रिटायरमेंट प्लानिंग आज हर नौकरीपेशा और निवेशक के लिए सबसे अहम विषय बन चुका है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को शुरू किया था। यह स्कीम न सिर्फ सुरक्षित है बल्कि इसमें निवेश करने पर टैक्स छूट भी मिलती है। लेकिन अक्सर नए निवेशक इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि उन्हें Tier-1 अकाउंट चुनना चाहिए या Tier-2 अकाउंट।
Tier-1 अकाउंट – रिटायरमेंट के लिए अनिवार्य
- यह NPS का मुख्य अकाउंट है और इसमें निवेश करना रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए जरूरी है।
- इसमें निवेश पर धारा 80C और 80CCD(1B) के तहत टैक्स छूट मिलती है।
- यह अकाउंट लंबे समय तक स्थिर और सुरक्षित फंड बनाने के लिए सबसे उपयुक्त है।
Tier-2 अकाउंट – लचीलापन और तुरंत निकासी
- यह वैकल्पिक अकाउंट है और इसे केवल वही खोल सकते हैं जिनके पास Tier-1 अकाउंट पहले से है।
- इसमें निवेशक को पैसे निकालने की पूरी आजादी है, कोई लॉक-इन पीरियड नहीं है।
- हालांकि, इसमें टैक्स छूट नहीं मिलती, इसलिए यह शॉर्ट-टर्म सेविंग्स या अतिरिक्त निवेश के लिए बेहतर है।
- इसे अकसर उन निवेशकों के लिए सुझाया जाता है जो लिक्विडिटी चाहते हैं और कभी भी पैसे निकालने की सुविधा चाहते हैं।
Tier-1 अकाउंट उन लोगों के लिए है जो अपने भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं और टैक्स बचत का फायदा उठाना चाहते हैं। वहीं, Tier-2 अकाउंट उन लोगों के लिए है जो अतिरिक्त सेविंग्स करना चाहते हैं और जिन्हें पैसों की तुरंत जरूरत पड़ सकती है।
शुरुआती निवेशकों के लिए सबसे पहले Tier-1 अकाउंट खोलना समझदारी है, क्योंकि यह टैक्स छूट और रिटायरमेंट फंड दोनों देता है। बाद में, अगर निवेशक को लचीलापन चाहिए तो वे Tier-2 अकाउंट भी चुन सकते हैं। इस तरह NPS दोनों तरह के निवेशकों सुरक्षित रिटर्न चाहने वालों और लिक्विडिटी पसंद करने वालों के लिए संतुलित विकल्प पेश करता है।