आम आदमी को लगने वाला है बड़ा झटका! मानसून की सुस्ती से दूध, दाल और टमाटर बिगाड़ेंगे आपका बजट; समझें पूरा गणित

Monsoon Impact on Food Prices: देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार अभी भी सुस्त है। मानसून की इस बेरुखी का सीधा असर अब आपकी जेब और रसोई के बजट पर पड़ने वाला है। डेयरी इंडस्ट्री के दिग्गजों और कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर जुलाई और अगस्त में भी बारिश सामान्य से कम रही, तो दूध, दालों और हरी सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। समझिए कमजोर मानसून आपके घर के राशन के बिल को कैसे बिगाड़ सकता है

अपडेटेड Jun 30, 2026 पर 4:02 PM
अगर जुलाई और अगस्त में भी बारिश सामान्य से कम रही, तो दूध, दालों और हरी सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है

Monsoon Impact on Food Prices: जून का महीना बीतने को है, लेकिन देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार अभी भी सुस्त है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, इस साल जून से सितंबर के दौरान औसत से कम बारिश होने की 84 फीसदी आशंका है। मानसून की इस बेरुखी का सीधा असर अब आपकी जेब और रसोई के बजट पर पड़ने वाला है।

डेयरी इंडस्ट्री के दिग्गजों और कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर जुलाई और अगस्त में भी बारिश सामान्य से कम रही, तो दूध, दालों और हरी सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। आइए समझते हैं कि कमजोर मानसून आपके घर के राशन के बिल को कैसे बिगाड़ सकता है।

दूध की कीमतें: जुलाई-अगस्त में 4% तक और बढ़ सकते हैं दाम


मई के महीने में अमूल और मदर डेयरी जैसी बड़ी कंपनियों ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। अब जुलाई या अगस्त में आम जनता को दूध का एक और झटका लग सकता है।

पराग मिल्क फूड्स के चेयरमैन देवेंद्र शाह के मुताबिक, दूध की कीमतें पहले ही 2-3 फीसदी बढ़ चुकी हैं। अगर मुख्य दूध उत्पादक राज्यों में बारिश कम होती है, तो हरे चारे और पशु आहार की भारी कमी हो जाएगी।

चारे की कमी से डेयरी किसानों की लागत बढ़ेगी, जिससे कंपनियां दूध के दाम 3 से 4 फीसदी तक और बढ़ा सकती हैं। इसका सीधा असर दही, पनीर, छाछ, मक्खन और घी की कीमतों पर भी पड़ेगा।

दालें और सब्जियां: थाली से गायब हो सकता है स्वाद

कमजोर मानसून का सबसे बड़ा झटका खरीफ फसलों की बुआई को लगा है। 25 जून 2026 तक देश में फसलों की बुआई पिछले साल के मुकाबले करीब 23 फीसदी कम हुई है।

अरहर (तुअर) और उड़द जैसी दालें पूरी तरह से मानसून की बारिश पर निर्भर करती हैं। बारिश में देरी के कारण बुआई पिछड़ गई है, जिससे आने वाले दिनों में दालों की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

टमाटर, प्याज और अन्य हरी सब्जियों की सप्लाई चेन थोड़ी सी भी कम बारिश से प्रभावित हो जाती है। खेतों में पानी की कमी से उत्पादन घटेगा और मंडियों में आवक कम होने से खुदरा दाम बढ़ेंगे।

सोयाबीन और मक्का जैसी तिलहन फसलों की बुआई भी सुस्त है, जिससे आने वाले समय में खाने के तेल की कीमतों पर भी दबाव दिख सकता है।

कैसा है महंगाई का मौजूदा हाल

सरकारी आंकड़ों (MoSPI) के अनुसार, मई के महीने में खुदरा महंगाई दर भले ही 3.93 फीसदी रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई दर 4.78 फीसदी के उच्च स्तर पर थी। पीडब्ल्यूसी इंडिया के एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अल नीनो (El Niño) का असर सर्दियों तक खिंचा, तो खरीफ के साथ-साथ गेहूं जैसी रबी की फसलों पर भी इसका असर दिख सकता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा।

यानी कुल मिलाकर, आपकी रसोई का बजट अब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि जुलाई और अगस्त के बचे हुए दो महीनों में मानसून देश को कितना भिगोता है।

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