केंद्र सरकार ने 24 अगस्त को एंप्लॉयीज के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) का ऐलान किया। एंप्लॉयीज लंबे समय से रिटायरमेंट के बाद अपनी पेंशन इनकम पर गारंटी की मांग कर रहे थे। यूपीएस का फायदा सिर्फ उन एंप्लॉयीज को मिलेगा जो अभी नए पेंशन सिस्टम (एनपीएस) का हिस्सा हैं। रिटायर हो चुके एनपीएस के सब्सक्राइबर्स भी इसमें शामिल होंगे। सवाल है कि क्या आपको एनपीएस से यूपीएस में स्विच करना चाहिए?
क्या आपको यूपीएस में स्विच करना चाहिए?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एनपीएस (NPS) से यूपीएस (UPS) में स्विच करना चाहिए या नहीं, यह एंप्लॉयीज के लक्ष्य पर निर्भर करेगा। कुछ एंप्लॉयीज शेयर मार्केट (Stock Markets) जैसे रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं, जबकि कुछ एंप्लॉयीज गारंटीड पेंशन (Guaranteed Pension) पंसद कर सकते हैं। वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार ने कहा, "अगर आपको इंडिया की ग्रोथ स्टोरी में भरोसा है और आपके रिटायरमेंट में कई साल बचे हैं तो आपके लिए NPS में बने रहना फायदेमंद होगा। अगर आपको पता है कि शेयर बाजार कैसे काम करता है और आपके रिटायर होने में कम से कम 10-20 साल बाकी हैं तो एनपीएस में काफी ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता है।"
क्या आप गारंटीड पेंशन इनकम चाहते हैं?
लैडर7वेल्थ प्लैनर्स के सीईओ सुरेश सदगोपन का कहना है कि UPS का सबसे बड़ा अट्रैक्शन गांरटीड इनकम है। सरकार ने कहा है कि यूपीएस में एंप्लॉयीज को उसके अंतिम 12 महीनों की औसत बेसिक सैलरी का 50 फीसदी पेंशन मिलेगी। कई सरकारी एंप्लॉयीज के लिए यह बड़ा अमाउंट हो सकता है। उन्होंन कहा, "NPS के सब्सक्राइबर्स UPS में स्विचर करने पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि इससे रिटायरमेंट के बाद अपनी लाइफस्टाइल के लिए पर्याप्त पेंशन मिलती रहेगी।"
क्या UPS और OPS में फर्क है?
यह समझना जरूरी है कि UPS में भले ही पेंशन की गांरटी है, लेकिन यह OPS यानी ओल्ड पेंशन स्कीम से अलग है। यूपीएस पूरी तरह से फंडेड स्कीम है। इसमें एंप्लॉयीज को अपनी बेसिक सैलरी और डीए का 10 फीसदी कंट्रिब्यूट करना होगा। एंप्लॉयर यानी सरकार 18.5 फीसदी कंट्रिब्यूट करेगी। यह एनपीएस में सरकार के 14 फीसदी कंट्रिब्यूशन से ज्यादा है।
OPS में एंप्लॉयीज इस फंड में कंट्रिब्यूट नहीं करते हैं, हालांकि वे जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) में कंट्रिब्यूट करते हैं। इंटरेस्ट के साथ यह पैसा रिटायरमेंट के वक्त एंप्लॉयीज को दे दिया जाता है। OPS के डिफाइंड पेंशन स्कीम है, जो एंप्लॉयीज को मिलने वाली अंतिम सैलरी पर आधारित है। मर्सर कंसल्टिंग की इंडिय बिजनेस लीडर प्रीति चंद्रशेखर ने कहा, "यूपीएस जैसे इनफ्लेशन लिंक्ड स्कीम में एंप्लॉयीज के लिए इंटरेस्ट रेट और longevity risk घट जाता है, क्यों इसका बोझ सरकार उठाती है।"
यूपीएस में सरकार और एंप्लॉयीज दोनों का कंट्रिब्यूशन होगा
यूपीएस के बारे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि चूंकि यह डिफाइंड बेनेफिट और डिफाइंड कंट्रिब्यूशन स्कीम का मिक्स है, जिससे कॉर्पस का प्रबंधन काफी ध्यानपूर्वक करना होगा। UPS में एंप्लॉयर (सरकार) और एंप्लॉयीज दोनों को कंट्रिब्यूट करना होगा। सरकार के 18.5 फीसदी कंट्रिब्यूशन में से 8.5 फीसदी एक अलग फंड में जाएगा, जिसे गारंटी रिजर्व फंड कहा जाएगा।
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एक बार यूपीएस में स्विच करने पर वापस एनपीएस में जाने का विकल्प नहीं
सरकार आने वाले दिनों में यूपीएस के बारे में ज्यादा जानकारी देगी, जिससे उन्हें यह फैसला लेने में मदद मिलेगी कि इसमें उन्हें स्विच करना चाहिए या नहीं। यूपीएस एंप्लॉयीज के लिए एक विकल्प है। वर्तमान और नए एंप्लॉयीज के पास एनपीएस और यूपीएस में से किसी एक चुनाव करने का विकल्प होगा। सरकार ने कहा है कि एक बार सेलेक्ट करने के बाद उसमें बदलाव नहीं होगा।