Income Tax Refund: पूरा इनकम टैक्स रिफंड नहीं मिला? ये 7 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Income Tax Refund: ITR फाइल करने के बाद अगर पूरा इनकम टैक्स रिफंड नहीं मिला है, तो इसकी कई वजह हो सकती हैं। जानिए रिफंड कम होने के 7 बड़े कारण, और भविष्य में ऐसी परेशानी से बचने का तरीका।

अपडेटेड Jul 01, 2026 पर 3:03 PM
ITR फाइल करने से पहले Form 26AS, AIS और TIS का अच्छी तरह मिलान करें।

Income Tax Refund: ITR फाइल करने के बाद ज्यादातर लोगों को 4 से 5 हफ्तों में टैक्स रिफंड मिल जाता है। लेकिन कई बार खाते में उतनी रकम नहीं आती, जितनी आपने क्लेम की थी। इसकी वजह यह है कि इनकम टैक्स विभाग रिटर्न प्रोसेस करते समय आपकी जानकारी का दोबारा मिलान करता है। अगर कोई गड़बड़ी मिलती है, तो रिफंड की रकम कम हो सकती है।

पूरा रिफंड क्यों नहीं मिलता?

रिटर्न प्रोसेस करते समय इनकम टैक्स विभाग Form 26AS, AIS, TIS, TDS स्टेटमेंट और दूसरी जानकारियों का मिलान करता है। अगर इनमें अंतर मिलता है, तो रिफंड कम हो सकता है। इसके लिए ये 7 कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

  • TDS या TCS की जानकारी में गड़बड़ी
  • बैंक ब्याज या कैपिटल गेन जैसी टैक्स योग्य आय छूट जाना
  • गलत टैक्स छूट (Deduction) का दावा
  • एडवांस टैक्स या सेल्फ-असेसमेंट टैक्स की गलत जानकारी
  • टैक्स के कैलकुलेशन में गलती
  • धारा 234A, 234B और 234C के तहत ब्याज लगना
  • पुराने असेसमेंट ईयर की बकाया टैक्स डिमांड


अगर विभाग कोई बदलाव करता है, तो धारा 143(1) के तहत इंटिमेशन भेजता है। इसमें रिफंड कम होने की वजह भी बताई जाती है।

रिफंड की रकम कैसे तय होती है?

इनकम टैक्स विभाग आपकी आय, टैक्स छूट और टैक्स क्रेडिट का मिलान करता है। इसके लिए वह कंपनी, बैंक और दूसरी वित्तीय संस्थाओं से मिली जानकारी का इस्तेमाल करता है।

इसके बाद आपकी कुल टैक्स देनदारी दोबारा निकाली जाती है। फिर TDS, TCS, एडवांस टैक्स और सेल्फ-असेसमेंट टैक्स को एडजस्ट किया जाता है। अगर आपने जरूरत से ज्यादा टैक्स जमा किया है, तो बची हुई रकम रिफंड के रूप में मिलती है। अगर पुराने साल का कोई टैक्स बकाया है, तो उसे भी रिफंड से एडजस्ट किया जा सकता है।

पुराने टैक्स बकाया का क्या होगा?

अगर किसी पुराने असेसमेंट ईयर का टैक्स बकाया है, तो इनकम टैक्स विभाग उसे आपके रिफंड से एडजस्ट कर सकता है। हालांकि, ऐसा करने से पहले विभाग ई-फाइलिंग पोर्टल पर सूचना देता है।

टैक्सपेयर्स को डिमांड स्वीकार करने, आंशिक रूप से मानने या उस पर आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलता है। तय समय तक जवाब नहीं मिलने या जवाब पर फैसला होने के बाद ही एडजस्टमेंट किया जाता है।

ब्याज भी घटा सकता है रिफंड

अगर आपने ITR देर से फाइल की है, एडवांस टैक्स कम भरा है या उसकी किस्त समय पर जमा नहीं की है, तो धारा 234A, 234B और 234C के तहत ब्याज देना पड़ सकता है।

यह ब्याज आपकी कुल टैक्स देनदारी में जुड़ जाता है। ऐसे में TDS पूरा कटा होने पर भी रिफंड कम मिल सकता है।

अगर रिफंड कम मिले तो क्या करें?

अगर आपको लगता है कि रिफंड गलत तरीके से कम किया गया है, तो सबसे पहले धारा 143(1) के तहत मिला इंटिमेशन पढ़ें। उसमें पूरी वजह लिखी होती है।

अगर कोई गलती दिखे, तो रेक्टिफिकेशन के लिए आवेदन करें। Form 16, Form 16A, Form 26AS, AIS, TIS, टैक्स चालान, निवेश के दस्तावेज, कैपिटल गेन का हिसाब, ITR की कॉपी और पुराने टैक्स रिकॉर्ड संभालकर रखें। जरूरत पड़ने पर यही दस्तावेज काम आएंगे।

रिफंड कम होने से कैसे बचें?

ITR फाइल करने से पहले Form 26AS, AIS और TIS का अच्छी तरह मिलान करें। बैंक ब्याज, कैपिटल गेन और दूसरी सभी टैक्स योग्य आय जरूर शामिल करें। सही ITR फॉर्म चुनें। टैक्स छूट और टैक्स क्रेडिट का दावा दस्तावेजों के आधार पर ही करें।

बैंक अकाउंट पहले से प्री-वैलिडेट रखें। ITR फाइल करने के बाद समय पर ई-वेरिफिकेशन करें। रिटर्न सबमिट करने से पहले एक बार पूरी जानकारी जरूर जांच लें। इससे रिफंड में कटौती या देरी की संभावना काफी कम हो जाती है।

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