भारतीय शेयर बाजार में अब एक नई ताकत तेजी से उभर रही है Gen Z निवेशक। 1997 से 2012 के बीच जन्मी यह पीढ़ी न सिर्फ तकनीक में माहिर है बल्कि निवेश के तौर-तरीकों को भी बदल रही है। पहले जहां निवेश को अनुभवी और बड़े खिलाड़ियों का खेल माना जाता था, वहीं अब युवा पीढ़ी छोटे-छोटे टिकट साइज के साथ बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और SIP का बढ़ता चलन
Gen Z निवेशक पारंपरिक तरीकों से हटकर फिनटेक ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। छोटे शहरों और कस्बों से भी युवा अब आसानी से निवेश कर पा रहे हैं। खास बात यह है कि Systematic Investment Plan (SIP) उनकी पहली पसंद बन चुकी है। छोटे-छोटे अमाउंट से शुरू होकर यह निवेश लंबे समय में बड़ी राशि में बदल रहा है।
यह पीढ़ी सिर्फ पैसे बचाने तक सीमित नहीं है। वे म्यूचुअल फंड, इक्विटी और यहां तक कि क्रिप्टोकरेंसी जैसे विकल्पों में भी सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं। तकनीक की समझ और सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट रहने की वजह से Gen Z निवेशक बाजार की चाल को जल्दी पकड़ लेते हैं।
मान लीजिए, अर्पिता नाम की 24 वर्षीय युवती ने अपनी पहली नौकरी के साथ ही SIP शुरू किया। हर महीने 2000 रुपये निवेश करने से उसे न सिर्फ वित्तीय अनुशासन मिला बल्कि यह भरोसा भी कि उसका भविष्य सुरक्षित है। अर्पिता जैसी हजारों कहानियां अब भारत के निवेश परिदृश्य को बदल रही हैं।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि Gen Z की यह सक्रियता भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। छोटे टिकट साइज के बावजूद उनकी संख्या इतनी बड़ी है कि यह बाजार में स्थिरता और लंबी अवधि की ग्रोथ ला सकती है।