SIP Investment: बाजार गिरा, फिर भी लोग SIP में क्यों लगा रहे पैसा? मोतीलाल ओसवाल ने बताई बड़ी वजह

SIP Investment: शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद SIP में निवेश कम नहीं हो रहा। आखिर निवेशक बाजार गिरने पर भी पैसा क्यों लगा रहे हैं? मोतीलाल ओसवाल AMC ने इसके पीछे की बड़ी वजह बताई है, जो हर निवेशक के लिए जानना जरूरी है।

अपडेटेड Jul 09, 2026 पर 9:25 PM
टियर-2 और टियर-3 शहरों से नए SIP निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

SIP Investment: शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव जारी है। इसके बावजूद रिटेल निवेशक SIP के जरिए लगातार निवेश कर रहे हैं। AMFI के ताजा आंकड़े भी यही तस्वीर दिखाते हैं। बाजार में गिरावट के दौरान भी SIP का फ्लो मजबूत बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह अब सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि निवेशकों की आदत बन चुका है।

मार्केट टाइमिंग नहीं, लंबी अवधि पर फोकस

Motilal Oswal Asset Management Company के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ बिजनेस ऑफिसर अखिल चतुर्वेदी का कहना है कि अब लोग SIP को लंबी अवधि की बचत का जरिया मान रहे हैं। पहले की तरह सिर्फ शॉर्ट टर्म रिटर्न के लिए निवेश नहीं किया जा रहा।


उन्होंने बताया कि भारत में घरेलू संपत्ति का सिर्फ 6% हिस्सा इक्विटी में निवेश है। अमेरिका में यह आंकड़ा करीब 48% है। इसका मतलब है कि भारत में इक्विटी निवेश बढ़ने की अभी काफी गुंजाइश है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सेक्टरों में वैल्यूएशन ऊंचे हैं। लेकिन पूरे बाजार में ओवरवैल्यूएशन जैसी स्थिति नहीं दिख रही।

स्मॉलकैप और थीमैटिक फंड में क्यों आ रहा पैसा?

पिछले कुछ वर्षों में स्मॉलकैप और थीमैटिक फंड में निवेश लगातार बढ़ा है। वैल्यूएशन की चिंता के बावजूद निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

साल स्मॉलकैप फंड थीमैटिक फंड
2023 ₹43,291 करोड़ ₹31,744 करोड़
2024 ₹34,874 करोड़ ₹1,76,915 करोड़
2025 ₹52,321 करोड़ ₹38,145 करोड़

अखिल चतुर्वेदी का कहना है कि निवेशक इन फंड्स के जरिए तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं। उनका मानना है कि वैल्यूएशन का आकलन पूरी कैटेगरी के बजाय हर शेयर और सेक्टर के आधार पर करना चाहिए।

छोटे शहरों से बढ़ रहे नए निवेशक

टियर-2 और टियर-3 शहरों से नए निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर युवा निवेशक बाजार से जुड़े प्रोडक्ट्स को तेजी से अपना रहे हैं।

अखिल चतुर्वेदी का कहना है कि SIP अब सिर्फ तेजी वाले बाजार का निवेश नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की आदत बनता जा रहा है।

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