New ITR Forms Secondary Address Rule: असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने वाले नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एक बेहद जरूरी अपडेट आया है। आयकर विभाग ने इस साल के नए आईटीआर फॉर्म्स में एक नया कॉलम जोड़ दिया है, जिसमें टैक्सपेयर्स से उनके मुख्य पते के साथ-साथ एक 'दूसरा पता' भी मांगा जा रहा है।
इस नए बदलाव ने उन सैलरीड कर्मचारियों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा है जो अपने होमटाउन से दूर किसी दूसरे शहर में किराये के मकान में रहते हैं और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) क्लेम करते हैं। आइए समझते हैं कि टैक्स डिपार्टमेंट ने यह नियम क्यों लागू किया है और इसका आपके HRA क्लेम पर क्या असर पड़ सकता है।
क्यों जरूरी हुआ ITR फॉर्म में 'सेकेंडरी एड्रेस'?
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दो एड्रेस मांगने के पीछे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का मकसद टैक्सपेयर्स के कम्युनिकेशन रिकॉर्ड को दुरुस्त करना और वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ाना है।
डेलॉयट इंडिया की पार्टनर मौसमी नागरसेनकर के मुताबिक, 'पहले टैक्सपेयर्स को सिर्फ एक ही पता देना होता था। नए फॉर्म में प्राइमरी और सेकेंडरी एड्रेस का विकल्प उन लोगों के लिए दिया गया है जो एक से अधिक घरों में रहते हैं या जिनका स्थायी और अस्थायी पता अलग है। इससे डिपार्टमेंट के पास टैक्सपेयर का अपडेटेड कॉन्टैक्ट इन्फॉर्मेशन रहेगा और पुराने या अधूरे पते की वजह से नोटिस या जरूरी कम्युनिकेशन्स मिस होने की दिक्कत खत्म होगी।'
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह नियम सीधे तौर पर सिर्फ HRA के लिए नहीं है, लेकिन इसके जरिए टैक्स विभाग के लिए HRA क्लेम की जांच करना काफी आसान हो जाएगा। कई बार लोग नौकरी किसी और शहर में करते हैं, रेंट रसीद कहीं और की दिखाते हैं और प्राइमरी एड्रेस अपने माता-पिता के घर का डाल देते हैं। अब दो पते होने से यह स्पष्ट हो जाएगा कि टैक्सपेयर असल में किराये पर कहां रह रहा था।
किसे देना होगा 'दूसरा पता'?
यह नया नियम उन सभी कर्मचारियों के लिए बेहद मददगार और जरूरी है जो पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत HRA का लाभ ले रहे हैं। अगर आप दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे शहरों में नौकरी की वजह से किराये पर रह रहे हैं, लेकिन आपका परमानेंट होम आपके गांव या किसी दूसरे शहर में है।
ऐसे मामलों में आप जहां वर्तमान में किराये पर रह रहे हैं, उसे प्राइमरी एड्रेस के रूप में दिखा सकते हैं और अपने होमटाउन या परमानेंट होम को सेकेंडरी एड्रेस के कॉलम में भर सकते हैं।
वैसे इस कॉलम को भरने मात्र से आपका HRA क्लेम पास नहीं हो जाएगा। HRA छूट का लाभ पाने के लिए आपके पास वैध रेंट रसीद, रेंट एग्रीमेंट और मकान मालिक का पैन कार्ड जैसे दस्तावेज होने ही चाहिए।
गलत या अधूरा पता डाला तो क्या रिजेक्ट हो जाएगा HRA?
अगर आपके दोनों पतों में कोई विसंगति या टाइपो एरर हो जाती है, तो क्या होगा? क्लियरटैक्स की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन के मुताबिक, इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अगर आपका सेकेंडरी एड्रेस आपके रेंट एग्रीमेंट या रसीदों से मैच नहीं खाता है, तो टैक्स असेसमेंट के दौरान आपके HRA क्लेम पर सवाल उठाए जा सकते हैं।
पते का मिसमैच होने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपसे स्पष्टीकरण मांग सकता है। वेरिफिकेशन के लिए आपसे रेंट एग्रीमेंट, लैंडलॉर्ड की डिटेल और एड्रेस प्रूफ सबमिट करने को कहा जा सकता है, जिससे आपका रिफंड अटक सकता है या प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है। इसके साथ ही अगर आप मांगे जाने पर सही और मैचिंग सपोर्टिंग डाक्यूमेंट्स पेश नहीं कर पाते हैं, तो इनकम टैक्स विभाग आपके HRA क्लेम को खारिज भी कर सकता है।