ITR Filing Rules: सैलरी, एक घर और ₹1.25 लाख से ज्यादा का म्यूचुअल फंड प्रॉफिट? जानिए इस साल आपको कौन सा ITR फॉर्म भरना होगा
ITR 1 vs ITR 2 Eligibility Criteria: बजट के नए नियमों के तहत अब ₹1.25 लाख तक का LTCG पूरी तरह टैक्स-फ्री है। यानी जब तक आपका मुनाफा टैक्स छूट के दायरे में है, तब तक आप ITR-1 का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन जैसे ही आपके मुनाफे पर 12.5% का LTCG टैक्स लगना शुरू होगा, आपको अनिवार्य रूप से ITR-2 ही चुनना होगा
इस साल सरकार ने छोटे निवेशकों को राहत देते हुए आसान फॉर्म यानी ITR-1 (सहज) के नियमों में ढील दी है
Which ITR Form to File for Equity Gains: टैक्स फाइलिंग का सीजन आते ही नौकरीपेशा लोगों के मन में सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यही होता है कि उन्हें कौन सा आईटीआर (ITR) फॉर्म चुनना चाहिए। अगर आपकी इनकम सैलरी से है, आपके पास एक घर है और इस साल आपको इक्विटी म्यूचुअल फंड या शेयरों से ₹1.25 लाख से ज्यादा का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) हुआ है, तो आपके लिए सही फॉर्म कौन सा होगा?
इसका सीधा और सटीक जवाब है ITR-2। वैसे तो इस साल सरकार ने छोटे निवेशकों को राहत देते हुए आसान फॉर्म यानी ITR-1 (सहज) के नियमों में ढील दी है, लेकिन ₹1.25 लाख की इस सीमा को पार करते ही आपके लिए नियम बदल जाते हैं। आइए समझते हैं इनकम टैक्स के इस नए गणित को।
₹1.25 लाख का वो नियम, जो तय करता है आपका ITR फॉर्म
असेसमेंट ईयर 2026-27 (AY 2026-27) के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आईटीआर फॉर्म्स में कुछ बड़े बदलाव किए हैं।
ITR-1 (सहज) कब भर सकते हैं: नए नियमों के मुताबिक, अगर आपको शेयर बाजार या इक्विटी म्यूचुअल फंड (सेक्शन 112A) से एक साल में अधिकतम ₹1.25 लाख तक का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स हुआ है, तो आप ITR-1 भर सकते हैं। बशर्ते आपका कोई पुराना कैपिटल लॉस यानी घाटा फॉरवर्ड न हुआ हो।
ITR-2 की जरूरत कब पड़ती है: जैसे ही आपका यह मुनाफा ₹1.25 लाख की लिमिट को पार करता है, आप ITR-1 भरने के योग्य नहीं रह जाते। इनकम टैक्स पोर्टल के मुताबिक, इस लिमिट से ₹1 भी ऊपर होने पर आपको पूरा ब्योरा ITR-2 में देना होगा, जहां आपको 'Schedule CG' (कैपिटल गेन्स शेड्यूल) के तहत पूरी डिटेल भरनी पड़ती है।
बजट के नए नियमों के तहत अब ₹1.25 लाख तक का LTCG पूरी तरह टैक्स-फ्री है। यानी जब तक आपका मुनाफा टैक्स छूट के दायरे में है, तब तक आप ITR-1 का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन जैसे ही आपके मुनाफे पर 12.5% का LTCG टैक्स लगना शुरू होगा, आपको अनिवार्य रूप से ITR-2 ही चुनना होगा।
इस साल ITR-1 (सहज) में क्या-क्या बदला है?
30 मार्च 2026 को नोटिफाई किए गए नए फॉर्म्स के मुताबिक, छोटे निवेशकों और टैक्सपेयर्स के लिए ITR-1 को पहले से काफी ज्यादा मददगार बनाया गया है। इसमें दो बड़े बदलाव हुए हैं:
म्यूचुअल फंड/शेयर मुनाफे की एंट्री: जैसा कि ऊपर बताया गया, अब ₹1.25 लाख तक के टैक्स-फ्री मुनाफे को सीधे ITR-1 में दिखाया जा सकता है, जिसके लिए पहले भारी-भरकम ITR-2 भरना पड़ता था।
दो घरों से होने वाली कमाई: पहले अगर आपके पास एक से ज्यादा घर होते थे, तो आपको ITR-2 भरना पड़ता था। लेकिन अब नए नियम के तहत, अगर आपके पास दो घर हैं, तो भी आप उनसे होने वाली कमाई को ITR-1 में ही रिपोर्ट कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक घर जिसमें आप खुद रहते हैं और दूसरा जिसे आपने किराये पर दिया है, दोनों की जानकारी अब आसानी से ITR-1 में आ जाएगी।
ITR-1 भरने की बाकी शर्तें
अगर आप ITR-1 भरना चाहते हैं, तो ऊपर दिए गए बदलावों के अलावा ये पुरानी शर्तें भी पूरी होनी चाहिए:
आप भारत के निवासी होने चाहिए।
आपकी कुल सालाना कमाई ₹50 लाख तक होनी चाहिए।
आपकी कमाई का जरिया सिर्फ सैलरी, हाउस प्रॉपर्टी, खेती (₹5000 तक) और अन्य स्रोत जैसे- बैंक ब्याज होना चाहिए।
आपके पास कोई बिजनेस इनकम, शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG), या विदेशी संपत्ति नहीं होनी चाहिए और आप किसी कंपनी में डायरेक्टर नहीं होने चाहिए।
इन परिस्थितियों में सीधे चुनें ITR-2
अगर आपके पास सैलरी इनकम और घर है, लेकिन इसके साथ ही नीचे दी गई कोई भी एक स्थिति बनती है, तो बिना कन्फ्यूजन के ITR-2 फाइल करें:
इक्विटी या म्यूचुअल फंड से ₹1.25 लाख से अधिक का लॉन्ग-टर्म मुनाफा (LTCG)।
शेयरों या म्यूचुअल फंड से किसी भी तरह का शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG)।
प्रॉपर्टी (जमीन/मकान), सोना या डेट फंड बेचने से हुआ कोई भी मुनाफा।
पिछले सालों का कोई भी नुकसान जिसे आप इस साल के मुनाफे से एडजस्ट करना चाहते हैं।
टैक्स फाइल करने से पहले अपने AIS और म्यूचुअल फंड हाउस से मिलने वाले कैपिटल गेन स्टेटमेंट को ध्यान से जरूर चेक कर लें।