भारत में महिलाओं का कारोबार जगत में कदम रखना अब सपना नहीं रहा। पिछले पांच सालों में लोन लेने वाली महिलाओं की तादाद 22 फीसदी सालाना बढ़ी है, खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों से। सरकार की उद्योगिनी योजना इसी उभार को मजबूती दे रही है, जो जरूरतमंद बहनों को बिना जमानत के 1 से 3 लाख रुपये तक का लोन देती है। कर्नाटक से शुरू होकर अब पूरे देश में फैली यह स्कीम महिलाओं को सिलाई केंद्र, ब्यूटी पार्लर या कैटरिंग जैसे छोटे बिजनेस खोलने में मदद करती है।
पात्रता और लोन की खासियतें
18 से 55 साल की महिलाएं आवेदन कर सकती हैं, बशर्ते परिवार की सालाना आय 1.5 लाख से कम हो। विधवाओं और दिव्यांग बहनों के लिए आय सीमा नहीं है। SC/ST महिलाओं को 50 फीसदी तक सब्सिडी, बाकी को 30 फीसदी यह सरकारी तोहफा लोन चुकाने को आसान बनाता है। कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं, बस कम ब्याज पर लोन। 88 तरह के लघु उद्योग कवर होते हैं, जैसे अगरबत्ती बनाना, बेकरी, जिम सेंटर या हस्तशिल्प। ट्रेनिंग सर्टिफिकेट या EDP कोर्स भी मददगार साबित होता है।
क्यों है यह योजना गेम-चेंजर?
एक ग्रामीण बहन ने सिलाई मशीन पर लोन लेकर आज 10 महिलाओं को रोजगार दिया। ऐसी कहानियां उद्योगिनी की ताकत बयां करती हैं। यह न सिर्फ आर्थिक आजादी देती है, बल्कि परिवार को मजबूत बनाती है। अगर आप उद्यमी बनने का सपना देख रही हैं, तो देर न करें नजदीकी बैंक या पोर्टल से शुरूआत करें। महिला सशक्तिकरण की यह राह अब आपके कदमों में है।