Uniform Civil Code: यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) उत्तराखंड में लागू हो गया है। इससे उत्तराखंड में रहने वाले लोगों के विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े मसले अब यूसीसी से तय होंगे। इसका मतलब है कि धर्म के आधार पर विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के नियम और कानून अलग-अलग नहीं होंगे। हर धर्म और जाति के लोग यूसीसी के दायरे में आएंगे। सिर्फ अनुसूचित जनजाति अपवाद है। उस पर यूसीसी के नियम और कानून लागू नहीं होंगे। सवाल है कि यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराधिकार के नियम में क्या बदलाव आएंगे, विवाह और तलाक के अब कौन से नियम लागू हो गए हैं, उत्तराखंड का कोई व्यक्ति नौकरी के सिलसिले में दूसरे राज्य में रहता है तो उस पर क्या यूसीसी लागू होगा, अगर दूसरे राज्य के व्यक्ति की प्रॉपर्टी उत्तराखंड में है तो क्या उस पर नियम लागू होंगे?
संपत्ति में हिस्सेदारी के कानून बदल गए हैं
उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने से पहले हिंदू के उत्तराधिकार से जुड़े मसले हिंदू सक्सेशन एक्ट 1956 के तहत तय होते थे। ईसाई के उत्तराधिकार के मामले इंडियन सक्सेशन एक्ट 1925 के तहत तय होते थे। मुस्लिम के मामले में पर्सनल लॉ लागू होते थे। यूसीसी लागू होने के बाद धर्म के हिसाब से अलग-अलग एक्ट लागू नहीं होंगे। सभी धर्मों को मानने वाले लोगों के उत्तराधिकार के मसले एक जैसे कानून के हिसाब से तय होंगे।
इन लोगों पर भी लागू होगा यूसीसी
यूसीसी ऐसे हर व्यक्ति पर लागू होगा, जो उत्तराखंड में पिछले 15 साल से रह रहा है। अगर कोई व्यक्ति या परिवार उत्तराखंड का निवासी है, लेकिन नौकरी या व्यापार के सिलसिले में दूसरे राज्य में रहता है तो भी उस पर यूसीसी लागू होगा। उत्तराखंड में रहने वाला कोई व्यक्ति अगर राज्य या केंद्र सरकार की किसी स्कीम का लाभ उठा रहा है तो उत्तराखंड के बाहर का निवासी होने का बावजूद उस पर यूसीसी लागू होगा।
उत्तराधिकार के मामलों पर यूसीसी लागू होने से बड़ा असर पड़ेगा। हिंदू के लिए उत्तराधिकार के जो पहले के नियम थे, उसमें पुश्तैनी संपत्ति और खुद कमाई गई संपत्ति में फर्क किया गया था। यूसीसी में यह फर्क खत्म हो गया है। इसका मतलब यह है कि संपत्ति चाहे माता-पिता, दादा-दादी की हो या खुद कमाई गई हो, उस पर उत्तराधिकार के एक जैसे नियम लागू होंगे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस फर्क के खत्म होने से संपत्ति में अधिकार तय करने में आसानी होगी।
संपत्ति के मामले में भेदभाव खत्म
मुस्लिम के मामले में उत्तराधिकार के पहले के नियम में पुरुष और स्त्री के आधार पर भेद किया जाता था। संपत्ति में अधिकार के मामले में पुरुष का पलड़ा भारी था। पुरुषों को स्त्रियों के मामले में संपत्ति में ज्यादा हिस्सा मिलता था। यूसीसी के तहत यह फर्क खत्म हो गया है। अब मुस्लिम में संपत्ति के बंटवारे में परिवार के पुरुष और महिला सदस्य को बराबर हिस्सा मिलेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे महिलाओं को काफी फायदा होगा। पहले वे चाहकर भी इसका विरोध नहीं कर सकती थीं।
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