आज के दौर में जब हर दूसरा निवेशक म्यूचुअल फंड को अपनी बचत का सबसे आसान और सुरक्षित विकल्प मान रहा है, वहीं PGIM इंडिया की ताज़ा स्टडी ने एक अहम सच्चाई सामने रखी है। यह रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ पिछले परफॉर्मेंस देखकर निवेश करना निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
स्टडी के मुताबिक, कई बार जो फंड एक साल में टॉप परफॉर्मर होते हैं, वे अगले ही साल या दो साल में अपनी चमक खो देते हैं। उदाहरण के तौर पर, 2014 का टॉप फंड 2016 में 128वें स्थान पर पहुंच गया, जबकि उस साल का दूसरा नंबर वाला फंड 141वें स्थान पर गिर गया। यानी निवेशकों को यह समझना होगा कि बाजार में उतार-चढ़ाव लगातार चलते रहते हैं और किसी भी फंड का प्रदर्शन स्थायी नहीं होता।
PGIM इंडिया ने यह भी बताया कि रोलिंग रिटर्न और डायवर्सिफिकेशन ही असली मंत्र है। रोलिंग रिटर्न से निवेशक यह समझ सकते हैं कि लंबे समय में फंड का प्रदर्शन कैसा रहा है, न कि सिर्फ किसी एक साल का। वहीं डायवर्सिफिकेशन यानी अलग-अलग सेक्टर और कैटेगरी में निवेश करना जोखिम को कम करता है।
स्टडी में मिडकैप फंड्स का उदाहरण दिया गया है, जहां 2024 में टॉप और बॉटम फंड्स के बीच 45% का अंतर देखा गया। यह अंतर बताता है कि अगर निवेशक सिर्फ “बेस्ट परफॉर्मिंग” फंड चुनते हैं, तो वे अगले साल बड़े घाटे का सामना कर सकते हैं।
कहानी को और मानवीय बनाने के लिए रिपोर्ट में एक निवेशक “अंकित” का जिक्र है। अंकित ने शुरुआत में पिछले परफॉर्मेंस देखकर निवेश किया और सोचा कि पैसा अपने आप बढ़ेगा। लेकिन धीरे-धीरे उसका रिटर्न कम होता गया। उसे समझ नहीं आया कि गलती कहां हुई। यही वह जगह है जहां PGIM इंडिया की स्टडी निवेशकों को जागरूक करती है सिर्फ चमक देखकर निवेश करना खतरनाक है, समझदारी है सही फॉर्मूला अपनाना है।