Loan Settlement और Loan Closure में क्या है फर्क? जानिए क्रेडिट स्कोर पर इनके 5 अहम असर

Loan Settlement का क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर होता है क्योंकि इसमें पूरा लोन नहीं चुकाया जाता और इसे क्रेडिट रिपोर्ट में "Settled" के रूप में दिखाया जाता है। इससे भविष्य में नए लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना मुश्किल हो जाता है।

अपडेटेड Oct 28, 2025 पर 5:52 PM
Story continues below Advertisement

लोन सेटलमेंट और लोन क्लोजर वित्तीय जिंदगी में अकसर भटकाव ला सकते हैं, खासकर तब जब क्रेडिट स्कोर की बात आती है। जबकि लोन सेटलमेंट तब होता है जब कोई कर्जदार पूरा लोन चुकाने में असमर्थ होकर बैंक से बातचीत कर आंशिक रकम देकर समझौता करता है, लोन क्लोजर तब माना जाता है जब पूरा कर्ज समय पर या एकमुश्त चुकाया जाता है।

भुगतान की राशि का फर्क

पहला फर्क है भुगतान की राशि का। लोन सेटलमेंट में बैंक से बातचीत के बाद बकाया रकम का एक हिस्सा ही चुकाया जाता है, जबकि लोन क्लोजर में पूरी रकम दी जाती है।

क्रेडिट स्कोर का फर्क


दूसरा बड़ा अंतर क्रेडिट स्कोर पर पड़ने वाले प्रभाव का है। सेटलमेंट का प्रभाव नकारात्मक होता है और आपके क्रेडिट रिपोर्ट में इसे ‘Settled’ के रूप में दिखाया जाता है, जो भविष्य में लोन लेने में बाधा बन सकता है। वहीं, क्लोजर का असर सकारात्मक होता है और यह ‘Closed’ के तौर पर दर्ज होता है, जो आपकी वित्तीय जिम्मेदारी को दर्शाता है।

लोन मिलने की संभावना का फर्क

तीसरा महत्वपूर्ण घटक है भविष्य में लोन मिलने की संभावना। लोन सेटलमेंट के बाद बैंक और वित्तीय संस्थान इसे रिस्क मानते हैं, जिससे नए लोन या क्रेडिट कार्ड की मंजूरी मुश्किल हो जाती है। इसके विपरीत, लोन क्लोजर से आपकी क्रेडिटवर्थनेस बेहतर होती है और आगे सुविधा मिलना आसान होता है।

दस्तावेजों का फर्क

चौथा फर्क दस्तावेजों का होता है; सेटलमेंट में आपको बैंक से सेटलमेंट एग्रीमेंट लेना पड़ता है जबकि क्लोजर के बाद बैंक ‘No Objection Certificate’ या ‘Loan Closure Certificate’ जारी करता है।

पेनल्टी का असर

अंतिम रूप में, सेटलमेंट और क्लोजर में लागत और चार्जेज भी अलग होते हैं। सेटलमेंट पर पेनल्टी या टैक्स इम्पैक्ट हो सकता है, वहीं क्लोजर में फोरक्लोजर चार्ज लगता है लेकिन क्रेडिट स्कोर पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए, वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर समझदारी से फैसला लेना चाहिए। लोन क्लोजर आपके क्रेडिट स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है, जबकि सेटलमेंट सिर्फ अस्थायी राहत दे सकता है लेकिन दीर्घकालिक हानि पहुंचा सकता है।

इसलिए, जब भी कर्ज से जुड़ी परिस्थितियां संभालनी हों, विशेषज्ञ सलाह लेकर और सभी विकल्पों पर विचार कर, सही चुनाव करें ताकि आपकी क्रेडिट रिपोर्ट साफ-सुथरी और विश्वासयोग्य बनी रहे।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।