आजकल डेबिट-क्रेडिट कार्ड क्लोनिंग फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां ठग असली कार्ड की डिटेल चुराकर नकली कार्ड बना लेते हैं और खाते से पैसे उड़ा देते हैं। स्किमर डिवाइस से मैग्नेटिक स्ट्रिप या चिप डेटा कॉपी कर एटीएम, पॉस मशीन या ऑनलाइन साइट्स पर फ्रॉड करते हैं। लाखों रुपये का नुकसान होने के केस सामने आ रहे हैं, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है ।
क्लोनिंग कैसे होती है
अपराधी एटीएम या पेट्रोल पंप पर स्किमिंग डिवाइस लगाते हैं, जो कार्ड स्वाइप करते ही डेटा चुरा लेता है। छोटे कैमरे पिन रिकॉर्ड करते हैं, फिर ब्लैंक कार्ड पर डेटा ट्रांसफर कर क्लोन तैयार। रेस्टोरेंट में वेटर मोबाइल स्किमर इस्तेमाल करते हैं या फिशिंग साइट्स से ऑनलाइन डिटेल चुराई जाती है। पब्लिक वाई-फाई पर ट्रांजेक्शन सबसे जोखिम भरा होता है ।
प्रमुख खतरे और पहचान के संकेत
अचानक खाते से अनजान ट्रांजेक्शन, छोटी-छोटी खरीदारी या विदेशी लेनदेन क्लोनिंग का अलर्ट हैं। मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले पुराने कार्ड ज्यादा असुरक्षित, चिप-रूप आधारित ईएमवी ज्यादा सुरक्षित। फ्रॉड साइबर क्रिमिनल्स द्वारा डेटा ब्रीच या मैलवेयर से भी फैलता है।
सुरक्षा के आसान उपाय
एटीएम पर कार्ड स्लॉट हिलाएं, अगर ढीला लगे तो न इस्तेमाल करें हमेशा चिप साइड यूज करें। ऑनलाइन शॉपिंग के लिए वर्चुअल कार्ड या टोकनाइजेशन चुनें, पिन कभी न शेयर करें। बैंक ऐप पर ट्रांजेक्शन अलर्ट ऑन रखें, संदिग्ध एक्टिविटी पर तुरंत ब्लॉक करवाएं। नियमित क्रेडिट स्कोर चेक करें और दो-चरणीय प्रमाणीकरण यूज करें ।
बैंकों ने जीरो लायबिलिटी पॉलिसी लागू की है, जहां 3 दिन में शिकायत पर नुकसान नहीं होता। जागरूकता से 90% फ्रॉड रोके जा सकते हैं। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।
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