटी माइनिंग
यील्ड फार्मिग में एक क्रिप्टो होल्डर के रूप में आप अपने क्रिप्टोज डीसेंट्रालाइज्ड फाइनेंस (डेफी) प्लेटफॉर्म पर लाते हैं। इससे इन प्लेटफॉर्म्स की लिक्विडिटी बढ़ जाती है और आप एक लिक्विड प्रोवाइडर बन जाते हैं। लिक्विड प्रोवाइडर को आम तौर पर वह रिवॉर्ड मिलता है जो डीसेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म की कमाई से हासिल होता है।
उदाहरण के लिए आप सबसे बड़े डीइएक्स में से एक यूनिस्वैप में अपने क्रिप्टोज डिपॉजिट करते हैं। यूनिस्वैप लिक्विडिटी पूल में अपने क्रिप्टोज को डिपॉजिट करने पर आप लिक्विडिटी प्रोवाइडर बन जाते हैं और इससे रिवॉर्ड्स के हकदार बन जाते हैं। रिवॉर्ड्स के अलावा यूनिस्वैप आपको यूएनआई टोकंस भी फ्री में देता है जो नेटवर्क का नेटिव टोकंस होता है। इस कॉन्सेप्ट को लिक्विडिटी माइनिंग कहा जाता है।
दोनों ही टेक्निक्स से आपको फ्री टोकन के रूप में कमाई होती है और इस पैसिव इनकम से आपको बेयर मार्केट में हुए लॉस की भरपाई करने में मदद मिलती है।
5. स्काल्प ट्रेडिंग
क्रिप्टो मार्केट में बहुत उतार-चढ़ाव को देखते हुए बेयरिश मार्केट में स्काल्प ट्रेडिंग एक अच्छा अल्टरनेटिव है। आसान शब्दों में कहें तो स्काल्प ट्रेडिंग छोटा लेकिन बार बार प्रॉफिट के लिए क्रिप्टो की बिक्री और खरीदारी है। यह प्रॉफिट एक समय के बाद इतना ज्यादा हो जाता है जिससे आपको अच्छा रिटर्न मिल जाता है।
आप बेयर फेज में स्काल्प ट्रेडिंग के लिए इन दोनों में से किसी एक टेक्निक का इस्तेमाल कर सकते हैं- मैनुअल या ऑटोमेटेड। मैनुअल स्काल्पिंग में आपको ओपनिंग्स और क्लोजिंग्स का पता लगाने के लिए रियल-टाइम एनालिसिस के इस्तेमाल से बाजार की ध्यानपूर्वक स्टडी करनी पड़ती है। ऑटोमेटेड स्काल्पिंग में आप अपने एनालिसिस के मुताबिक यूनिक स्ट्रैटेजी तैयार कर सकते हैं और तब अपने ट्रेडिंग के रिस्क को घटा सकते हैं जब आप सक्रिय रूप से मार्केट की स्टडी नहीं कर रहे होते हैं।
बढ़ते इनफ्लेशन और क्रिप्टो मार्केट के लिए रेगुलेशन जैसे मैक्रोइकोनॉमिस फैक्टर्स की वजह से मार्केट में गिरावट आई है। साथ ही क्रिप्टो की बड़ी ब्लॉकचेंस के ध्वस्त होने जैसे आंतरिक कारणों का भी मार्केट की गिरावट में हाथ है। स्थिति जल्द बेहतर नहीं होने का संकेत खतरनाक लगता है। ऊपर बताई गई टेक्निक्स बहुत थकाने वाली नहीं है बल्कि यह गिरावट के दौरान भी कमाई करने का पक्का रास्ता है। अब जब आप यह जान चुके हैं कि बढ़ते बेयर मार्केट में अपने इनवेस्टमेंट को कैसे सुरक्षित रखना है तो आप क्रिप्टो में ट्रेडिंग की अपनी जर्नी इंडिया के सबसे भरोसेमंद क्रिप्टो एक्सचेंज वजीरएक्स के साथ शुरू कर सकते हैं। हैपी ट्रेडिंग!
इस आर्टिकल को प्रतीक आहूजा ने लिखा है, जो वजीरएक्स में एसोसिएट डायरेक्टर (मार्केटिंग) हैं।
डिसक्लेमर: क्रिप्टोज अनरेगुलेटेड वर्चुअल एसेट्स है, ये लीगल टेंडर नहीं है और इनसे मार्केट रिस्क जुड़ा हुआ है। इस लेख में व्यक्त नजरिया और राय इसके लेखक की है और यह किसी तरह का इनवेस्टमेंट एडवाइस या वजीरएक्स का ऑफिशियल पॉजिशन नहीं है।