म्यूचुअल फंड्स की स्कीमों में टोटल एक्सपेंस रेशियो क्या है? जानिए हर सवाल के जवाब

SEBI के नियमों के तहत एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को म्यूचुअल फंड की स्कीम के मैनेजमेंट के लिए निवेशकों से कुछ फीस वसूलने की इजाजत दी गई है। यह अमाउंट फंड के डेली नेट एसेट का कुछ फीसदी होता है। TER फंड के सालाना एसेट के फीसदी के रूप में होता है। चूंकि, ओपन-एंडेड फंड्स के एसेट में रोजाना बदलाव होता रहता है। इसलिए स्कीम की रोजाना की नेट एसेट वैल्यू के अनुपात में टीईआर होता है

अपडेटेड Sep 20, 2023 पर 2:52 PM
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म्यूचुअल फंड्स हाउस को कई तरह के खर्च करने पड़ते हैं। इनमें एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सपेंसेज, ट्रांजेक्शन कॉस्ट, इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट फीस, रजिस्ट्रार फीस, कस्टोडियन फीस और ऑडिट फीस शामिल होती है। इन सभी खर्चों को मिलाकर टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) कहा जाता है।

अगर आप म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में निवेश करते हैं तो आपने कई बार टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के बारे में सुना होगा। दरअसल SEBI के नियमों के तहत एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को म्यूचुअल फंड की स्कीम के मैनेजमेंट के लिए निवेशकों से कुछ फीस वसूलने की इजाजत दी गई है। यह अमाउंट फंड के डेली नेट एसेट का कुछ फीसदी होता है। TER फंड के सालाना एसेट के फीसदी के रूप में होता है। चूंकि, ओपन-एंडेड फंड्स के एसेट में रोजाना बदलाव होता रहता है। इसलिए स्कीम की रोजाना की नेट एसेट वैल्यू के अनुपात में टीईआर होता है। हाल में सेबी ने TER में बदलाव करने का प्रस्ताव पेश किया था। उसने इस बारे में एक कंस्लटेशन पेपर जारी किया था। मई में जारी इस पेपर पर निवेशकों की राय मांगी गई थी।

SEBI दूसरा कंसल्टेशन पेपर पेश करेगा

कंसल्टेशन पेपर पर मिले फीडबैक के आधार पर सेबी ने जून में कहा था कि वह TER पर एक दूसरा कंसल्टेशन पेपर पेश करेगा। आइए टीईआर को समझने की कोशिश करते हैं। हम यह भी जानेंगे कि इसका कैलकुलेशन कैसे होता है।


म्यूचुअल फंडों के कई तरह के खर्च

म्यूचुअल फंड्स हाउस को कई तरह के खर्च करने पड़ते हैं। इनमें एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सपेंसेज, ट्रांजेक्शन कॉस्ट, इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट फीस, रजिस्ट्रार फीस, कस्टोडियन फीस और ऑडिट फीस शामिल होती है। इन सभी खर्चों को मिलाकर टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) कहा जाता है। म्यूचुअल फंड्स की स्कीमों को अतिरिक्त चार खर्च निवेशकों से वसूलने की इजाजत होती है। ये ऊपर बताई एक्सपेंस लिमिट के अतिरिक्त होते हैं।

चार अतिरिक्त खर्च भी

पहला है ब्रोकरेज एंड ट्रांजेक्शन कॉस्ट। यह ट्रेड के एग्जिक्यूशन पर आने वाला खर्च है। यह कैश मार्केट ट्रांजेक्शन की स्थिति में ट्रैड वैल्यू का 0.12 फीसदी हो सकता है। डेरिवेटिव ट्रांजेक्शन में यह 0.05 फीसदी हो सकता है। दूसरा है इनवेस्टमेंट पर लगने वाला जीएसटी। यह स्कीम की डेली नेट एसेट का मैक्सिमम 0.05 फीसदी हो सकता है। तीसरी है एडवायजरी फीस। मार्च 2023 तक म्यूचुअल फंडों को एक चौथी फीस वसूलने की इजाजत थी। शर्त यह थी कि अगर टॉप 30 के अलावा उन्हें दूसरे शहरों से निवेश आता है तो वे 30 बेसिस प्वाइंट्स की अतिरिक्त शुल्क वसूल सकते हैं। हालांकि, अब सेबी ने छोटे शहरों के लिए इनसेंटिव स्कीम रोक देने को कहा है।

ट्रांजेक्शन चार्च

ऊपर बताई गई कॉस्ट के अलावा एएमसी को मौजूदा निवेशक से 100 रुपये का ट्रांजेक्शन चार्ज डिडक्ट करने की इजाजत है। नए निवेशकों से 150 रुपये डिडक्ट करने की इजाजत है। सब्सक्रिप्शन अमाउंट 10,000 रुपये या इससे ज्यादा होने पर यह चार्ज वसूला जाता है। निवेशकों से वसूला गया यह चार्ज डिस्ट्रिब्यूटर को दे दिया जाता है।

फुल ट्रेल मॉडल

इस बीच म्यूचुअल फंड्स ने सभी स्कीमों में फुल ट्रेल मॉडल का तरीका अपनाया है। इसका मतलब है कि स्पॉन्सरशिप के जरिए किसी तरह का अपफ्रंट कमीशन या किसी ट्रेल कमीशन की अपफ्रंटिंग के डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तरीके की इजाजत नहीं है। हालांकि, ट्रेल कमीशन की अपफ्रंटिंग की इजाजत सिर्फ ऐसे मामलों में है जिसमें निवेश SIP के जरिए होता है।

सभी स्कीमों के लिए एक TER नहीं

अभी म्यूचुअल फंड के एक्सपेंस रेशियो की तब तक कोई लिमिट नहीं है, जब तक यह TER के निर्धारित दायरे में है। स्लैब आधारित TER अलग-अलग तरह की स्कीमों पर लागू होता है। इनमें इक्विटी, डेट, हायब्रिड और सॉल्यूशन ओरिएंटेड फंड शामिल होते हैं। इक्विटी फंड्स 2.25 फीसदी बेस एक्सपेंस रेशियो चार्ज कर सकते हैं, जबकि नॉन-इक्विटी स्कीमों के मामले में इसकी लिमिट 2 फीसदी है। इसका मतलब है कि एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़ने का साथ एक्सपेंस रेशियो घटता है।

सूचकांकों और गोल्ड में इनवेस्ट करने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) 1 फीसदी से ज्यादा बेस टीईआर चार्ज नहीं कर सकते। एक फंड ऑफ फंड (FoF) 2.25 फीसदी से ज्यादा चार्ज नहीं कर सकता। इसमें अंडलाइंग इक्विटी स्कीम का एक्सपेंस रेशियो भी शामिल है।

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