आज के समय में मेडिकल इंफ्लेशन यानी इलाज और दवाइयों की बढ़ती लागत हर परिवार के बजट को प्रभावित कर रही है। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस सिर्फ एक पॉलिसी नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा की ढाल बन चुका है। लेकिन अक्सर लोग एक बार पॉलिसी खरीदकर उसे सालों तक बिना रिव्यू किए चलाते रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मेडिकल खर्च और नई बीमारियों के दौर में हेल्थ इंश्योरेंस का समय-समय पर रिव्यू करना बेहद जरूरी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में मेडिकल खर्चों में 12-15% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। अस्पतालों में भर्ती होने की लागत, सर्जरी, और दवाइयों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अगर आपकी पॉलिसी का कवरेज पुराना है, तो यह मुश्किल समय में पर्याप्त मदद नहीं कर पाएगी।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर साल अपनी पॉलिसी की सम इंश्योर्ड (कवरेज राशि) को चेक करें। अगर यह आपके शहर और परिवार की ज़रूरतों के हिसाब से कम है, तो टॉप-अप प्लान या सुपर टॉप-अप लेना बेहतर होगा। साथ ही, यह देखना जरूरी है कि आपकी पॉलिसी में डे-केयर ट्रीटमेंट, प्री और पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन खर्च, और क्रिटिकल इलनेस कवरेज शामिल है या नहीं।
एक और अहम पहलू है नेटवर्क हॉस्पिटल्स। कई बार लोग पॉलिसी लेते समय यह नहीं देखते कि उनके नजदीकी अच्छे अस्पताल उस इंश्योरेंस कंपनी के नेटवर्क में हैं या नहीं। इससे कैशलेस सुविधा पाने में दिक्कत होती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि फैमिली फ्लोटर प्लान आज के समय में अधिक फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इसमें पूरे परिवार को एक ही कवरेज के तहत सुरक्षा मिलती है। वहीं, जिन परिवारों में बुजुर्ग सदस्य हैं, उनके लिए अलग से सीनियर सिटीजन हेल्थ प्लान लेना समझदारी होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि हेल्थ इंश्योरेंस को सिर्फ़ टैक्स बचत का साधन न मानें। इसे अपने परिवार की सुरक्षा और भविष्य की मेडिकल जरूरतों को ध्यान में रखकर चुनें। हर साल पॉलिसी का रिव्यू करें, कवरेज बढ़ाएँ और मेडिकल इंफ्लेशन को ध्यान में रखते हुए अपडेटेड रहें।