भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि मुश्किल समय का सबसे भरोसेमंद सहारा माना जाता है। यही वजह है कि ज्यादातर परिवार सोने को निवेश के रूप में रखते हैं। जरूरत पड़ने पर लोग आमतौर पर सोना गिरवी रखकर बैंक से लोन लेते हैं। बाद में ब्याज सहित पैसा चुकाकर अपना सोना वापस ले लेते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सोने से पैसे लेने का एक और तरीका भी है, जिसे गोल्ड ओवरड्राफ्ट कहा जाता है। यह पारंपरिक गोल्ड लोन से थोड़ा अलग और कई मामलों में ज्यादा बेहतर होता है।
क्या है गोल्ड ओवरड्राफ्ट?
गोल्ड ओवरड्राफ्ट में बैंक या फाइनेंशियल संस्थान आपके सोने के बदले एक ओवरड्राफ्ट अकाउंट खोलते हैं। इसमें एक तय लिमिट तक पैसा मंजूर किया जाता है, लेकिन आपको पूरा पैसा एक साथ लेना जरूरी नहीं होता।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
मान लीजिए आपके सोने के बदले बैंक ने आपको 2 लाख रुपये की ओवरड्राफ्ट लिमिट दी। अगर आप पूरा 2 लाख रुपये नहीं लेते और सिर्फ 50,000 रुपये ही निकालते हैं। तो आपको ब्याज भी सिर्फ 50,000 रुपये पर ही देना होगा, न कि पूरे 2 लाख रुपये पर देना होगा। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
जितना पैसा इस्तेमाल करें, उतने पर ही ब्याज देना होगा। आप अपनी जरूरत के हिसाब से बार-बार पैसा निकाल सकते हैं। कैश फ्लो मैनेज करना आसान होगा। इमरजेंसी में तुरंत फंड मिल जाएगा।
पारंपरिक गोल्ड लोन से कैसे अलग?
सामान्य गोल्ड लोन में पूरा पैसा एक बार में मिलता है और उसी पर ब्याज देना पड़ता है, चाहे आप उसे इस्तेमाल करें या नहीं। वहीं, ओवरड्राफ्ट में फ्लेक्सिबिलिटी ज्यादा होती है। गोल्ड ओवरड्राफ्ट सुविधा उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है, जिन्हें बार-बार छोटी-छोटी रकम की जरूरत पड़ती है। यह एक स्मार्ट तरीका है, जिससे आप अपने सोने की वैल्यू का सही इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही अनावश्यक ब्याज से बच सकते हैं।