भारत में पर्सनल फाइनेंस की दुनिया में एक आम धारणा है कि अगर आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे ऊपर है, तो लोन आसानी से मिल जाएगा। लेकिन हकीकत इससे अलग है। हाल ही में कई मामलों में देखा गया है कि अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले लोगों को भी बैंक और NBFCs ने लोन देने से मना कर दिया। यह स्थिति लोगों को हैरान करती है, क्योंकि वे मानते हैं कि स्कोर ही सबसे बड़ा फैक्टर है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, क्रेडिट स्कोर सिर्फ एक पैरामीटर है, लेकिन लोन अप्रूवल के लिए बैंक कई अन्य पहलुओं को भी देखते हैं। इनमें शामिल हैं:
- आय और नौकरी की स्थिरता: अगर आपकी आय अस्थिर है या नौकरी बार-बार बदलते हैं, तो बैंक आपको जोखिमपूर्ण मान सकते हैं।
- मौजूदा EMI और कर्ज: अगर पहले से आपके ऊपर कई लोन या क्रेडिट कार्ड का बोझ है, तो नया लोन मिलने की संभावना कम हो जाती है।
- बैंक की आंतरिक नीतियां: हर बैंक की अपनी जोखिम नीति होती है। कभी-कभी पोर्टफोलियो बैलेंस बनाए रखने के लिए भी अच्छे स्कोर वाले ग्राहकों को रिजेक्ट कर दिया जाता है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि कई बार प्रोफाइल मिसमैच भी रिजेक्शन का कारण बनता है। उदाहरण के लिए, अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है लेकिन आपकी आय उस लोन अमाउंट को सपोर्ट नहीं करती, तो बैंक आवेदन खारिज कर देता है।
इसके अलावा, डॉक्यूमेंटेशन की कमी, गलत जानकारी, या पुराने डिफॉल्ट्स भी रिजेक्शन का कारण बन सकते हैं। भले ही आपने बाद में सुधार कर लिया हो, लेकिन बैंक आपके पूरे क्रेडिट इतिहास को देखते हैं।
अच्छा क्रेडिट स्कोर होना जरूरी है, लेकिन यह लोन अप्रूवल की गारंटी नहीं है। बैंक और NBFCs आपकी आय, नौकरी की स्थिरता, मौजूदा कर्ज और अपनी आंतरिक नीतियों को ध्यान में रखकर फैसला लेते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले सिर्फ स्कोर पर भरोसा न करें, बल्कि अपनी पूरी वित्तीय प्रोफाइल को मजबूत बनाएं।