UPI MDR Charges: सरकार UPI के चुनिंदा ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की 15 अक्टूबर की तारीख को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, तय तारीख से ही नया सिस्टम लागू होगा। हालांकि, MDR पर लगने वाले 18% GST को लेकर GST काउंसिल समीक्षा कर सकती है।
7 अक्टूबर की बैठक में क्या होगा?
MDR पर GST का मुद्दा फिलहाल 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक के एजेंडे में नहीं है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान काउंसिल इस मुद्दे को उठा सकती है। यानी अभी यह तय नहीं है कि GST पर कोई फैसला होगा या नहीं।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब कारोबारियों के बीच MDR को लेकर चिंता है। उनका मानना है कि इससे मर्चेंट्स पर लागत बढ़ सकती है। साथ ही, पूरे UPI ट्रांजैक्शन सिस्टम की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है।
सरकार क्यों ला रही है MDR?
सरकार ने MDR लागू करने का बचाव किया है। सरकार का कहना है कि UPI इकोसिस्टम को चलाने में काफी खर्च होता है। मौजूदा MDR उस पूरी लागत की भरपाई नहीं करता।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि UPI पर MDR से इकोसिस्टम को बनाए रखने की लागत की 100% भरपाई नहीं होती। सरकार के मुताबिक, UPI ट्रांजैक्शन बढ़ने के साथ टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की जरूरत भी बढ़ रही है।
₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR
नए सिस्टम के तहत ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। हालांकि, एक ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी।
MDR की दरें Indian Banks' Association (IBA) ने संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद तय की हैं। यानी इस दर को तय करने की प्रक्रिया में अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स से सलाह ली गई है।
ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा कोई चार्ज
सरकार ने साफ किया है कि UPI से पेमेंट करने वाले ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। यानी आम ग्राहक पहले की तरह UPI के जरिए पेमेंट कर सकेंगे।
वहीं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन भी फ्री रहेंगे। नया MDR चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।