PPF में ज्यादा रिटर्न चाहते हैं? तारीख का ध्यान रखकर निवेश करेंगे तो मिलेगा ज्यादा फायदा
PPF में निवेश का समय भी आपके रिटर्न पर असर डालता है। हर महीने खास तारीख से पहले पैसा जमा करने पर ज्यादा ब्याज मिल सकता है। जानिए PPF का ये अहम नियम, 15 साल में संभावित रिटर्न और निवेश से जुड़ी जरूरी बातें।
फिलहाल PPF पर 7.1 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) देश की सबसे लोकप्रिय बचत योजनाओं में से एक है। ज्यादातर लोग इसमें टैक्स बचाने के लिए निवेश करते हैं। लेकिन, इसे सिर्फ सरकारी गारंटी वाली टैक्स बचाने वाली योजना समझना गलत है। यह लंबे समय में अच्छी बचत बनाने और टैक्स फ्री रिटर्न पाने का भी एक आसान तरीका है। हालांकि, कई निवेशक एक छोटी सी बात पर ध्यान नहीं देते। इसकी वजह से उन्हें मिलने वाला ब्याज कम हो सकता है।
हर महीने 5 तारीख क्यों है महत्वपूर्ण?
PPF में ब्याज का कैलकुलेशन हर महीने 5 तारीख और महीने के आखिरी दिन के बीच खाते में मौजूद सबसे कम बैलेंस के आधार पर होती है। इसलिए अगर आप किसी महीने की 5 तारीख या उससे पहले पैसा जमा कर देते हैं, तो उस रकम पर उसी महीने से ब्याज मिलना शुरू हो जाता है। लेकिन अगर पैसा 5 तारीख के बाद जमा किया जाता है, तो उस पर ब्याज अगले महीने से जुड़ता है।
पहली नजर में यह अंतर बहुत छोटा लग सकता है। लेकिन PPF जैसी 15 साल की योजना में यही छोटी सी सावधानी बड़ा फर्क पैदा कर सकती है। लंबे समय में आपको ज्यादा ब्याज मिलता है और कंपाउंडिंग का फायदा भी बेहतर तरीके से मिलता है।
अप्रैल में निवेश पर ज्यादा फायदा
PPF में एक वित्त वर्ष के दौरान अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है। अगर किसी निवेशक के पास पर्याप्त पैसा है, तो वह अप्रैल में ही पूरी रकम जमा कर सकता है। ऐसा करने पर पूरी रकम पूरे साल ब्याज कमाती है। इससे निवेश पर मिलने वाला कुल रिटर्न बढ़ जाता है।
हालांकि, ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए हर महीने निवेश करना ज्यादा सुविधाजनक होता है। ऐसे निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपनी किस्त 5 तारीख से पहले जमा करें।
अनजाने में करते हैं ये गलती
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कई लोग हर महीने 5 तारीख के बाद पैसा जमा करते हैं और अनजाने में अपने रिटर्न को कम कर लेते हैं। कुछ निवेशक सालाना न्यूनतम निवेश की शर्त भी भूल जाते हैं। वहीं कई लोगों को यह गलतफहमी रहती है कि PPF की ब्याज दर पूरे 15 साल तक एक जैसी बनी रहती है।
इन गलतियों से बचने के लिए ऑटो-डेबिट या स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे निवेश समय पर होता रहता है और ब्याज का नुकसान भी नहीं होता।
PPF के जरूरी नियम
PPF एक लंबी अवधि की बचत योजना है। इसमें 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। यानी निवेश की गई रकम को पूरी तरह निकालने के लिए 15 साल तक इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, कुछ शर्तों के साथ सातवें वित्त वर्ष से आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है।
इस योजना में सालाना कम से कम 500 रुपये जमा करना जरूरी है। वहीं एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक ही निवेश किया जा सकता है।
ब्याज दर हमेशा एक जैसी नहीं रहती
फिलहाल PPF पर 7.1 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है। लेकिन यह दर स्थायी नहीं होती। सरकार हर तिमाही इसकी समीक्षा करती है और जरूरत पड़ने पर इसमें बदलाव कर सकती है। इसलिए आने वाले वर्षों में ब्याज दर बढ़ भी सकती है और घट भी सकती है।
15 साल में कितनी रकम बन सकती है?
मौजूदा ब्याज दर के आधार पर अगर कोई व्यक्ति 15 साल तक हर महीने 5,000 रुपये जमा करता है, तो उसके पास मैच्योरिटी पर करीब 15 से 16 लाख रुपये की टैक्स फ्री रकम हो सकती है। अगर मासिक निवेश 10,000 रुपये कर दिया जाए, तो यह रकम 30 लाख रुपये से ज्यादा पहुंच सकती है।
वहीं जो निवेशक हर साल 1.5 लाख रुपये की पूरी सीमा तक निवेश करते हैं, उनके पास 15 साल बाद 40 लाख रुपये से ज्यादा की रकम जमा हो सकती है। हालांकि, वास्तविक रिटर्न भविष्य में ब्याज दरों में होने वाले बदलाव पर भी निर्भर करेगा।
15 साल बाद भी जारी रख सकते हैं खाता
PPF की एक बड़ी खासियत यह है कि 15 साल की अवधि पूरी होने के बाद भी खाता बंद करना जरूरी नहीं होता। निवेशक इसे पांच-पांच साल के ब्लॉक में आगे बढ़ा सकते हैं। चाहें तो नए निवेश के साथ इसे जारी रख सकते हैं या बिना अतिरिक्त निवेश के भी खाते में जमा रकम पर ब्याज लेते रह सकते हैं।
इससे बचत को और ज्यादा समय तक बढ़ने का मौका मिलता है और कंपाउंडिंग का फायदा लंबे समय तक मिलता रहता है।
बाजार की उठापटक के बीच भरोसेमंद विकल्प
आज निवेशकों के सामने कई तरह के निवेश विकल्प मौजूद हैं। इनमें से कई विकल्प ज्यादा रिटर्न का दावा करते हैं, लेकिन उनमें जोखिम भी ज्यादा होता है। PPF की खासियत इसकी सादगी और स्थिरता है।
इसमें बाजार के रोजाना उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता। लंबे समय तक नियमित निवेश करने वालों के लिए यह अच्छी बचत तैयार करने का एक भरोसेमंद विकल्प बना रहता है। साथ ही निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम तीनों टैक्स फ्री रहती हैं, जिससे इसका आकर्षण और बढ़ जाता है।
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