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इंडिया में 35,000 करोड़ रुपये के डिपॉजिट का कोई दावेदार नहीं, जानिए समस्या के हल के लिए सरकार उठा रही क्या कदम

अनक्लेम्ड डिपॉजिट पर दावा पेश करना मुश्किल है। पहला लोगों को अपने डोरमेंट अकाउंट के बारे में पता नहीं है। दूसरा, ऐसे पैसे का ट्रैक रखने वाला कोई सेंट्रलाइज्ड सिस्टम नहीं है। अभी व्यक्ति को अलग-अलग बैंकों की वेबसाइट पर जाना पड़ता है या वित्तीय संस्थाओं से संपर्क करना पड़ता है

Abhishek Anejaअपडेटेड May 11, 2023 पर 6:28 PM
इंडिया में 35,000 करोड़ रुपये के डिपॉजिट का कोई दावेदार नहीं, जानिए समस्या के हल के लिए सरकार उठा रही क्या कदम
फरवरी 2023 के अंत में इन अकाउंट में करीब 35,000 करोड़ रुपये पड़े हुए थे। ये ऐसे अकाउंट्स हैं, जिन्हें 10 साल से ज्यादा समय तक ऑपरेट नहीं किया गया है।

क्या आप जानते हैं कि इंडिया में ऐसा बहुत बड़ा अमाउंट (Unclaimed Deposit) है, जिसका कोई दावेदार नहीं है? यह पैसा अरबों में हैं। यह पैसा बैंकों और वित्तीय संस्थानों में पड़ा हुआ है। इस पैसे को उन लोगों का इंतजार है, जिनका इस पर हक है। अक्सर लोग अपने पुराने बैंक अकाउंट्स, निवेश, शेयर और डिविडेंड को भूल जाते हैं। इसकी कई वजहें हो सकती हैं। 10 साल के बाद यह पैसा अनक्लेम्ड डिपॉजिट बन जाता है। ऐसा ज्यादातर निवेशक की मौत की वजह से होता है। उसके परिवार के सदस्यों को या तो इस निवेश की जानकारी नहीं होती है। कुछ मामलों में व्यक्ति के पैसों पर हक को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच लड़ाई शुरू हो जाती है, जिसका लंबे समय तक कोई समाधान नहीं निकलता है।

10.24 करोड़ अकाउंट्स में 35,000 करोड़ रुपये

हाल में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री भगवंत कराड ने लोकसभा को सरकारी बैंकों के 10.24 करोड़ अकाउंटस RBI को ट्रांसफर करने के बारे में बताया। फरवरी 2023 के अंत में इन अकाउंट में करीब 35,000 करोड़ रुपये पड़े हुए थे। ये ऐसे अकाउंट्स हैं, जिन्हें 10 साल से ज्यादा समय तक ऑपरेट नहीं किया गया है। अनक्लेम्ड इनवेस्टमेंट्स में कई तरह के फाइनेंशियल एसेट्स आते हैं। इनमें बैंक डिपॉजिट्स, शेयर और डिविडेंड्स, म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस पॉलिसीज शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी बैंक डिपॉजिट की है।

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